thats why father Raj Kapoor was always seen Lack of in Rishi Kapoor – पिता राज को ऋषि कपूर में हमेशा नजर आती थी कमी, वजह बताई तो…

बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट हिंदी सिनेमा जगत में कदम रखने वाले ऋषि कपूर अपने जमाने में चॉकलेटी हीरो के रूप में जाने जाते हैं। ऋषि कपूर एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते जिसनें बॉलीवुड के 100 साल में से 85 वर्ष का योगदान दिया है। ऋषि कपूर ने अपने फिल्मी करियर कई हिट फिल्में दी हैं जिसके लिए उन्हें कई बार अवार्ड से नवाजा गया है। साल 2008 में ऋषि कपूर को फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी नवाजा गया। सभी जानते हैं कि ऋषि कपूर ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत साल 1970 में आई पिता राज कपूर की सुपरहिट फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ से की थी। आज भी लोग इस फिल्म को देखकर भावूक हो जाते हैं। इस फिल्म में ऋषि कपूर ने अपने पिता राज कपूर के बचपन का रोल किया था और उन्हें काफी सराहा भी गया था। यहां तक कि ऋषि कपूर को डेब्यू चाइल्ज आर्टिस्ट अवार्ड भी मिला था लेकिन इसके बावजूद राज कपूर को उनमें कमी नजर आती थी। चलिए बताते हैं जब पिता की इस बात से परेशान होकर ऋषि कपूर ने जवाब मांगा तो क्या हुआ।

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ऋषि कपूर ने बॉलीवुड में 1970 में अपने पिता की फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ से बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट डेब्यू किया था। इस फिल्म में ऋषि ने अपने पिता के बचपन का किरदार निभाया था। हालंकि ऋषि कपूर ने बॉलीवुड में बतौर एक्टर 1973 में फिल्म बॉबी से किया था जिसमें उनके अपोजिट डिंपल कपाड़िया थीं। इसके बावजूद ऋषि कपूर के लिए उनके पिता राज कपूर की फिल्म काफी मायने रखती है।

ऋषि कपूर ने ‘मेरा नाम जोकर’ में जब कोई सीन करते तो सभी उनकी तारीफ करते थे लेकिन राज कपूर हर बार यही कहते थे कि कुछ कमी है। ऋषि वापस पूरी मेहनत से शॉट देते सबसे तारीफे बटोरते लेकिन पिता को हमेशा कमी नजर आती थी। वह हमेशा यही कहते थे कि ठीक है लेकिन कुछ कमी है।

फिल्म की सफलता के बाद ऋषि कपूर को अवार्ड देने के लिए बुलाया गया तब भी उन्होंने पिता से कहा कि अब तो तारीफ कर दीजिए। इसके बावजूद राज कपूर ने वही जवाब दिया। ऋषि कपूर ने परेशान होकर पिता से पूछ लिया कि आज बता ही दीजिए कि क्या कमी रह गई। उस वक्त राज कपूर ने ऋषि को बताया कि जो सवाल वह पूछ रहे हैं वही बात वह खुद पिता पृथ्वीराज कपूर से पूछा करते थे। तब पृथ्वीराज ने जो कहानी राज कपूर को सुनाई थी वही कहानी ऋषि को सुनाई।

कहानी कुछ इस तरह थी कि एक नट अपने बेटे के साथ करतब दिखाता था। बाद में बेटा अकेला करतब करने लगा और पिता से पूछने पर यही जवाब पाता कि कुछ कमी है। पिता (नट) की बात से परेशान होकर बेटे ने कहा कि आज के बाद कमी वाली बात न कहे। बेटे खुद पर काफी यकीन था लेकिन एक दिन रस्सी पर करतब करते हुए गिर गया। इस कहानी से जो सीख राज कपूर ने ली वही ऋषि को बताई कि काम पर गर्व करके बेहतर करने की कोशिश करो और किसी भी चीज को हल्के में न लें।

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