When Arun Kumar Mukherjee died in Ashok Kumar’s arms – जब अशोक कुमार की बाहों में ही भाई ने तोड़ दिया दम

हिंदी सिनेमा जगत में दादा मुनि के नाम से मशहूर एक्टर अशोक कुमार का फिल्म इंड्रस्टी में किया योगदान आखिर कौन भुला सकता है। 50 और 60 के दशक में अशोक कुमार का फिल्मों में सिगार फूंकते और मुस्कुराते हुए शख्स का किरदार दर्शकों के लिए जैसे फिल्मों का एक जाना पहचाना और अपनापन वाला सहज चरित्र हो गया था। अशोक कुमार का जन्म बिहार के भागलपुर में एक मध्यम वर्गीय बंगाली परिवार में हुआ था। बात अशोक कुमार की हो रही है तो चलिए आज हम आपको उनसे जुड़ा एक बेहद ही दुखदायी किस्सा बताते हैं। जब उनके मौसेरे भाई की मौत उन्हीं के हाथों में हो गई थी।

दरअसल यह वाकया 6 दिसंबर साल 1955 का है। उस दिन अशोक कुमार ने अपने मौसेरे भाई अरुण कुमार मुखर्जी को फोन किया और अपने साथ फिल्म बंदिश का ट्रायल देखने चलने की बात कही। अरुण कुमार अपने भाई को बहुत मानते थे। उनका फोन आते ही वह तैयार होकर उनके साथ ट्रायल देखने चले गए लेकिन लौटते समय उनकी अचानक मौत हो गई थी।

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जब फिल्म का ट्रायल देखकर अरुण कुमार मुखर्जी अपने भाई अशोक कुमार के साथ उनकी कार से लौट रहे थे, तभी उनके सीने में तेज दर्द होना शुरू हो गया। भाई की हालत बिगड़ता देख अशोक कुमार ने कार को अस्पताल की तरफ घुमा लिया। अरुण कुमार को इतना तेज चेस्ट पैन हुआ कि वह अस्पताल भी नहीं पहुंच पाए और उन्होंने अशोक कुमार की बाहों में ही दम तोड़ दिया।

बता दें कि अरुण कुमार मुखर्जी हिंदी सिनेमा जगत के मशहूर म्यूजिक कंपोजर और एक्टर थे। उन्हें आज भी ज्वार भाटा (1944), परिणीता(1953) और समाज (1954) जैसी फिल्मों के लिए याद किया जाता है।

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