When pran could have been victims of rioting After the partition of 1947, wife Shukla Sikhand save his life – 1947 बंटवारे के बाद दंगों का शिकार हो सकते थे प्राण, पत्नी ने ऐसे बचाई जान

‘भारत तू दुनिया की छोड़ पहले अपनी सोच, राम ने हर युग में जन्म लिया है लेकिन लक्षमण जैसा भाई दोबारा पैदा नहीं हुआ’ ‘मैं भी पुरानी चिड़ीमार हूं पर कतरना अच्छी तरह से जानता हूं’ फिल्मों बोले गए प्राण के ये डायलॉग आज भी उनकी याद दिला ही देते हैं। प्राण बॉलीवुड में अपनी बेहतरीन अदाकारी से जबरदस्त छाप छोड़ी है। बात प्राण की हो रही है तो चलिए आज हम उनसे जुड़ा एक रोचक किस्सा बताते हैं जब पत्नी की वजह से प्राण के प्राण, नहीं तो लाहौर में हो जाते दंगे के शिकार।

दरअसल यह वाकया साल 1947 का है जिस वक्त देश के विभाजन की वजह से तनाव का माहौल बना हुआ था। उस वक्त प्राण की शादी हो चुकी थी और उनका एक बेटा सुनील भी था। प्राण उन दिनों लाहौर में रहते थे। भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान हर तरफ तनाव का माहौल था।

माहौल को बिगड़ता देख प्राण ने पत्नी शुक्ला सिकंद और बेटे को इंदौर भेज दिया, जहां शुक्ला की बहन रहती थीं। 11 अगस्त 1947, यह वो दिन था जब पत्नी की जिद ने प्राण की जान बचा ली थी। इस दिन प्राण के बेटे का पहला जन्मदिन था। क्योंकि शुक्ला सिकंद और उनका बेटा इंदौर में थे इसलिए पत्नी ने जिद करके बेटे का पहला जन्मदिन सेलिब्रेट करने के लिए उन्हें इंदौर बुला लिया। हालाकिं प्राण पहले पत्नी की यह बात नहीं मान रहे थे लेकिन पत्नी की जिद और बेटे का प्यार उन्हें इंदौर खींच लाया था

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प्राण लाहौर से इंदौर के लिए सिर्फ एक हफ्ते के लिए आए थे और जन्मदिन के दो दिन बाद वापस लौटने वाले थे। वहीं दो दिन पहले ही लाहौर में दंगे उग्र हो गए और सैंकड़ों लोगों की जान चली गई। तब उन्होंने शुक्र किया कि बीवी अगर इंदौर नहीं बुलाती तो वह भी दंगे की चपेट में आ जाते और इस तरह प्राण की पत्नी की जिद ने उनकी जान बचा ली थी।

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