When Rajendra Kumar afraid of this shot, he gave all his money to film Daku – जब इस शॉट से घबराकर राजेंद्र कुमार ने ‘डाकू’ को दे दिए अपने सारे पैसे

1950 में आई फिल्म ‘जोगन’ से शुरुआत करने वाले एक्टर राजेंद्र कुमार को अपने जमाने का जुबली हीरो कहा जाता था। ‘जोगन’ के बाद 1957 में आई फिल्म ‘मदर इंडिया’ में उनके छोटे से रोल को काफी सराहा गया और इस वजह से उन्हें कई फिल्मों के ऑफर भी मिलने लगे। 1959 में आई फिल्म गूंज उठी शहनाई लीड एक्टर के तौर पर उनकी पहली सफल फिल्म थी। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के एक बाद हिट फिल्में देते चले गए। धूल का फूल, मेरे महबूब, आई मिलन की बेला, संगम, आरजू, और सूरज जैसी कई हिट की सफलता के बाद लोग उन्हें जुबली कुमार के नाम से बुलाने लगे थे। चलिए आज हम आपको राजेंद्र कुमार से जुड़ा एक रोचक किस्सा बताते हैं। जब एक शॉट से राजेंद्र कुमार इतना घबरा गए थे कि अपने सारे पैसे फिल्म में डाकू का रोल निभाने वाले एक्टर को दे दिए थे।

दरअसल यह वाकया सन् 1964 में, बॉलीवुड के फेमस डायरेक्टर के. आसिफ की फिल्म ‘सस्ता खून महंगा पानी’ का है। इस फिल्म के हीरो राजेंद्र कुमार पहले ही शॉट में इतना घबरा गए थे कि कई रिटेक करने के बाद भी शॉट पूरा नहीं हो पाया था। शॉट पूरा न होने के बावजूद के.आसिफ को पैकअप करना पड़ा था।

इस फिल्म का सेट मुंबई के मोहन स्टूडियो में लगा था। डायेक्टर के. आसिफ ने इस फिल्म के सेट को खासतौर से बनवाया था। सेट के लिए असली पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था। हुआ कुछ था कि फिल्म में डाकू बने बलशाली एक्टर को राजेंद्र कुमार पर कुल्हाड़ी से वार करना था। कुल्हाड़ी का वार असली लगे इसलिए एक्टर को कहा गया था कि वह पूरी जान से कुल्हाड़ी जमीन पर मारे ताकि खासतौर से सेट पर लगवाए गए पत्थरों से चिंगारी निकल सके।

वहीं राजेंद्र कुमार अपने सामने बलशाली डाकू के कुल्हाड़ी के वार से काफी डर गए। राजेंद्र कुमार उस वक्त इतना डर गए थे कि कई रीटेक के बाद भी सीन पूरा नहीं हो पाया था। अगले दिन जब दोबारा यही सीन होना था। तब राजेंद्र कुमार ने सीन से पहले डाकू बने एक्टर को अपने पास बुलाया और अपने बटुए से सारे पैसे निकाल कर दे दिए और कहा था कि वह कुल्हाड़ी ध्यान से चलाए। इसके बाद शायद राजेंद्र कुमार का डर निकल गया था इसलिए यह शॉट दो ही टेक में पूरा हो गया था। हालाकिं यह फिल्म किन्हीं वजहों से रिलीज नहीं हुई थी।

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