When the police reached Balraj Sahni’s house to arrest, the house was searched for 3 days for bam – तब बलराज साहनी को आतंकी समझ बैठी थी पुलिस? अरेस्ट वारंट लेकर 3 दिन तक घर में ढूंढा बम

‘ए मेरी जोहरा जंबी तुझे मालूम नहीं’ साल 1965 में रिलीज हुई फिल्म वक्त का यह गाना आज भी लोगों की जुबां पर रहता है। गीतकार साहिर लुधियानवी का यह गाना बॉलीवुड के मशहूर एक्टर बलराज साहनी पर फिल्माया गया था। बलराज साहनी ऐसे इंसान थे जिन्होंने साहित्य, कला संस्कृति, पत्रकारिता, और सिनेमा में कई बार अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। वह बॉलीवुड के एक उम्दा कलाकार थे। चलिए आज हम बलराज साहनी से जुड़ा एक रोचक किस्सा आपको याद दिलाते हैं जब अरेस्ट और सर्च वारंट लेकर पुलिस ने उनकी घर की तीन दिन तक तलाशी ली थी।

यह वाकया उस वक्त का है ब्रिटिश राज का है। तब बलराज साहनी लाहौर के कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में मास्टर्स की डिग्री हासिल की थी। मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के बाद बलराज साहनी परिवार के साथ रावलपिंडी रहते थे। बताते चले कि बलराज साहनी ने अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी स्नातक की डिग्री हासिल की थी।

बड़ी खबरें

रावलपिंडी में रहने के दौरान एक दिन पुलिस बलराज साहनी की गिरफ्तारी और सर्च वारंट लेकर लेकर उनके घर पहुंच गई। कहा जाता है कि पुलिस ने 3 दिन तक बलराज साहनी के घर की तलाशी ली थी और कुछ न मिलने पर खाली हाथ लौट गई थी।

दरअसल हुआ कुछ यूं था कि बलराज साहनी ने रावलपिंडी से अपनी चचेरी बहन को एक चिट्ठी भेजी थी, जोकि मेरठ में रहती थीं। बलराज साहनी की इस चचेरी बहन का नाम उर्मिला शास्त्री था। उर्मिला शास्त्री उस वक्त मेरठ में कांग्रेस पार्टी की नेता भी थीं। बताया जाता है, बलराज साहनी ने चचेरी बहन को चिट्ठी में लिखा था कि दो बमों के लिए ऑर्डर कर दिया गया है और जल्द ही बम घर पहुंच जाएंगे।

यह चिट्ठी किसी तरह पुलिस के हाथ लग तो बलराज साहनी के घर की तलाशी के साथ-साथ उनकी गिरफ्तारी का भी वारंट जारी हो गया था। दरअसल बलराज उस चिट्ठी में तांगे में इस्तेमाल किए जाने वाले लकड़ी के वोडन शिफ्ट की बात कर रहे थे, जिन्हें हिंदी में बम कहा जाता है।

बता दें कि बलराज ने अपने जीवन में कई किताबें लिखीं जिसमें 1960 में “मेरा सफरनामा” और 1969 में आई “मेरा रूसी सफरनामा” भी बहुत प्रसिद्ध हुई। बच्चों के लिए कहानी संग्रह गपोङ शंख, कई नाटक जैसे कि कुर्सी और फिल्म बाजी का स्क्रीन प्ले भी लिखे थे। उन्हें लेखक शिरोमणी अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है और 1969 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *