बिजली कटौती की तो कंपनियों पर लगेगा जुर्माना, सब्सिडी भी सीधे खाते में! – Narendra modi led bjp govt wants to amend Electricity Act to impose heavy fine on power cut and dbt

आने वाली गर्मी में अगर आपके घर की बिजली कटती है तो पावर सप्लाई करने वाली कंपनी की ये लापरवाही उस पर भारी पड़ सकती है। केन्द्र सरकार का ऊर्जा मंत्रालय बिजली कानून में तब्दीली करने पर विचार कर रहा है। इसके बाद बिजली सप्लाई में कटौती पर कंपनियों को भारी जुर्माना चुकाना पड़ेगा। इसके अलावा ऊर्जा मंत्रालय रसोई गैस की तरह बिजली की सब्सिडी भी सीधे उपभोक्ताओं के खाते में ट्रांसफर करने पर विचार कर रहा है। ऊर्जा मंत्रालय नये कानून को आगामी बजट सत्र के दौरान ही बिजली एक्ट में संशोधन करने पर विचार कर रहा है। नये बिल को संसद के बजट सत्र के दौरान पेश किया जा सकता है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर यह बिल कानून बल जाता है तो बिजली सप्लाई के दायित्व को पूरा ना करने पर प्रतिदिन के हिसाब से पेनाल्टी ली जाएगी। यह जुर्माना प्रति दिन के एक हजार रुपये तक हो सकता है।

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हालांकि बिल में यह भी लिखा होगा कि प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, तूफान, भूकंप, चक्रवात ) के दौरान बिजली सप्लाई कंपनियों को इस प्रावधान से छूट मिलेगी। ऊर्जा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से इकॉनमिक टाइम्स ने रिपोर्ट दी है कि लाइसेंस देते वक्त बिजली कंपनियों को चौबीसो घंटे सातों दिन बिजली सप्लाई देने का दायित्व दिया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक जुर्माने की रकम में भी कई गुना इजाफा किया जा सकता है। इस ड्राफ्ट बिल को पहले स्टेकहॉल्डर के पास उनकी प्रतिक्रियाओं के लिए भेजा जाएगा, इसके बाद इस पर कन्द्रीय कैबिनेट की मंजूरी ली जाएगी तब जाकर इसे संसद में पेश किया जाएगा।

ऊर्जा मंत्री आरके सिंह पहले भी बिजली आपूर्तिकर्ताओं की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए बिजली कानून में तब्दीली की पैरवी कर चुके हैं। इसके अलावा ऊर्जा मंत्रालय रियायती बिजली के सदुपयोग को सुनिश्चित करने के लिए सब्सिडी को सीधे उपभक्ताओं के खाते में भेजने पर विचार कर रहा है। हालांकि जिन ग्रामीण इलाकों में मीटर रीडिंग प्रणाली नहीं है वहां इस प्रणाली को लागू करने में दिक्कत आ सकती है।

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