मुस्‍लिम, राजपूत, सिख, महार… सबने मिल किया ऐसा प्रहार कि अंधेरे में जंग से भाग खड़ी हुई थी ब्रिटिश फौज – story of Maratha General Mahadji Shinde Maratha warrior who defeated British army with the help of mahars and muslims in Wadgaon war near mumbai

भीमा कोरेगांव के बहाने देश में दलित अस्मिता और मराठी पहचान पर गरमागरम बहस हो रही है। दलित समुदाय भीमा-कोरेगांव की लड़ाई को अपने समुदाय की गरिमा से जोड़कर देखता है। 200 साल पहले हुई इस लड़ाई को लेकर दावा किया जाता है कि इस युद्ध में महारों की सेना ने अंग्रेजों के साथ मिलकर मराठा पेशवाओं को परास्त कर दिया था। लेकिन एक युद्ध का जिक्र कम ही होता है जिसमें मराठाओं ने महार योद्धाओं के साथ मिलकर अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिये थे। इस युद्ध के नायक थे मराठा शासक महादजी शिंदे। आजादी हासिल करने की राह में ऐसे कम ही युद्ध हुए थे जहां भारतीय ताकतों को विजय मिली थी। वड़गांव का युद्ध एक ऐसी ही जंग थी। बात आज से ठीक 239 साल पहले की है। वो वक्त था 13/14 जनवरी 1779 का। मराठा जनरल महादजी शिंदे ने शातिर अंग्रेजों को उनकी ही भाषा में जवाब देने की सोची। वह अंग्रेजी सेना को लुभाते-लुभाते खंडाला की पहाड़ियों तक ले आए। ये इलाका ऐसा था जो मराठा सैनिकों के लिए जानी-पहचानी ‘पिच’ थी। मराठाओं की अश्वारोही सेना ने अंग्रेजों को चारों ओर से घेर लिया, इतना ही नहीं खोपली में उनके सप्लाई बेस को भी ध्वस्त कर दिया।

रेडिफ डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक हताश और निराश अंग्रेजी सैनिक रात के अंधेरे में तलगांव से पीछे हटने लगे, लेकिन मराठाओं की फौज कोई गलती नहीं करने वाली थी, जनरल महादजी की फौज ने फिर हमला किया और अंग्रेजी सेना रात के अंधेरे में वडगांव की ओर भागकर अपनी जान बचा पाई। लेकिन मराठा सैनिक अंग्रेजों का पीछा कहां छोड़ने वाले थे। वडगांव में अंग्रेजों को चारों ओर से घेर लिया गया। यहां पर ब्रितानी सेना के पास ना तो खाना था और ना ही पानी। जब इनके पास भूखों मरने की नौबत आ गई तो थकहार इन्होंने मराठा फौज के सामने सरेंडर कर दिया। यह ब्रिटिश फौज की एक ऐसी हार थी जिसने अंग्रेजों के दर्प को चकनाचूर कर दिया।

हालांकि यहां पर भारतीय वही भूल कर बैठे जिसे दिल्ली के राजपूत राजा पृथ्वीराज चौहान ने 12वीं सदी में इस्लामी हमलावर मोहम्मद गौरी के साथ की थी। मराठा फौज ने दया और धर्म का परिचय देते हुए अंग्रेजों को बंबई वापस लौटने की अनुमति दे दी। इसका नतीजा यह हुआ कि अगले दिन मराठाओं को अंग्रेंजों से फिर एक लड़ाई लड़नी पड़ी। वड़गांव का युद्ध भारत की विजय थी। इस लड़ाई में अंग्रेजों को मात देने वाली मराठा फौज में मुस्लिम, राजपूत, सिख शामिल थे। जबकि पैदल सेना में मोर्चा महार संभाल रहे थे। हांलाकि अंग्रेजों ने भारत पर राज करने के बाद इस युद्ध का इतिहास अपने तरीके से लिखा। अंग्रेज लेफ्टिनेंट स्टीवर्ट जो कि अंग्रेजों के अग्रिम मोर्चे का नेतृत्व कर रहा था उसे मराठाओं ने जनवरी महीने के शुरुआत में ही मार दिया था। लेकिन इतिहास में उसे वड़गांव युद्ध के ‘हीरो’ का दर्जा दिया गया, और उसके उस शौर्य को पंक्तिबद्ध किया गया। जबकि वड़गांव का युद्ध उसकी मौत के लगभग 2 महीने बाद हुआ था। बाद में महाराष्ट्र के वड़गांव में एक कब्र की पहचान कर गया कि यह लेफ्टिनेंट स्टीवर्ट की कब्र है उसके बाद हर साल वहां पर मेले का आयोजन किया जाने लगा।

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