राजस्थान हत्या: ‘शंभू भवानी’ कहलाना पसंद करता था आरोपी, धार्मिक काम-काज से था जुड़ाव – shambhulal regar accused of killing muslim man from west bengal in rajsthan liked to be called Shambhu Bhawani

राजस्थान में मुस्लिम मजदूर की हत्या का आरोपी शंभूलाल रेगर खुद को ‘शंभू भवानी’ कहलाना पसंद करता था। उसके दोस्त शंभूलाल रेगर को इसी नाम से पुकारना पसंद करते थे। हिन्दू धर्म में शंभू भगवान शिव को और भवानी मां पार्वती को कहा जाता है। शंभूलाल रेगर अपने इलाके में खुद को एक धार्मिक शख्स के रूप में पेश करता था। इंडियन एक्सप्रेस संवाददाता दीप मुखर्जी की रिपोर्ट के मुताबिक सोशल मीडिया पर वो अक्सर भगवा झंड़ों के साथ दिखता और धार्मिक कर्मकांड करते हुए अपने फोटो पोस्ट करता था। इन वजहों से वह अपने इलाके में अच्छा खासा लोकप्रिय भी था। राजस्थान के राजसमंद में 36 साल के शंभूलाल रेगर को लोग अपनी बेटी और भतीजे के साथ अक्सर झील की ओर जाते देखते थे। उसकी बेटी मानसिक रूप से बीमार थी। झील के किनारे वह योग करता और अक्सर फेसबुक पर इसकी फोटो डालता। शंभूलाल रेगर के फेसबुक पोस्ट में इस तरह की कई तस्वीरें भरी पड़ी हुई हैं। बता दें कि रेगर ने राजसमंद में एक मुस्लिम शख्स की बेरहमी से हत्या कर दी थी इसके बाद उसने उस शख्स को जला दिया। शंभूलाल रेगर ने अपने नाबालिग भतीजे से इस नृशंस हत्या का वीडियो बनवाया इसके बाद उसे वायरल कर दिया।

राजसमंद में जिम चलाने वाले और हिन्दू जागरण मंच से जुड़े नीतेश माली कहते हैं कि वह झील के किनारे योग करता और उसकी तस्वीरें डालता था। हालांकि नीतेश माली का कहना है कि शंभूलाल किसी संगठन से जुड़ा नहीं था। राजसमंद के पड़ोसी कहते हैं कि नोटबंदी के दौरान हुए घाटे की वजह से शंभूलाल रेगर का मार्बल का बिजनेस बंद हो गया था। राजसमंद में रेगर मोहल्ला के निवासी राकेश कहते हैं कि पिछले साल से वह बेरोजगार था, अक्सर मंदिरों में दिखता, गणेश चतुर्थी में नाचता और सोशल मीडिया पर शंभू भवानी के नाम से तस्वीरें अपलोड करता था।

शंभूलाल ने एक वीडियो बाबा रामदेव के मंदिर में शूट किया है। बाबा रामदेव रेगर समुदाय के लोक देवता हैं। रेगर समुदाय की कथा-कहानियों में उनका जिक्र मिलता है। आरोपी शंभू लाल ने व्हाट्सअप पर एक सोशल ग्रुप बनाया था जिसका नाम था शंभू भवानी ग्रुप। शंभू इस ग्रुप का एडमिन था। स्थानीय लोगों के मुताबिक वह हमेशा अपने ललाट पर तिलक लगाता और धार्मिक समारोह में बढ़-चढ़ कर शिरकत करता था। गांव के स्थानीय मंदिर की पुजारिन कंसा देवी ने कहा कि मैं अक्सर उसे देखती, रेगर मंदिर आता, कभी कभी दो बच्चों के साथ। 6 दिसंबर को मैंने उसे मंदिर आते और एक वीडियो बनाते देखा था। इस घटना के बाद कई लोगों रेगर के परिवार से दूरी बना ली है।

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