सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार से मांगी जानकारी- दूसरे देशों में मौत की सजा देने के क्या हैं तरीके? – Supreme Court Asks Information to Centre About Methods of Death Penalty in Other Countries

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार से कहा कि दूसरे देशों में मृत्यु दंड पाने वाले कैदियों की सजा पर अमल के प्रचलित विभिन्न तरीकों से उसे अवगत कराया जाए। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इसके साथ ही स्पष्ट किया कि शीर्ष अदालत यह निर्णय नहीं करेगा कि भारत में मृत्यु दंड पाने वाले कैदियों की सजा पर अमल करने का कौन सा तरीका होना चाहिए। पीठ ने कहा, ‘‘हम नहीं कह सकते कि क्या तरीका होना चाहिए। हमे बताएं कि दूसरे देशों में क्या हो रहा है।’’ केन्द्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने मृत्यु दंड पाने वाले कैदी को फांसी पर लटकाने के कानूनी प्रावधान निरस्त करने के लिए दायर याचिका का जवाब देने के लिए कुछ समय देने का अनुरोध किया।

इस याचिका पर संक्षिप्त सुनवाई के दौरान आनंद ने कहा कि ऐसे कैदी को फांसी पर लटकाना एक व्यावहारिक तरीका है क्योंकि प्राणघातक इंजेक्शन देना कारगर नहीं है। पीठ ने अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा की जनहित पर केन्द्र को जवाब देने के लिए चार सप्ताह का वक्त दे दिया। इस याचिका में विधि आयोग की 187वीं रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है जिसमें मौत की सजा देने के मौजूदा तरीके को कानून से हटाने की सिफारिश की गई थी।

संबंधित खबरें

इस याचिका पर न्यायालय ने पिछले साल छह अक्तूबर को केन्द्र से जवाब मांगा था। इस याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त जीने के अधिकार का जिक्र करते हुए कहा गया है कि मृत्यु दण्ड पाने वाले कैदी का भी गरिमा पूर्ण तरीके से सजा पर अमल का अधिकार है ताकि मौत कम पीड़ा दायक हो। याचिका के अनुसार विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अनेक देशों ने मौत की सजा पर अमल के लिए फांसी के फंदे पर लटकाने का तरीका खत्म करके बिजली का करेन्ट देना, गोली मारने या घातक इंजेक्शन देने के तरीके अपनाए हैं। याचिका में कहा गया है कि गरिमा के साथ मौत भी जीने के अधिकार का ही हिस्सा है और फांसी के फंदे पर लटकाने का मौजूदा तरीका कैदी की पीड़ा को लंबा खींचता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *