1984 दंगे: जिस किशोरीलाल ने सिख को टुकड़े-टुकड़े किया था, उसे रिहा कराना चाहती थी शीला दीक्षित सरकार – 1984 anti sikh riot sheila dixit led congress govt wanted to release convict kishori lal who butchered many sikhs following riots after killing of Former Prime Minister Indira Gandhi

सुप्रीम कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़ा एक बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने तीन सदस्यों की एक विशेष जांच टीम बनाने का आदेश दिया है। यह टीम 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े 186 केसों की फिर से जांच करेगी। इन मामलों को सरकार द्वारा नियुक्त एक एसआईटी ने बंद करने का आदेश दिया था। 1984 के सिख विरोधी दंगों का जिक्र होते ही हिंसा और नफरत की तस्वीरें दिमाग आती है। तब दिल्ली में कत्ले-आम का दौर था। इस दंगे के कई गुनहगारों में किशोरी लाल का जिक्र आता है। किशोरी लाल, जिसकी हैवानियत इतनी खौफनाक थी कि उसे लोग ”त्रिलोकपुरी के कसाई” के नाम से जानने लगे थे। त्रिलोकपुरी पश्चिमी दिल्ली का एक इलाका है। 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद शुरू हुए हिंसा और लूटपाट के दौर में ये इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था।

किशोरी लाल का जिक्र सुनते ही तब त्रिलोकपुरी के ब्लॉक 32 के रहने वाले सिख मंशा सिंह कुछ असहज महसूस करने लगते हैं। वो 31 अक्टूबर 1984 का दिन था। त्रिलोकपुरी में मीट की दुकान चलाने वाला किशोरी लाल एक धारदार चाकू से भेड़ की खाल निकाल रहा था। तब उसे देखकर मंशा सिंह के दिमाग में कोई ख्याल नहीं आया। लेकिन मात्र एक दिन बाद मंशा सिंह ने इस कसाई को उसी चाकू से अपने बेटे दर्शन सिंह की बाहें काटते हुए देखा। इस खौफनाक वाकये के दौरान मंशा सिंह को मानो लकवा मार गया था। वो एक कपड़े के पीछे छिपे अपनी जान बचा रहे थे। 3 साल पहले इंडियन एक्सप्रेस को दिये एक इंटरव्यू में मंशा सिंह बताते हैं, ‘किशोरी लाल एक दंगाई भीड़ का अगुवा था, उसने मेरे बेटे को घर से निकाला और उस पर चाकू और रॉड से हमला किया।’ मंशा सिंह कहते हैं, ‘मैंने अपनी आंखों के सामने अपने 3 बेटों को मरते हुए देखा, उन्हें टुकड़ों-टुकड़ों में कर दिया गया, लोहे की छड़ से पीटा गया, मैं अपने बच्चे को बचा नहीं सका, मैं नहीं जानता कि वाहे गुरु ने मुझे क्यों जिंदा रखा है, मैं तो ऐसा अपने शत्रु के लिए भी ऐसा नहीं सोचता हूं।’ 2014 में 74 साल के हो चुके मंशा सिंह ने काफी पहले ही त्रिलोकपुरी छोड़ दिया था, वह तिलक विहार में 2 कमरों के फ्लैट में रहते थे।

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किशोरी लाल इस वक्त तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। निचली अदालत ने किशोरी लाल समेत तीन लोगों को मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इनकी सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए न्यायिक प्रक्रिया में देरी को जिम्मेदार ठहराया था। 2012 में दिल्ली की तत्कालीन शीला सरकार ने किशोरी लाल को रिहा करने की सिफारिश की थी। इसके लिए कांग्रेस सरकार ने जेल में उसके अच्छे चाल चलन का हवाला दिया था। पर सरकार के इस सिफारिश की जानकारी होते ही सिख संगठन उबल पड़े थे। दवाब में दिल्ली के तत्कालीन एलजी तेजेन्द्र खन्ना ने इस बात की इजाजत शीला सरकार को नहीं दी थी। बता दें कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की दो सिख सुरक्षा गार्डों द्वारा 31 अक्तूबर 1984 की सुबह हत्या करने के बाद राष्ट्रीय राजधानी में बड़े पैमाने पर दंगे हुए थे और इस हिंसा में अकेले दिल्ली में 2733 लोग मारे गये थे।

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