2017 will remember for big judgement from indian judiciary

साल 2017 निचली अदालत की कार्यवाही और कई फैसले नजीर बने। कुछ न्यायाधीशों ने तो लीक से हट कर ऐसे फैसले दिए जिससे यह साल अदालती चौखट पर जांच एजंसियों की पोल खोलने वाला साबित हुआ। देश की सबसे बड़ी जांच एजंसी सीबीआइ हो या प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अदालत में बगले झांकनी पड़ीं। सुनवाई के दौरान इनके वकीलों के गैरवाजिब रवैए का पर्दाफाश अदालत ने जिस तरह देश के सामने किया, वैसा पहले कभी नहीं हुआ था। इस बार कई मामलों में दिल्ली पुलिस की भी अदालत में छीछालेदर होती दिखी।  फैसले के हिसाब से यह साल इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि अदालत ने सालों से झूल रहे मामलों का ही नहीं दशकों से लटके मामलों का भी पटाक्षेप किया। 17 साल पहले सुहैब इलियासी को पत्नी अंजु की हत्या करने वाले का मामला हो या 21 साल से मुकदमे का सामना कर रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री पीके थुंगन का मामला हो या फिर 2 जी का मामला हो, यह साल उनके निपटान का रहा। इतना ही नहीं इस साल अदालत ने कई मामलों के उदाहरण भी पेश किए। मसलन 30 साल के एक युवक ने एक आदमी को पीट-पीटकर मार डालने के जुर्म में उम्र कैद की जगह दस साल की कैद की सजा दी। अदालत ने ऐसा कर दोषी को पुनर्वास और सुधरने का मौका दिया। सत्र न्यायाधीश सतिंदर कुमार गौतम ने मुजरिम पवन कुमार के जुर्म को गैर इरादतन हत्या में और न्यूनतम सजा दी।

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कई मामलों में जजों ने संदेश दिया कि मामला बेवजह लंबा नहीं चलने दिया जाएगा। मामला चाहे कितना भी हाई प्रोफाइल क्यों न हो, सबूत दीजिए या फिर आरोपियों को बाइज्जत जाने दीजिए! 2-जी में ए राजा और कनिमोड़ी व अन्य पर लगे आरोप हो या पूर्व केंद्रीय मंत्री पीके थुंगन पर लगा भ्रष्टाचार का मामला हो, जजों ने आरोपियों को बरी कर दिया और जांच एजंसियों को डांट पिलाई। दूसरी ओर, अदालत ने इस साल यह भी संदेश दिया कि दोषी चाहे कितना रसूक वाला क्यों न हो कानून के हाथ से नहीं बच सकता।
कोयला खान आबंटन घोटाला मामले में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को जेल भेजने, हाई कोर्ट के पूर्व जज आइएम कुद्दीसी (मेडिकल कॉलज में कथित भ्रष्टाचार घोटाला) को जेल भेजने जैसे मामले को इस कड़ी में रखा जा सकता है। इसके अलावा आतंकवाद से जुड़े मामलों में कश्मीरी अलगाववादी शबीर शाह, हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाद अलताफ अहमद शाह और दुनिया भर में वांछित आतंकी सैयद सलाहुद्दीन के बेटे सैयद शाहिद युसूफ को जेल भेजा जाना भी अदालती फैसलों के रूप में सुर्खियों में रहा।

 

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