Amit Shah and PM Narendra Modi both asked MPs to be Present, Not enough Members in Lok Sabha, OBC Bill still pending – अमित शाह और पीएम मोदी की धमकी का भी नहीं हुआ असर, संसद में पिटी बीजेपी की भद

संसद के शीतकालीन सत्र में तीन तलाक बिल के साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) संशोधन विधेयक पास होना था, लेकिन कहा जा रहा है कि सरकार के सांसदों के गैर-जिम्मेदाराना रवैये की वजह से ऐसा हो नहीं सका। शुक्रवार (5 जनवरी) को शत्र का आखिरी दिन था। सरकार ने अपने सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया था। लेकिन बिल पास कराने के लिए जरूरी सांसदों की संख्या नहीं होने के कारण बिल लटक गया। इस पर विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसके सांसदों की संख्या पूरी न होने के कारण सरकार ने जानबूझकर सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करवा दिया। संविधान (123वां संशोधन) विधेयक 2017, जो कि पिछड़े वर्ग के लिए राष्ट्रीय आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाता, उसे बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को लोकसभा में पास होने के लिए रखा जाना था। सूत्रों के मुताबिक बड़ी संख्या में सांसदों की गैर हाजिरी के चलते सरकार को इससे हाथ खींचना पड़ा।

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बीजेपी के सूत्रों के मुताबिक बुधवार को 207 सांसद उपस्थित थे। गुरुवार को जब बिल पेश किया जाना था तब 183 सांसद ही अपनी कुर्सियों पर थे। इतनी संख्या बिल पास कराने के लिए नाकाफी थी। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह बुधवार की शाम को सांसदों को बिल प्रति समझा चुके थे। अगस्त में अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों ने बीजेपी के राज्यसभा सांसदों को बिल पेश करने के दौरान गैरहाजिर रहने की स्थिति के बारे में समझा दिया था, लेकिन इस शीतकालीन सत्र में सरकार को असफलता का सामना करना पड़ा।

सूत्रों के मुताबिक अमित शाह ने बुधवार को संसदीय मामलों के मंत्री अनंत कुमार से कहा था कि वह सांसदों को बताएं कि संसद में उनकी गैरहाजिरी को लेकर सरकार नाखुश है। अगर सांसद बार-बार समझाए जाने के बाद भी अपना यह रवैया बरकरार रखते हैं तो उन्हें हमेशा के लिए संसद से छुट्टी दे दी जाएगी। इस बाबत कुमार ने कुछ सांसदों को फोन भी किया था। उन्होंने उन्हें गुरुवार को सदन में हाजिर रहने के लिए कहा था।

इंडियन एक्सप्रेस ने गैरहाजिर रहने वाले पांच सांसदों से बात की। उनमें से तीन सांसदों ने कहा कि वे संसद के कॉम्लेक्स में मौजूद थे और वोटिंग के वक्त सदन में हाजिर होने वाले थे। ‘हम उम्मीद कर रहे थे कि हमें वोटिंग से पहले टेक्स मैसेज या कॉल आएगी।’ एक सांसद ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि संसद में उपस्थित रहने का व्हिप जारी हुआ था। एक सांसद ने कहा- हम वोट करने के लिए ऊपर मंजिल पर चले गए थे। हमें लौटने के लिए कोई अलार्म नहीं मिला। कर्नाटक के एक सांसद जीएम सिद्धेश्वरा ने कहा कि उन्हें गुरुवार को उपस्थित रहने के लिए कॉल आई थी, लेकिन उनके संसदीय क्षेत्र में बीएस येदियुरप्पा की परिवर्तन यात्रा होने के कारण वह व्यस्त हो गए थे।

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