Ayodhya Final Verdict, Babri Masjid, Ram Mandir Temple Dispute Live News Updates in Hindi: hearing begins in Supreme court, kapil sibbal gives its views -राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामला LIVE: सुप्रीम कोर्ट में बोले कपिल सिब्बल- जुलाई 2019 से शुरू हो सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या में राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवादित ढांचा गिराए जाने की 25वीं वर्षगांठ से एक दिन पहले यानी आज राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्वामित्व विवाद पर अंतिम सुनवाई शुरू हो चुकी है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की तीन सदस्यीय विशेष पीठ चार दीवानी मुकदमों में इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 13 अपीलों पर सुनवाई कर रही है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड़ के इस विवादित स्थल को इस विवाद के तीनों पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और भगवान राम लला के बीच बांटने का आदेश दिया था।

इस बीच, उत्तर प्रदेश के सेन्ट्रल शिया वक्फ बोर्ड ने इस विवाद के समाधान की पेशकश करते हुए न्यायालय से कहा था कि अयोध्या में विवादित स्थल से उचित दूरी पर मुस्लिम बहुल्य इलाके में मस्जिद का निर्माण किया जा सकता है। अखिल भारतीय सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अनूप जार्ज चौधरी, राजीव धवन और सुशील जैन कर रहे हैं। वहीं भगवान राम लला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के परासरण और सी एस वैद्यनाथन और अधिवक्ता सौरभ शमशेरी पेश हुए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट में दलीलें दे रहे हैं।

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यहां पढ़ें Ayodhya Dispute Hearing Live Updates: 

-राम मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या में हवन किया जा रहा है।

-कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि जब भी इस मामले की सुनवाई होती है तो कोर्ट के बाहर गंभीर प्रतिक्रियाएं आती हैं। इसलिए कानून एवं व्यवस्था को बनाए रखने के लिए वह खुद कोर्ट से गुजारिश करते हैं कि सभी याचिकाएं पूरी होने के बाद 15 जुलाई 2019 से इस मामले की सुनवाई शुरू करें।

-उत्तर प्रदेश के वकील तुषार मेहता ने कपिल सिब्बल के सभी कथनों को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सभी संबंधित दस्तावेज और अपेक्षित अनुवाद प्रतियां रिकॉर्ड में हैं।

-सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने अडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अभियुक्तों पर संदेह जताया। उन्होंने कहा कि 19000 पेजों के दस्तावेज इतने कम समय में फाइल कैसे हो गए। सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उन्हें और अन्य याचिकाकर्ताओं को याचिका के प्रासंगिक दस्तावेज नहीं दिए गए हैं।

 

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