Sunni Litigant Haji Mehmood opposed counsel Kapil Sibal remarks on Ayodhya Ram Mandir dispute and call PM Modi Jahbaaz Sipahi – बाबरी विध्वंस: सुन्नी याचिकाकर्ता ने मोदी को बताया ‘जांबाज सिपाही’, कपिल सिब्बल पर जमकर बरसे

बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि मामले पर सुनवाई को जुलाई 2019 तक टालने की वकील कपिल सिब्बल की मांग का अब खुद सुन्नी याचिकाकर्ता ने विरोध किया है। रिपब्लिक टीवी के एक इंटरव्यू में सुन्नी याचिकाकर्ता हाजी महमूद ने सिब्बल की मांग से असहमत होते हुए उनका विरोध किया तो वहीं उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें जांबाज सिपाही भी कहा। हाजी महमूद ने कहा, ‘मैं कपिल सिब्बल की मांग से सहमत नहीं हूं। मैं चाहता हूं कि प्रतिदिन इस मामले पर सुनवाई हो। भले ही कुछ पेपर्स अभी भी कोर्ट को दोनों पक्षों की ओर से नहीं दिए गए हैं, लेकिन अगर अदालत जल्द से जल्द इसका फैसला करेगी तो अच्छा होगा। मैं चाहता हूं कि सभी एकजुट होकर रहें, मुल्क में किसी के साथ अन्याय ना हो और मेरा मुल्क बचा रहे, 1992 को दोहराया ना जाए।’

इसके साथ ही हाजी महमूद ने यह भी बताया कि सुनवाई को 2019 तक टालने की बात को लेकर कपिल सिब्बल ने उनसे बात नहीं की थी। उन्होंने कहा, ‘हम लोगों में से किसी से भी सिब्बल ने बात नहीं की इस मामले में। वह एक अच्छे नेता भी हैं एक वकील भी हैं, लेकिन हर मुस्लिम यही चाहता है कि इस मामले में फैसला जल्द से जल्द हो। जो भी फैसला होगा हमें मंजूर होगा। मैं चाहता हूं कि 2019 से पहले यह मसला हल हो जाए अच्छा होगा। पहले भी हाई कोर्ट में मामले को लेकर प्रतिदिन सुनवाई हुई थी, सुप्रीम कोर्ट में भी ऐसा हो तो अच्छा होगा।’

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पीएम मोदी हैं ‘जांबाज सिपाही’
दंगे होने की आशंका पर बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘अदालत अगर सही फैसला सुनाएगी इस मामले पर तो दंगे नहीं होंगे। सब कुछ कंट्रोलिंग पावर के हाथ में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘जाबांज सिपाही’ की तरह लड़ रहे हैं, तो अगर वह चाहें तो दंगा नहीं होगा। पीएम मोदी अब वह मोदी नहीं रह गए जो वे पहले हुआ करते थे, उनमें काफी अंतर आ गया है। आज मोदी जी में फर्क बहुत आया है। इसलिए मैंने उन्हें जाबांज कहा है। वह इंसाफ के तराजू की तरह झुक चुके हैं। वह भी चाहते हैं कि देश में शांति रहे और देश बर्बाद ना हो।’

बता दें कि राम जन्‍मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सुन्‍नी सेंट्रल वक्‍फ की ओर से पेश वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता कपिल सिब्‍बल ने मामले की सुनवाई जुलाई, 2019 तक टालने की मांग की थी। हालांकि, सिब्बल ने कोर्ट में आम चुनावों का स्‍पष्‍ट तौर पर उल्‍लेख नहीं किया, लेकिन माना जा रहा है कि उन्होंने लोकसभा चुनाव की ओर ही संकेत किया था।

क्या कहा था सिब्बल ने ?
इस मामले पर पहले सुनवाई क्‍यों नहीं की गई? अचानक से अब क्‍यों? शायद यह भारत के इतिहास का सबसे महत्‍वपूर्ण मामला है, क्‍योंकि इससे देश का भविष्‍य तय होगा। इसके गंभीर परिणाम होंगे। लिहाजा इसे पांच या सात जजों की पीठ के पास भेजा जाना चाहिए। कृपया इस मामले की सुनवाई जुलाई 2019 तक के लिए टाल दें (मई 2019 में लोकसभा चुनाव होना है), क्‍योंकि इसका भारतीय राजनीति पर असर पड़ेगा।

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