Triple Talaq Bill Passed by Lok Sabha, AIMIM Chief Asaddudin Ovaisi got only Two Votes in Voting – लोकसभा में पास हुआ तीन तलाक बिल, ओवैसी के सुझाए संशोधन खारिज

तीन तलाक देने को अपराध के दायरे में लाने वाला कानून लोकसभा से पास हो गया है। इससे पहले गुरुवार को संसद में इस बिल पर वोटिंग हुई। बिल में कुछ संशोधनों को लेकर यह वोटिंग हुई थी। एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भी वोटिंग की मांग की थी। सदस्यों ने उनके संशोधनों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। एक संशोधन पर हुई वोटिंग में तो ओवैसी के पक्ष में सिर्फ 2 वोट पड़े। जबकि, इसके खिलाफ 241 वोट पड़े। दूसरे प्रस्ताव में भी उनके पक्ष में सिर्फ 2 वोट पड़े। वहीं, 242 लोगों ने उनके प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। हालांकि, इससे पहले उनके संशोधन के प्रस्ताव को लोकसभा के सदस्यों ने ध्वनि मत से खारिज कर दिया था। सदन में इससे पहले इस बिल पर विस्तृत चर्चा हुई। आपको बता दें कि यह बिल बगैर किसी संशोधन के पास हुआ है। सभी संशोधन खारिज कर दिए गए। बिल को लेकर कुछ संशोधन रखे गए थे, जिनमें दो संशोधन ओवैसी ने आगे बढ़ाए थे। जबकि, एक संशोधन बीजू जनता दल के भर्तृहरि महताब ने बढ़ाया था। वहीं, कांग्रेस की ओर से सुष्मिता देव और सीपीआईएम के ए.संपत ने संशोधन आगे बढ़ाए थे, जिन्हें संसद में नकार दिया गया। अब यह बिल राज्यसभा में जाएगा।

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इससे पहले तीन तलाक को प्रतिबंधित करने और विवाहित मुस्लिम महिलाओं के अधिकार सुरक्षित करने से संबंधित ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2017 गुरुवार को सरकार ने लोकसभा में पेश किया था। विधेयक पर सदन में चर्चा भी हुई। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस विधेयक को पेश किया था।  विधि एवं न्याय मंत्री प्रसाद ने कहा कि अगर मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में खड़ा होना अपराध है तो यह अपराध हम 10 बार करेंगे। हम इसे वोट के तराजू में नहीं तोल रहे। हम इसे सियासत के चश्मे से नहीं, बल्कि इंसानियत के चश्मे से देखते हैं। प्रसाद ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्षी दल का पूरा स्वर भ्रम पैदा करता है, जहां वे समर्थन भी करते हैं और किंतु-परंतु भी करते हैं। वे एक तरफ विधेयक को हड़बड़ी में लाने की बात करते हैं और दूसरी तरफ कहते हैं कि इसे पहले क्यों नहीं लाया गया। उन्होंने आगे कहा कि तीन तलाक का मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित था, इसलिए हम अपनी तरफ से कुछ नहीं कर सकते थे। जब उच्चतम न्यायालय ने इसे प्रथा को गैरकानूनी कह दिया तो हम विधेयक लेकर आए।

मंत्री के जवाब के बाद सदन ने असादुद्दीन ओवैसी, एन के प्रेमचंद्रन, जॉइस जॉर्ज, बी महताब, ए.संपत, अधीर रंजन चौधरी और सुष्मिता देव के संशोधनों को नकार दिया गया। सदन ने ध्वनिमत से मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2017 को मंजूरी दे दी। विधेयक को पारित कराने का विरोध करते हुए बीजद और एआईएमआईएम के ओवैसी ने सदन से वॉकआउट किया। विधेयक की धारा तीन और चार में प्रस्ताव किया गया है कि किसी व्यक्ति द्वारा उसकी पत्नी के लिए, शब्दों द्वारा, चाहे बोले गए हों या लिखित हों या इलेक्ट्रॉनिक रूप में हो या किसी अन्य रीति में हो। चाहे कोई भी हो, तलाक की उद्घोषणा अवैध एवं अमान्य होगी। जो कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को इस प्रकार से तलाक की उद्घोषणा करता है, उसे तीन वर्ष तक कारावास और जुर्माने से दंडित किया जाएगा।

प्रसाद ने मुसलमानों को डराने और जेल में डालने के लिए विधेयक लाने के ओवैसी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह आशंका बिल्कुल बेबुनियाद है। यह अपनी पत्नियों को भयभीत करने वाले पतियों के लिए है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को समान नागरिक संहिता से जोड़ा जा रहा है। जबकि, यह विषय विधि आयोग के सामने है और इस पर चर्चा चल रही है। इस पर आज बात करने की कोई वजह नहीं है। इससे पहले सदन में प्रेमचंद्रन ने कहा कि इस विधेयक के साथ यह देश समान नागरिक संहिता की ओर बढ़ रहा है। ओवैसी ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि सरकार इस विधेयक के साथ हमारे ‘पर्सनल लॉ’ पर अतिक्रमण की ओर कदम उठा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निहित स्वार्थों के लिए विधेयक लाई है और चाहती है कि अधिक से अधिक मुस्लिम जेल में जाएं।

इससे पहले विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह कानून ऐतिहासिक है और उच्चतम न्यायालय द्वारा ‘तलाक ए बिद्दत’ को गैरकानून घोषित किए जाने के बाद मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए इस सदन द्वारा इस संबंध में विधेयक पारित करना जरूरी हो गया है। उन्होंने इस संबंध में कुछ सदस्यों की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि यह कानून किसी मजहब से जुड़ा नहीं बल्कि नारी सम्मान से जुड़ा हुआ है।

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