Triple Talaq, M J Akbar, Rajeev Gandhi, Shahbano case, Supreme Court verdict, Narendra Modi Government – तीन तलाक: तब राजीव गांधी से पलटवाया था फैसला, अब खुद पलट गए मोदी सरकार के यह मंत्री

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एक झटके में तीन तलाक के खिलाफ प्रस्तावित मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण 2017) गुरुवार (28 दिसंबर) को लोकसभा में पास हो गया। इस बिल पर चर्चा के दौरान केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर ने बिल के पक्ष में लंबी दलील दी। उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है जब मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक पर डर, भय और आतंक के माहौल से बाहर निकलकर खुले में सांस लें। उन्होंने कहा कि इस बिल के पास होने से देश की 9 करोड़ मुस्लिम महिलाओं को न केवल सशक्त किया जा सकेगा बल्कि उन्हें लैंगिक भेदभाव से भी मुक्ति मिलेगी। कुरान की आयतों को पढ़ते हुए एम जे अकबर ने कहा कि यह पवित्र धर्मग्रंथ भी कहता है कि मुस्लिम महिलाओं का जो हक है, उन्हें हर हाल में उससे ज्यादा मिलना चाहिए, उससे कम कतई नहीं।

अकबर ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने कहा था कि वह मुस्लिम पर्सनल लॉ में सुधार नहीं करा सके क्योंकि वह समय उपयुक्त नहीं था। फिर भी कांग्रेस सरकारों ने संसद में पूर्ण बहुमत के बावजूद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में कोई सुधार नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में सुधार का यही उपयुक्त समय है। संभव है कि कानून बहुत अच्छा न बना हो लेकिन आदर्श स्थिति के लिए हमें किसी अच्छी चीज को नहीं छोड़ना चाहिए।

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एम जे अकबर के तीन तलाक के पैरोकार होने के दावे को पूर्व सूचना आयुक्त और अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्लाह ने झुठलाया है। उन्होंने ‘द हिन्दू’ में लिखे एक आलेख में एम जे अकबर की तीन तलाक पर अलग तस्वीर पेश की है। बतौर हबीबुल्लाह एम जे अकबर तीन तलाक के कट्टर समर्थक रहे हैं। उन्होंने लिखा है कि तब अकबर कांग्रेसी हुआ करते थे। उन्होंने लिखा है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक के खिलाफ शाह बानो के पक्ष में फैसला दिया था, तब एम जे अकबर ने अपनी दलील और पैरवी से तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी से सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पलटवा दिया था।

18 अक्टूबर, 2016 को लिखे इस आलेख में हबीबुल्ला ने लिखा है, “एक दिन जब मैंने प्रधानमंत्री राजीव गांधी के चेंबर में प्रवेश किया तो वहां राजीव गांधी के सामने एमजे अकबर को बैठा पाया। मैंने देखा कि अकबर, राजीव गांधी को इस बात पर राजी करा चुके थे कि अगर केंद्र सरकार शाहबानो मामले में हस्तक्षेप नहीं करती है तो पूरे देश में ऐसा संदेश जाएगा कि प्रधानमंत्री मुस्लिम समुदाय को अपना नहीं मानते हैं।” बतौर हबीबुल्लाह इसके बाद राजीव गांधी सरकार ने शाहबानो केस में 1985 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मुस्लिम महिला (तलाक के अधिकार का संरक्षण) विधेयक-1986 लाकर पलट दिया था।

बता दें कि पत्रकारिता के रास्ते राजनीति में आए एम जे अकबर पहले कांग्रेस में थे। 1989 में उन्होंने बिहार के किशनगंज से लोकसभा का चुनाव लड़ा था और वहां से लोकसभा सांसद चुने गए थे। वह कांग्रेस के प्रवक्ता भी रह चुके हैं। अकबर नरेंद्र मोदी के कट्टर आलोचक भी रह चुके हैं। बाद में बीजेपी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए एम जे अकबर ने दल बदल कर 2014 में भाजपा का दामन थाम लिया। फिलहाल वो राज्यसभा सदस्य हैं और केंद्र सरकार में मंत्री हैं।

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