Victim Families of self-proclaimed godman Virender Dev Dixit tells what was running inside the Spiritual University – बाबा की ‘आध्यात्मिक यूनिवर्सिटी’ में ऐसे हो रहा था लड़कियों का यौन शोषण, परिजनों ने किए कई खुलासे

दिल्ली समेत कई जगहों पर ‘आध्यात्मिक यूनिवर्सिटी’ के नाम से आश्रम चलाने वाला बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित फरार है, लेकिन उसके आश्रमों में अध्यात्म के नाम पर क्या-क्या चल रहा था, यह कई पीड़ित परिजनों ने बताया। कुछ परिजन अब भी अपने बच्चियों की तलाश कर रहे हैं। आरोपी वीरेंद्र देव दीक्षित के काले कारनामों को लेकर जिस एनजीओ ने अदालत में जांच के लिए अर्जी लगाई थी, उसके वकील शलभ गुप्ता के पास ढेरों पत्र आ रहे हैं। एक पत्र में परिजन ने उनकी बेटी को वापस लाने की गुहार लगाते हुए लिखा- मुझे नहीं पता कि मेरी बेटी को कहां रखा गया है। मैं जब अपनी बेटी से मिलने गया तो मुझे उससे मिलने नहीं दिया गया। मुझे पता चला कि आश्रम के भीतर गंदा काम चल रहा है। जब बेटी से मिला तो उसने कहा कि वह खुश है और आश्रम में रुकना चाहती है। लेकिन वह कमजोर और डरी हुई लग रही थी। मुझे लगता है कि उसके ऊपर दबाव बनाया गया था। मैं आपसे उसे वापस लाने की भीख मांगता हूं।

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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक बाबा के कई पूर्व भक्तों और गुप्ता से बात करने कई हैरान करने वाली बातें सामने आई हैं। पुलिस में सब-इंस्पेक्टर बाबा के एक पूर्व भक्त ने कहा कि वह उसे भगवान समझते थे। बाबा के कहने पर अपनी 16 वर्षीय बेटी को भी उसके आश्रम में आध्यात्मिक शिक्षा लेने के लिए भेजा। बेटी को यूपी के कामपिल स्थित आश्रम में 2003 में ले जाया गया था। 2004-2005 के बाद से बेटी को नहीं देख पाए, जबकि हर हफ्ते आश्रम में मेडीटेशन के लिए जाते थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने केवल फोन पर दो बार बेटी से बात की। उन्होंने कहा कि पुलिस ट्रेनिंग के बावजूद उन्हें इसमें कुछ खराबी नहीं लगी। गर्ग पुलिस में एफआईआर लिखवाकर बेटी की तलाश कर रहे हैं।

बाबा के बारे में लोगों को बताया जाता था कि वह भगवान हैं और 2020 तक वह साक्षात दर्शन देंगे। अगर उन्हें जीवन बिताना है तो इसके लिए कुछ रूपों में चंदा देकर त्याग करना होगा। बांदा की एक महिला ने बताया कि उसने अपनी 10 बीघा जमीन बेचकर 10 लाख रुपये की रकम बाबा को दे दी। वह बाबा की सेवादार थी। उसने बाबा पर रेप करने का आरोप लगाया और बताया कि 2007 में उसने अपनी बेटी को भी बाबा के आश्रम में भेज दिया था। महिला बाबा के लिए और अनुयायियों का जुगांड़ करने के नाम पर आश्रम से अपने बेटी को लेकर निकल आई।

पीड़ित परिजनों के मुताबिक लड़कियों को रात के 2 से ढाई बजे तक जगा दिया जाता था और बाबा की तस्वीर देखकर ध्यान लगाने के लिए कहा जाता था। चार बजे तक वे नहाकर बाबा के प्रवचन सुनने के लिए तैयार हो जाती थीं। अगर बाबा आश्रम में आता था तो 8-10 लड़कियों रात में उसके पास गुप्त प्रसाद लेने के लिए भेजा जाता था। बाबा जिन लड़कियों के साथ गुप्त प्रसाद के नाम पर संबंध बनाता था उन्हें वह अपनी रानी और खुद को कृष्ण कहता था। बाबा कृष्ण भगवान की तरह 16108 रानियां बनाना चाहता था। बाबा के आदमी लड़कियों के पीरियड की जानकारी रखते थे। बाबा ने 14 साल की उम्र तक की नाबालिग लड़कियों को अपना शिकार बनाया।

बाबा ने आश्रमों में काम करने वाले लोगों की शिफ्ट ऐसी लगा रखी थी कि परिवार के लोग अपनी बेटियों से कम ही मिल पाते थे। आश्रम में पिंजड़ों के समान कमरे बने थे जिनमें लड़कियों को रखा जाता था। उनमें सीसीटीवी कैमरे लगे थे। तेलंगाना के एक परिवार को दो वर्षों बाद दिल्ली में उनकी बेटी से मिलने दिया गया। उसके बाद 2015 में उनकी बेटी गायब हो गई। बुजुर्ग लोगों को सेवादार रखा जाता था। उन्हें दरवाजों के भीतर बंद ‘बहनों’ और ‘माताओं’ से नहीं मिलने दिया जाता था।

बाबा की एक और पूर्व भक्त विनीता ने बताया कि आश्रम का हिस्सा बनने के लिए अनुयायियों को कुछ नियम मानने पड़ते थे। जैसे कि पति और पत्नी संबंध बनाने से बचेंगे, सादा खाना खाएंगे, सामाजिक आयोजनों से दूर रहेंगे आदि।

बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर विशेष जांच दल ने रोहिणी के एक आध्यात्मिक आश्रम पर 19 दिसंबर को छापेमारी कर बाबा के गोरखधंधे से पर्दा उठाया था। अदालत ने बाबा को 4 जनवरी को अदालत में पेश होने का आदेश दिया था लेकिन बाबा नहीं आया और अब तक फरार चल रहा है। रोहिणी समेत 8 आश्रमों से सैकड़ों लड़कियां छुड़ाई गई थीं।

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