पड़तालः क्रिकेट में पहचान के लिए लड़ रहा उत्तराखंड- Investigations: Uttarakhand fighting for identity in cricket

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) उत्तराखंड सरकार, उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (यूपीसीए) तथा कुकुरमुत्तों की तरह उत्तराखंड में उग आए विभिन्न क्रिकेट एसोसिएशनों के बीच मूछों की लड़ाई के कारण राज्य से क्रिकेट प्रतिभाएं पलायन कर रही हैं तथा दूसरे राज्यों से क्रिकेट खेल रहे उत्तराखंड के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्री स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उत्तराखंड सरकार की उदासीनता के कारण 17 साल से बीसीसीआइ से क्रिकेट संघ की मान्यता भी नहीं मिल पाई है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने कई नामों से सूबे में क्रिकेट एसोसिएशन बना लिया और क्रिकेट के नाम पर दुकानें चला रहे हैं। इससे सूबे में क्रिकेट का भला होने की बजाय नुकसान ज्यादा हो रहा है। सूबे में क्रिकेट के नाम पर चल रही गुटबाजी के कारण बीसीसीआइ और उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (यूपीसीए) इसका फायदा उठा रहे हैं और उत्तराखंड में क्रिकेट को मान्यता नहीं मिल पा रही है।
क्रिकेट के नाम पर सबसे बड़ा खेल उत्तराखंड में उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (यूपीसीए) खेल रहा है। उत्तराखंड को बीसीसीआइ से मान्यता यूपीसीए के कारण नहीं मिल रही है। बीसीसीआइ की सूची में यूपीसीए ने उत्तराखंड को 12वें जोन के रूप में शामिल कर रखा है और बीसीसीआइ को यूपीसीए भ्रमित कर रही है। उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन (यूसीए) के प्रयासों से ही न्यायाधीश लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के आधार पर बीसीसीआइ ने सर्वोच्च न्यायालय में जुलाई 201़6 में उत्तराखंड राज्य क्रिकेट को पूर्ण सदस्यता देने के लिए अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

बड़ी खबरें

इसके डेढ साल बाद भी बीसीसीआइ ने इस मामले में कोई ठोस पहल नहीं की है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भी उत्तराखंड क्रिकेट को बीसीसीआइ में मान्यता दिलाने के लिए पहल की थी। परंतु उत्तराखंड में सक्रिय विभिन्न क्रिकेट यूनियनों ने मुख्यमंत्री के प्रयासों को भी पंचर लगा दिया है। उत्तराखंड में क्रिकेट के नाम पर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आज तक कोई स्टेडियम भी नहीं बन पाया है। पिछले साल बनकर तैयार हुआ राजीव गांधी स्पोर्ट्स स्टेडियम भी क्रिकेट के मानकों को पूरा नहीं करता। क्रिकेट के खिलाड़ी देहरादून के रेंजर्स मैदान, परेड ग्राउंड, हरिद्वार में भल्ला इंटर कॉलेज खेलते हैं, ये सभी मैदान कामचलाऊ है। हल्द्वानी में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बन तो गया है पर वह उद्घाटन की बाट जोह रहा है।

उत्तराखंड के मूल निवासी महेन्द्र सिंह धोनी, ऋषभ पंत, मनीष पांडे, आर्यन जुयाल, आर्यन शर्मा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट जगत में छाए हुए हैं। वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड के ही अभिमन्यु, उन्मुक्त चंद, पवन नेगी, पवन सुहाल, अभिषेक रावत, प्रियांशु खण्डूडी समेत कई खिलाड़ी अन्य राज्यों से खेलकर अपनी प्रतिभा का पूरे देश में लोहा मनवा रहे हैं। उत्तराखंड में क्रिकेट संघ को मान्यता न मिल पाने के कारण क्रिकेट की प्रतिभाएं अन्य राज्यों से खेलने को मजबूर हैं। प्रकाश जोशी, आदित्य पंत, ललित पंत, इंद्रमोहन बड़थवाल, त्रिभुवन नारायण बाबा, पटेल भाई, कमन नयन पांडे, अभिजित चटर्जी जैसी क्रिकेट की कई प्रतिभाएं सुविधा न मिलने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर अपना हुनर नहीं दिखा पाई।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *