Ministry of Finance says Not withdrawing bank cheque book facility, reaffirmed that there’s no such proposal – सरकार ने क‍िया साफ- चेकबुक बैन करने का नहीं है कोई व‍िचार

फाइनैंश मिनिस्ट्री ने साफ किया है कि डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए चेक बुक बैन करने की सरकार की कोई प्लानिंग नहीं है। फाइनैंश मिनिस्ट्री ने ट्वीट करके कहा है कि मीडिया में ऐसी खबरें आ रही हैं कि सरकार डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए आने वाले समय में चेक बुक बैन कर सकती है। सरकार चेक बुक बैन करने पर कोई विचार नहीं कर रही है और न ही सरकार के पास चेक बुक बैन करने का कोई प्रपोजल है। आपको बता दें कि इसी सप्ताह फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा था कि सरकार नोटबंदी के बाद अब डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए चेकबंदी लागू कर सकती है। फिलहाल देश में 95 फीसदी लेनदेन नकदी या चेक के जरिये होते हैं। नोटबंदी के बाद नकदी के लेनदेन में कमी आई, लेकिन इसके साथ ही चेकों का इस्तेमाल निश्चित रूप से बढ़ा है।

आरबीआई के डेटा के मुताबिक नोटबंदी के बाद 16.3 लाख करोड़ रुपए का कैश मार्केट में है। यह नोटबंदी के पहले के मुकाबले 91 फीसदी है। नोटबंदी से पहले 17.9 लाख करोड़ रुपए का कैश मार्केट में था। सितंबर में डिजिटल ट्रांजैक्शन 877 मिलियन तक पहुंच गई थीं। हालांकि पिछले साल दिसंबर में यह आंकड़ा 1 बिलियन था। अगर नोटबंदी से पहले 100 डिजिटल ट्रांजैक्शन होते थे तो नोटबंदी के बाद यह आंकड़ा 300 पहुंच गया था। हालांकि यह अब 180-190 पर आकर ठहर गया है।

मास्टरकार्ड और सीएआईटी के एक जॉइंट प्रोग्राम डिजिटल रथ में खंडेलवाल ने कहा था कि नोटबंदी से पहले तक केंद्र सरकार नए करेंसी नोटों की छपाई पर लगभग 25,000 करोड़ रुपए खर्च किया करती थी, और उनकी सुरक्षा पर 6,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त रकम खर्च करनी पड़ती थी। साथ ही खंडेलावल ने यह भी कहा था कि बैंक डेबिट कार्ड से पेमेंट करने पर 1 फीसदी और क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर 2 फीसदी का चार्ज लगाता है। सरकार को कुछ ऐसा कदम उठाना चाहिए कि बैंकों को सीधे इस पर सब्सिडी मिले ताकि लोग ज्यादा से ज्यादा डेबिट और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करें।

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