Mutual Fund: Invest In These Mutual Funds and double your money in just 4 years – 4 साल में दोगुना तक हो जाता है पैसा, जानिए कहां करें इनवेस्ट

आदिल शेट्टी,

नोटबंदी के बाद सेविंग अकाउंट और फिक्स्ड डिपोजिट (एफडी) की दरों में गिरावट आने से म्यूचुअल फंड्स में लोगों की दिलचस्पी काफी बढ़ गई है। नोटबंदी के बाद ज्यादातर लोगों ने अपने सेविंग और करंट बैंक अकाउंट में इतना पैसा जमा कर दिया है कि बैंकों के पास नकदी का ज्यादा हो गई है। इसलिए बैंकों ने सेविंग बैंक (एसबी) और एफडी दरों में कटौती कर दी है। यहां तक कि छोटी-मोटी बचत योजनाओं में भी कम ब्याज मिल रहा है, जिससे लोग ज्यादा रिटर्न पाने की चाह में म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने लगे हैं। सरकार समर्थित अभियान ‘म्यूच्यूअल फंड्स सही है’ के कारण भी म्यूचुअल फंड्स में निवेश बढ़ा है।

रिस्क न लेने वाले निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड्स

लिक्विड फंड: आप लिक्विड फंड में निवेश कर सकते हैं, जो एक तरह का डेब्ट फंड ही है। इसके तहत आपके पैसे को अल्पकालिक मनी मार्केट साधनों जैसे ट्रेजरी बिल, गवर्नमेंट सिक्योरिटी, सीडी और कमर्शियल पेपर में निवेश होता है, जिसकी मैच्योरिटी का समय 91 दिन होता है। लिक्विड फंड, एसबी अकाउंट की तुलना में अधिक रिटर्न देता है, लगभग 6%, और इमरजेंसी में इसे आसानी से निकाला भी जा सकता है।
मंथली इनकम प्लान: मंथली इनकम प्लान या मासिक आय योजना (एमआईपी) में निवेश करने पर विचार करें। यह भी एक तरह का डेब्ट फंड है। इस फंड में, 80-90% पैसा बिलकुल सुरक्षित डेब्ट (बोंड) में और बाकी पैसा इक्विटी में निवेश होता है। डेब्ट भाग में कम जोखिम होता है और इक्विटी भाग में उचित रिटर्न मिलता है। पिछले 10 साल में एमआईपी ने लगभग 8-10% फीसदी का रिटर्न दिया है।

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यदि आप 5 साल से कम समय के लिए निवेश करना चाहते हैं तो डेब्ट फंड में 1 लाख रुपये निवेश करने पर विचार करें। डेब्ट फंड, बैंक एफडी की तुलना में अधिक टैक्स कुशल है और यह ज्यादा रिटर्न भी देते हैं। यदि आप 3 साल या उससे ज्यादा समय तक डेब्ट फंड में पैसे निवेश करके रखते हैं तो आपके दीर्घकालिक पूंजी लाभ पर इंडेक्सेशन का फायदा मिलता है। इससे होने वाले फायदे पर 20% टैक्स लगता है लेकिन टैक्स बचाने के लिए लागत मुद्रास्फीति इंडेक्स का इस्तेमाल करने पर, आपको डेब्ट फंड के मुद्रास्फीति क्रय मूल्य का फायदा मिलता है। डेब्ट फंड में अतीत में 8-9% प्रति वर्ष की दर से रिटर्न मिला है लेकिन भविष्य में भी इसी तरह का रिटर्न मिलेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

रिस्क लेने वाले निवेशकों के लिए म्यूच्यूअल फंड्स
इक्विटी हाइब्रिड फंड: इक्विटी हाइब्रिड फंड में निवेश करने पर विचार करें जिसमें आपके पैसे का कम से कम 65% हिस्सा, इक्विटी (स्टॉक) में और बचा हुआ हिस्सा, डेब्ट (बोंड) में निवेश होता है। इक्विटी में आपको ज्यादातर वित्तीय साधनों से ज्यादा रिटर्न मिलता है। डेब्ट, शेयर बाजार गिरने पर आपके निवेश को संभलने में मदद करता है। इक्विटी हाइब्रिड फंड के बारे में एक अच्छी बात यह है कि यदि आप एक साल या उससे ज्यादा समय तक इसमें पैसे निवेश करके रखते हैं तो दीर्घकालिक पूंजी लाभ, पूरी तरह टैक्स फ्री होता है। जोखिम उठाने वाले निवेशकों को एसआईपी के माध्यम से इक्विटी हाइब्रिड फंड में निवेश करना चाहिए और उसमें कम से कम 3-5 साल तक निवेश करके रखना चाहिए। अतीत में 3 साल में कुछ इक्विटी हाइब्रिड फंड में 14-16% सालाना रिटर्न मिला है।

डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स:
डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स में निवेश करने का मतलब है अपने पैसे को अलग-अलग क्षेत्रों जैसे फाइनेंसियल सर्विस, फार्मा, ऑटोमोबाइल, इत्यादि में निवेश करना। आपके 1 लाख रुपये के निवेश को अलग-अलग क्षेत्रों में डाल (फैला) दिया जाता है। यदि आप एक साल से ज्यादा समय तक निवेश करके रखते हैं तो आपका फायदा यानी दीर्घकालिक पूंजी लाभ, टैक्स फ्री होता है। कम से कम 3-5 साल या उससे ज्यादा समय तक डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स में पैसे निवेश करके रखें। अच्छे डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स में पैसे निवेश करने पर लगभग 15-20% वार्षिक रिटर्न मिल सकता है। शेयर बाजार में गिरावट आने पर डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स निगेटिव रिटर्न दे सकते हैं लेकिन लंबे समय तक पैसे निवेश करके रखने पर आम तौर पर अच्छा रिटर्न मिलता है।

सेक्टर फंड्स: जो म्यूचुअल फंड्स किसी विशेष क्षेत्र या उद्योग जैसे बैंकिंग, फार्मा, एफएमसीजी या टेक्नोलॉजी में पैसे निवेश करते हैं उन्हें सेक्टर फंड्स कहा जाता है। ये फंड्स किसी एक सेक्टर में एक्सपोजर लेते हैं और ये बहुत जोखिम भरे होते हैं। एक जोखिम उठाने वाले निवेशक को सेक्टर फंड्स में अपने एक्सपोजर को अपने 1 लाख रुपये के लगभग 15% तक सीमित रखने की कोशिश करनी चाहिए। 3 से 5 साल तक निवेश करने की सलाह दी जाती है। यदि सेक्टर अच्छा प्रदर्शन करता है तो 3 से 5 साल में 20-25% वार्षिक रिटर्न मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
लेखक बैंक बाजार डॉट कॉम के सीईओ हैं। 

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