पाकिस्‍तानी वायु सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ का निधन, कश्‍मीर में हुआ था जन्‍म, आईएसआई के खिलाफ लिया था मोर्चा – first commander in chief pakistan air force passed away age of 96

पाकिस्तान एयर फोर्स (पीएएफ) के पहले कमांडर-इन-चीफ (स्थानीय) असगर खान का शुक्रवार (5 जनवरी, 2017) सुबह लंबी बीमारी के बाद इस्लामाबाद में निधन हो गया है। द डॉन न्यूज ने पीएएफ के एक प्रवक्ता के हवाले से यह जानकारी दी है। वह 96 साल के थे। रिपोर्ट के अनुसार रिटायर्ड एयर मार्शल खान पाकिस्तान एयर फोर्स के सबसे युवा कमांडर (35) थे। पीएएफ की एक प्रेस रिलीज में एयर फोर्स के वर्तमान कमांडर-इन-चीफ सोहेल खान के हवाले से बताया गया, ‘एयर मार्शल खान ने पाकिस्तानी वायु सेना को मॉडर्न बनाने में बहुत अहम भूमिका निभाई थी। उनकी लीडरशिप में वायु सेना ने नए आयाम छुए।’

वहीं पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और राजनीति में प्रमुख चेहरा बन चुके इमरान खान ने भी उनके निधन पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है, ‘असगर की मृत्यु की खबर सुनकर दुखी हूं। उन्होंने पीएएफ को पारदर्शी बनाया था। मेरी उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं हैं।’

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बता दें कि पाकिस्तान एयर फोर्स के पहले चीफ रहे असगर खान का भारत से भी गहरा रिश्ता रहा है। उन्होंने भारत की तरफ से दूसरे विश्व युद्ध में भाग लिया था। वह साल 1921 में जम्मू-कश्मीर में पैदा हुए थे। खान ब्रिटिश इंडियन आर्मी में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके सम्मान में पिछले साल मार्च में रिसालपुर की पीएएफ अकेडमी का नाम ‘खान अकेडमी’ रखा गया। उन्होंने फील्ड मार्शल जनरल अयुब खान के शासन के दौरान जुल्फिकार अली भुट्टों को रिहा कराने के लिए सरकार पर दवाब डालने और उन्हें रिहा कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

खास बात यह है कि असगर खान राजनीति में सक्रिय रह चुके हैं। पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के अध्यक्ष रह चुके खान ने साल 1970 में धर्मनिरपेक्ष तहरीक-ए-इस्तकलाल पार्टी की नींव रखी थी। हालांकि साल 2012 में इस पार्टी का इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ में विलय हो गया।

साल 1996 में एयर मार्शल खान ने पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट में मानव अधिकार याचिका दाखिल की थी। उनका आरोप था कि इंटर सर्विस इंटेलीजेंस (आईएसआई) ने साल 1990 में राजनेताओं का पैसा बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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