पैगंबर पर विवाद: तीखे प्रदर्शन के बाद पाकिस्तान के कानून मंत्री को देना पड़ा इस्तीफा – Pakistan Law Minister Zahid Hamid Resigns from his Post

देश भर में कट्टरपंथी धार्मिक संगठनों से ताल्लुक रखने वाले प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद पाकिस्तान के कानून मंत्री जाहिद हामिद ने इस्तीफा दे दिया है। सरकारी प्रसारक ने यह जानकारी दी। राजधानी में पिछले तीन सप्ताह से धरने पर बैठे प्रदर्शनकारी निर्वाचन कानून 2017 से जुड़े हलफनामे में ‘खत्म-ए-नबुव्वत’ संबंधी एक कानून में हुए बदलावों के लिए कानून मंत्री को जिम्मेदार बताते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

चुनाव सुधार के संबंध में संसद में लाए गए संशोधन विधेयक के तहत नामांकन के दौरान दिए जाने वाले हलफनामे में किए गए बदलाव को प्रदर्शनकारी मानने को राजी नहीं थे और इस संबंध में हामिद के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। इन बदलावों से पहले मुसलमान उम्मीदवारों को अपने हलफनामे में यह लिखित देना होता था कि पैगम्बर मोहम्मद मुसलमानों के अंतिम पैगम्बर थे और उनके बाद और कोई नहीं होगा। संशोधन के दौरान इसी प्रावधान में तब्दीलियां की गई थीं।

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रेडियो पाकिस्तान की खबर के अनुसार, कानून और संसदीय कार्य मंत्री हामिद ने देश को ‘संकट की स्थिति’ से बाहर निकालने के लिए अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी को सौंप दिया। रात को प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच हुए समझौते के बाद हामिद ने इस्तीफा दिया है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने बिगड़ती कानून व्यवस्था के मद्देनजर रविवार को दो दिन के लिए सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का फैसला लिया। वहां कट्टरपंथी धार्मिक समूह बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

‘तहरीक ए खत्म ए नबूवत’, ‘तहरीक ए लब्बैक या रसूल अल्लाह’ और ‘सुन्नी तहरीक पाकिस्तान’ के कार्यकर्ता पाकिस्तान के कई शहरों में बीते तीन हफ्तों से राजमार्गों और रेलवे लाइनों पर प्रदर्शन कर रहे हैं और धरने दे रहे हैं। इससे रेल और सड़क यातायात प्रभावित हो रहा है।
एक आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया, ‘‘देश में हाल में बने कानून-व्यवस्था संबंधी हालात के मद्देनजर सरकार ने सभी शैक्षणिक संस्थानों- निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को सोमवार और मंगलवार को बंद रखने का फैसला लिया है।’’ उच्च शिक्षा मंत्री सैयद रजा अली गिलानी ने कहा कि यह फैसला बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया।

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