North Korean tyrant Kim Jong-un ‘executes’ another official over delay in missile launch – नॉर्थ कोरिया के सनकी तानाशाह ने एक और अधिकारी को मरवाया, 5 साल में ले चुका है 340 लोगों की जान

उत्‍तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन ने एक अन्‍य अधिकारी को मिसाइल परीक्षण में देरी पर मरवा दिया है। इस अधिकारी ने न्‍यूक्लियर बेस पर हुई हादसे की जिम्‍मेदारी ली थी जिससे परीक्षण कुछ दिन के लिए टल गया था। 5 दिन पहले ही, ‘उत्‍तर कोरिया का दूसरा सबसे शक्तिशाली शख्‍स’ कहा जाने वाला अधिकारी लापता हो गया था। माना जा रहा है कि हालिया शिकार ब्‍यूरो-131 का डायरेक्‍टर था, जो न्‍यूक्लियर बेस को चलाने और इमारत का प्रभारी था। जापानी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक वह तब से न्‍यूक्लियर बेस का संचालन देख रहा था, जब से इसकी स्थापना हुई थी। इस बात की आशंका जताई जा रही है कि प्योंगयंग के छठे मिसाइल परीक्षण में देरी और सुरंग के ध्वस्त होने के कारण किम जोंग ने दोनों अधिकारियों को मौत की सजा दी है। सुरंग के ध्वस्त होने से वहां काम कर रहे तकरीबन 200 लोगों की जान चली गई थी। सूत्रों के मुताबिक अधिकारी ने लंबे समय तक चले खनन कार्य के कराण परीक्षण की तारीख में देरी होने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। ज्ञात हो कि लॉन्चिंग की तारीख सितंबर तक चली गई, जो पहले फरवरी महीने में तय थी।

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नवंबर में दक्षिण कोरिया ने चेतावनी दी थी कि नार्थ कोरिया का एक और परमाणु परीक्षण उसके लॉन्चिंग साइट को बर्बाद कर सकता है और साथ ही इससे रेडिएशन का भी खतरा है। साथ ही दक्षिण कोरिया ने यह भी कहा कि किम जोंग अगर आगे कोई भी परमाणु परीक्षण करते हैं तो मिसाइल परीक्षण तक की इजाजत नहीं दी जाएगी। परमाणु परीक्षण के कारण दक्षिण कोरिया का राजधानी सिओल को बीते दिनों कई बार भूकंप के झटके झेलने पड़े हैं।

जानकारों की मानें तो लगातार हो रहे भूकंप के कारण अब वह इलाका और परीक्षण के लिए अनुकूल नहीं है। संयुक्त राष्ट्र ने भी नार्थ कोरिया को वार्निंग देते हुए कहा कि उत्तर पश्चिम इलाके में हुए दूसरे परमाणु परीक्षण के बाद कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक प्योंगयांग का हालिया परीक्षण पुंग्ये-री के मिलिट्री कैंप स्थित माउंट मंटप में किया गया, जो कि उत्तर कोरिया के उत्तर-पश्चिम छोर पर स्थित है। यह इलाका तीन भूंकप के झटके झेलने के बाद ‘टायर्ड माउंटेन सिंड्रोम’ से जूझ रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक इस बात की भी आशंका है कि पिछले सप्ताह सेना के एक सीनियर अधिकारी जनरल ह्वांग प्योंग-सो को भी मौत की सजा दे दी गई। यह घटना तब हुई, जब किम जोंग-उन मेट पैक्टू (पहाड़ी इलाका) के दौरे पर गए थे। दौरे के समय ही इस बात का आभास हो गया था कि वह किसी सीनियर अधिकारी को मौत की सजा देने वाले हैं। क्योंकि नार्थ कोरिया के किसी नेता को अगर कोई बड़ा निर्णय लेना होता है तो वह इस पहाड़ की यात्रा पर आता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्योंग-सो को घूसखोरी के आरोप में अक्टूबर में पार्टी से निकालने के बाद गोपनीय ढंग से ठिकाने लगा दिया गया। उसके सहयोगी किम वोंग-हॉंग को भी जेल में डाल दिया गया।

दक्षिण कोरिया के जूंगअंग-लबो के मुताबिक व्हांग को जब पार्टी से निकाल दिया गया था, तभी यह समझा जाने लगा था कि उसके राजनीतिक भविष्य का अंत हो गया है। साथ ही यह भी कयास लगाए जा रहे थे कि अब उसकी जिंदगी भी नहीं बचेगी। अभी तक इस बात की पुख्ता जानकारी नहीं है कि वह जिंदा है या फिर उसे मार दिया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘किम जब पहाड़ पर आया था तब वहां के प्रबंधक को वहां आने वाले पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधा देने का आदेश दिया था।’ नवंबर 2013 में भी किम ने अपने सहयोगियों के साथ इस पहाड़ की यात्रा की थी, जब उसे अपने राजनीतिक गुरू और चाचा जांग सोंग-ठेक को ठिकाना लगाना था।’ अप्रैल 2015 में भी उसने यहां की यात्रा की थी और इस समय उसने पूर्व रक्षा प्रमुख ह्योन योंग-चोल को मौत की सजा दी थी। नॉर्थ कोरिया के पांचवे परमाणु परीक्षम के बाद 2016 में उसने यहां एक तीर्थ स्थल का निर्माण कराया था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि किम ने अंतराष्ट्रीय मामलों के अधिकारी किम टोंग-क्यूं को मौत की सजा देने से पहले भी यहां की यात्रा की थी। माउंट पैक्टू को नार्थ कोरिया के पहले तानाशाह और किम जोंग के दादा का जन्म स्थान माना जाता है। इस पहाड़ के बारे में कहा जाता है कि यहां कभी भयंक ज्वालामुखी का विस्फोट हुआ था और इस बात का भी डर है कि परमाणु परीक्षण के तौर पर यहां फिर जलजला आ सकता है। लगभग हजार साल पहले यहां ज्वालामुखी विस्फोट हुआ था, जिसकी राख जापान के उत्तरी हिस्से तक गई थी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक ‘बीते पांच वर्षों में किम जोंग-उन ने सत्ता के लिए यहां 340 लोगों को मौत की सजा दी है, जिसमें अधिकांश सीनियर अधिकारी शामिल हैं।’ दक्षिण कोरिया के थिंक टैंक नेशनल सेक्यूरिटी स्ट्रेटजी के मुताबिक, ‘अपनी सत्ता बचाने के लिए वह लोगों को मौत की सजा दे रहा है।’ ‘द मिसगवर्निंग ऑफ किम जोंग-उन’ के मिताबिक, 2011 से अब तक उसने 340 लोगों को मौत की सजा सुना चुका है, जिसमें 140 सीनियर ऑफिसर शामिल हैं।

पिछले वर्ष अक्टूबर महीने में दक्षिण कोरिया के खुफिया एजेंसी की ओर से एक रिपोर्ट जारी किया गया। इसमें कहा गया कि 64 तानाशाही किम जोंग ने 64 लोगों को सरेराह मौत की सजा सुना दी। नेशनल इंटेलिजेंश सर्विस के मुताबिक सत्ता की भूख में किम लगातार लोगों को मौत के घाट उतार रहा है। इस मामले में किम ने अपने पिता को भी काफी पीछे छोड़ दिया है।

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