Film Review: Raji, a Patriot Kashmiri Girl – फिल्म समीक्षा: राजी, एक देशभक्त कश्मीरी लड़की

निर्देशक- मेघना गुलजार, 

कलाकार-आलिया भट्ट, विकी कौशल, रजत कपूर, शिशिर शर्मा, जयदीप अहलावत, सोनी राजदान

उन्नीस सौ सत्तर-इकहत्तर… दिल्ली विश्वविद्यालय में सहमत नाम की एक कश्मीरी लड़की पढ़ती है। वो बेहद रहमदिल है। पक्षियों से उसे बहुत प्यार है। एक गिलहरी कहीं चलती कार से न कुचल जाए इसके लिए खतरे से खेल जाती है। वह इतनी नाजुक है कि टिटनस की सुई लगवाने से भी डरती है। पर हालात बदलते हैं और उसकी कायापलट हो जाती है। वह भारत की जासूस बनके पाकिस्तान पहुंच जाती है। एक पाकिस्तानी सेना के अधिकारी के बेटे से उसका निकाह होता है। भारत-पाकिस्तान युद्ध के पहले दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है और सहमत खतरों से जूझते हुए भी अपना काम करती रहती है। वह खुफिया जानकारियां भेजती रहती है। भारत के लिए उसके मन में इतना प्यार है कि यह भी नहीं सोचती कि वह जो कर रही है, उसका अंजाम क्या होगा? पति और देश में वो देश को चुनती है। पाकिस्तान में वो दो लोगों की हत्या भी करती है, वरना उसका राज खुल जाता। उसका पति भी भारत की खुफिया एजंसी की उस कार्रवाई में मारा जाता है, जो उसके यानी सहमत को पाकिस्तान से निकालने के लिए की गई थी। अपना काम करने के बाद सहमत विधवा होकर अपने देश भारत लौट जाती है।
मेघना गुलजार की नई फिल्म ‘राजी’ का लब्बोलुवाब यही है। आलिया भट्ट ने इसमें सहमत नाम की उस लड़की का किरदार निभाया है। वैसे तो ये जासूसी कहानी है, पर फिल्मों में दिखाई जानेवाली जासूसी कहानियों से काफी अलग। सहमत कोई जेम्स बांड मार्का जासूस नहीं है। फिल्म में सस्पेंस तो भरपूर है लेकिन वैसे एक्शन इसमें नही हैं, जो ज्यादातर थ्रिलर फिल्मों में दिखते हैं। एक घरेलू सामान्य औसत घर के सदस्यों के लिए पराठे बनाते हुए और टोस्ट सेंकते हुए किस तरह जासूसी करती है और इसी का किस्सा है ये फिल्म।

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आलिया भट्ट ने जिस किरदार को निभाया है उसका अपना डर और संकोच है। सहमत कभी भी पकड़ी जा सकती है। आखिर जिस घर में वो जासूसी कर रही है, वह पाकिस्तानी सेना के मेजर जनरल का घर है। उसका राज कभी भी खुल सकता है। राज अब खुला, तब खुला वाली हालत कई बार पैदा होती है। आलिया ने ऐसी परिस्थिति में फंसी सहमत के मानसिक तनाव के हर क्षण को जिस तरह परदे पर जिया, वह उन्हें एक बेहतरीन अभिनेत्री की कतार में खड़ा कर देता है। इसमें संदेह नहीं कि ये अब तक का आलिया भट्ट का सबसे अच्छा काम है। पूरी फिल्म आलिया या उनके चरित्र पर केंद्रित है। सहमत के पति इकबाल की भूमिका में विकी कौशल का काम भी अच्छा है। आलिया भट्ट की असली मां सोनी राजदान इसमें सहमत की मां बनी हैं। आलिया की शानदार भूमिका के अलावा फिल्म तीन और बातों के लिए उल्लेखनीय है। एक तो भारत-पाकिस्तान के तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद किसी तरह का अंधराष्ट्रवाद नहीं दिखाती। यह राष्ट्रवाद नहीं बल्कि देशभक्ति को दिखानेवाली फिल्म है। दूसरा, ये बड़े ही ताकतवर तरीके से दिखाती है कि मुसलिम, खासकर कश्मीरी मुसलिम भी, सहज रूप से देशभक्त हो सकते हैं और देश के लिए अपनी जान की बाजी लगा सकते हैं। सहमत के पिता भी भारत के लिए पाकिस्तान में जासूसी करते हैं, यह भी फिल्म में दिखाया गया है। जयदीप अहलावत ने जिस भारतीय खुफिया अधिकारी की भूमिका निभाई है, वह भी मुसलिम है। तीसरा, यह फिल्म युद्ध की व्यर्थता और अमानवीयता को सामने लाती है। जंग में मरनवाले ज्यादातर निरीह और निर्दोष होते हैं। यह अक्सर भुला दिया जाता है। फिल्म इसकी याद दिलाती है।

‘राजी’ हरिंदर सिक्का के उपन्यास ‘कॉलिंग सहमत’ पर आधारित है। सिक्का भारतीय नौसेना के अधिकारी रहे हैं और करगिल युद्ध के समय रिटायर सेना के अधिकारी के रूप में हालात का जायजा लेने उस इलाके में गए थे। वहीं उन्हें एक ऐसी लड़की की जानकारी मिली, जो भारत के लिए पाकिस्तान में जासूसी करने गई थी। सहमत उसका वास्तविक नाम नहीं था। लड़की, जो अब इस दुनिया में नहीं है, भारत आने के बाद लंबे समय तक जीवित रही और उसका बेटा भी भारतीय सेना में था। वो खुद गुमनाम-सी रही और भारत-पाकिस्तान युद्ध के इतिहास में उसका नाम दर्ज नहीं है। मेघना गुलजार की इस फिल्म को देखने के बाद 2017 में संकल्प रेड्डी के निर्देशन में आई फिल्म ‘द गाजी अटैक’ की याद आती है। उसमें यह दिखाया गया था कि 1971 भारत-पाक युद्ध के समय पाकिस्तान ने भारतीय युद्धपोत आइएनएस विक्रांत को ध्वस्त करने के लिए गुप्त तरीके से अपने युद्धपोत पीएनएस गाजी को भेजा था। ‘राजी’ में यह जिक्र आता है कि सहमत ने यह खुफिया जानकारी भेजी थी कि पाकिस्तान नौसेना के माध्मय से कोई भारत के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई करने जा रहा है। क्या इस तरह का असल में कोई संदेश उस लड़की ने भारतीय खुफिया एजंसी को भेजा था, जिसका हरिंदर सिक्का की किताब में उल्लेख है? अगर हां, तो भारतीय सैन्य इतिहास में इसे दर्ज किया जाना चाहिए। वो देशभक्त कश्मीरी लड़की असल में कौन थी?

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