Priya Prakash Varrier co-star Jipsa Beegam morphed pictures circulating in social media – प्रिया प्रकाश की को-स्टार की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़, अश्लील फोटोज किए वायरल

मलयालम अभिनेत्री प्रिया प्रकाश वारियर के बाद अब उनकी को-स्‍टार मुश्किलों में घिर गई हैं। अभिनेत्री जिप्‍सा बीगम की तस्‍वीरों के साथ छेड़छाड़ कर सोशल मीडिया में वायरल कर दिया गया है। अभिनेत्री जिप्‍सा बीगम नेे ‘ओरु अदार लव’ फिल्‍म में प्रिया के साथ स्‍क्रीन साझा की है। जानकारी के मुताबिक, उनकी तस्‍वीरों के साथ छेड़छाड़ कर उन्‍हें ऑनलाइन लीक कर दिया गया था। जिप्‍सा ने फेसबुक पोस्‍ट के जरिये इसकी जानकारी दी है। उन्‍होंने तस्‍वीरों के साथ छेड़छाड़ और उसे शेयर करने वालों को चेतावनी देते हुए केस दर्ज कराने की बात कही है। उन्‍होंने कहा कि वह आरोपियों को कोर्ट तक ले जाएंगी। फेसबुक पोस्‍ट में जिप्‍सा ने लिखा, ‘मैं साइबरक्राइम की पहली पीड़ि‍त नहीं हूं। मैं विवादों से कभी परेशान नहीं होती, क्‍योंकि मेरा अपना व्‍यक्तित्‍व है। आप सभी को यह पोस्‍ट देखना चाहिए और वर्चुअल दुनिया में बैठ कर मेरा अपमान करने वालों के प्रति विरोध जताना चाहिए। मैं ऐसा करने वाले उस व्‍यक्ति से सिर्फ इतना कहना चाहूंगी कि आपको मेरे फोटो के साथ छेड़छाड़ कर अपनी हताशा मुझ जैसे आमलोगों पर नहीं निकालना चाहिए। जो लोग उसे मेरी तस्‍वीर समझ कर मजे ले रहे हैं, उन्‍हें यह नहीं भूलना चाहिए कि चाइनीज फोन कभी आईफोन नहीं हो सकता।’

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बता दें क‍ि सुप्रीम कोर्ट ने युवाओं के दिलों का धड़कन बनीं प्रिया प्रकाश के खिलाफ दर्ज सभी FIR पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने किसी राज्य को इस मामले में FIR या कारवाई न करने के आदेश दिए थे। मलयालम फिल्म ‘ओरु अदार लव’ के एक गाने को लेकर उनके और निर्देशक उमर अब्दुल वहाब के खिलाफ तेलंगाना और महाराष्ट्र में FIR दर्ज कराई गई थी। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इसे रद्द करने की मांग की गई थी। ये विवाद फिल्म के गाने ‘माणिक्य मलाराया पूवी…’ को लेकर उठा है जो कि केरल के मालाबार क्षेत्र का एक पारंपरिक मुस्लिम गीत है। यह गाना पैगंबर मोहम्मद और उनकी पहली पत्नी खदीजा के बीच प्रेम का वर्णन और प्रशंसा करता है। इस गाने के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद तेलंगाना, रजा अकादमी और जन जागरण समिति ने मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को कथित तौर पर चोट पहुंचाने के लिए FIR दर्ज कराई थी। शीर्ष अदालत में दाखिल याचिका के अनुसार, तेलंगाना और महाराष्ट्र में गाने की गलत व्याख्या के आधार पर विभिन्न समूहों द्वारा आपराधिक शिकायतें दर्ज कराई गईं। अन्य गैर-मलयालम भाषी राज्यों में भी मामले दर्ज होने की संभावना जताई गई थी।

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