rohena gera film sir in cannes film festival – कान फिल्म समारोह ‘सर’ : संवेदनाओं का संवाद

अजित राय

युवा फिल्मकार रोहेना गेरा की पहली हिंदी फीचर फिल्म ‘सर’ की 71वें कान फिल्म समारोह में काफी तारीफें हो रही हैं। ‘कान क्रिटिक वीक’ में प्रदर्शित ‘सर’ कैमरा डि ओर पुरस्कार की दावेदार है। इसमें मुख्य भूमिका मीरा नायर की ‘मानसून वेडिंग’ से चर्चित तिल्लोतमा शोम (एलिस)ने निभाई है। रोहेना गेरा भारत मे अरेंज मैरेज पर अपनी डाक्यूमेंटरी ‘लव गेट टू डु विद इट’ के लिए जानी जाती हैं।

फिल्म ‘सर’ मुंबई के पॉश इलाके में स्थित एक आलीशान अपार्टमेंट में रहनेवाले रईस और उसकी नौकरानी के बीच लगाव, प्रेम और वर्ग भेद को अद्भुत सिनेमाई कौशल से दिखाती है। यहां मुंबई शहर एक पृष्ठभूमि भर है, वैसे यह कहीं की भी कहानी हो सकती है।न्यूयार्क में रहनेवाला अश्विन (विवेक गोंबर) एक लेखक है जो अपने भाई की बीमारी में उपन्यास लिखने का काम अधूरा छोड़कर वापस मुंबई आकर भवन निर्माण के अपने पारिवारिक कारोबार में हाथ बटा रहा है । वह एक आलीशान अपार्टमेंट में अकेले रहता है। अभी-अभी उसकी शादी टूटी है इसलिए वह कुछ निराश, कुछ अपने आप में खोया सा रहता है।

बड़ी खबरें

रत्ना (तिल्लोतमा शोम) एक विधवा है, जो उसकी नौकरानी है और उसी अपार्टमेंट के सर्वेंट रूम में रहती है। उसका सपना है कि एक दिन वह फैशन डिजाइनर बनेगी और अपना बुटीक खोलेगी। गांव में शादी के चार महीने बाद ही उसका पति मर गया था और वह घरेलू नौकरानी का काम करने मुंबई आ गई थी। वह पढ़ना चाहती थी पर शादी के कारण उसे पढ़ाई बंद करनी पड़ी। वह गांव में अपनी छोटी बहन को पढ़ा रही है।

एक ही अपार्टमेंट में अलग-अलग दुनिया के दो बाशिंदे हैं। अश्विन उसकी आवाज तभी सुनता है, जब रत्ना कुछ काम करने के लिए पूछती है। अपार्टमेंट में एक गलियारा है, जो अश्विन के बेडरूम, ड्राइंगरूम को रसोई घर और उसके बगल में बने सर्वेंट रूम से जोड़ता है, जिसमें रत्ना रहती है। फिल्म में यह गलियारा एक चरित्र बन जाता है, जो एक साथ अश्विन और रत्ना को जोड़ता भी है और अलग भी करता है। अपार्टमेंट के टैरेस से रात में रौशनी से जगमग मुंबई का विहंगम दृश्य दिखाई देता है, जहां अश्विन और रत्ना अपने तनाव को संतुलित करते हैं। पूरी फिल्म एक घरेलू नौकरानी की डायरी की तरह रोजमर्रा की सामान्य गतिविधियों में चलती है। धीरे-धीरे अश्विन रत्ना के प्रति लगाव और एक अबूझ प्रेम महसूस करने लगता है। यह प्यारा-सा अबूझ एहसास हमें वांग कार वाई की मशहूर फिल्म ‘इन द मूड फॉर लव’ की याद दिलाता है, जिसमें दो शादीशुदा स्त्री-पुरुष प्यार करना भी चाहते हैं और कर भी नहीं पाते।

एक शाम घर लौटते हुए लिफ्ट में अश्विन रत्ना को चूम लेता है और रत्ना की छोटी- सी दुनिया बिखरने लगती है। वह ज्यादा परिपक्व है और जानती है कि यह रिश्ता संभव नही है। वह नौकरी छोड़ने का फैसला करती है और अपार्टमेंट से चली जाती है। अश्विन भी न्यूयार्क जाने का फैसला करता है। यह पूरी फिल्म तिल्लोतमा शोम की हैं और उन्होंने अपनी भूमिका में आकर्षक उंचाई हासिल की है। उनका सपाट चेहरा मौन में भी बहुत कुछ कह जाता है। एक परफेक्ट मेड के चरित्र को जिस सच्चाई से उन्होंने निभाया है, वह चकित करनेवाला है। फिल्म में दो दुनिया के दो लोगों की संवेदनाओं का संवाद है। हिंसा या कुरूपता या रोना-धोना कहीं नही है, जो आमतौर पर ऐसी फिल्मों में होता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *