राम मंदिर: दूसरी जगह मस्जिद शिफ्ट करने का सुझाव देकर साथियों के गुस्से का शिकार बने मौलाना – All India Muslim Personal Law Board AIMPLB member Maulana Sayyed Salman Hussaini proposes to hanover disputed site to hindus for ram mandir in Ayodhya controversy Babri masque

हैदराबाद में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में तब विवाद हो गया जब एक कद्दावर सदस्य ने कहा कि अयोध्या में विवादित जगह से दूर एक शानदार मस्जिद बनाई और यूनिवर्सिटी बनाई जाए। लखनऊ के नदवा सेमिनारी के मौलाना सैय्यद हुसैनी नदवी ने कहा कि मुसलमानों के यह एक विकल्प हो सकता है। मुफ्ती मौलाना सैय्यद हुसैनी नदवी उस 6 सदस्यीय मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य थे जिन्होंने गुरुवार (8 फरवरी) को अयोध्या विवाद सुलझाने के लिए श्री श्री रविशंकर से मुलाकात की थी। हालांकि नदवी के इस बयान से कई मुस्लिम मौलानाओं और मुस्लिम नेताओं ने आपत्ति जताई है और उनके फार्मूले को खारिज कर दिया है। नदवी के बयान का जिक्र किये बगैर एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों का मानना है कि जिस जगह पर मस्जिद थी वहां पर हमेशा मस्जिद ही रहेगी। AIMPLB की बैठक शुरू होने से पहले ओवैसी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इसी लाइन पर विचार करेगी।

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बता दें कि मौलाना सैय्यद हुसैनी नदवी ने कहा था कि इस्लामी विधिशास्त्र की हांबली स्कूल ऐसा कहता है कि मस्जिद की जगह बदली जा सकती है और मुस्लिम ऐसे किसी भी प्लान से राजी हो जाएंगे। नदवी का यह बयान तब आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी को कहा है कि वह अयोध्या मुद्दे को भूमि विवाद के रूप में देखेगा। नदवी ने कहा कि इस विवाद को सुलझाने के लिए हिन्दू-मुस्लिम नेताओं को कोर्ट से बाहर भी मिलते रहना चाहिए। उन्होंने मांग की थी कि सरकार को विवादित स्थल से दूर मस्जिद बनाने के लिए जमीन आवंटित करनी चाहिए, और हिन्दुओं को दूसरे मुस्लिम स्थलों पर दावा नहीं करना चाहिए।

जमीएत-उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि वह नदवी के इस बयान के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि नदवी अयोध्या पर मुसलमानों के दावे को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने नदवी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि मीटिंग में दोनों ही नेता मौजूद थे। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में विशेष तौर पर आमंत्रित किये गये एक शख्स ने भी इस बयान की आलोचना की है और कहा है कि जब बोर्ड कह चुका है कि उसे कोर्ट का फैसला स्वीकार है तो उन्हें इस तरह का बयान देना चाहिए। हांलाकि मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी से जुड़े जफर सरेशवाला ने मौलाना नदवी के बयान का बयान समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि नदवी ने जो कहा उसका कुछ मतलब निकलता है।

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