हिंदी न्यूज़ – OPINION: मोदी के खिलाफ 2019 की लड़ाई में राहुल की कितनी मदद कर पाएंगी मायावती? – OPINION With Mayawati’s Help, Rahul Gandhi Can Tap Into Dalit Anger to Fight PM Modi in 2019

(आशुतोष)

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान भले ही अभी न हुआ हो, लेकिन सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है. एक तरफ पीएम मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ सियासी माहौल गर्माने में जुटे हैं. दूसरी ओर विपक्षी दल महागठबंधन का ताना-बाना बुनने में लगे हैं. दलित वोट बैंक को साधने के लिए हर पार्टी ‘बहनजी’ यानी मायावती का साथ चाहती है. लोकसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं. इन तीन राज्यों में कांग्रेस के साथ मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) के गठजोड़ की चर्चा भी सियासी गलियारों में हैं. सवाल ये है कि क्या मोदी के खिलाफ 2019 की लड़ाई में मायावती राहुल गांधी के लिए मददगार साबित हो पाएंगी? आम आदमी पार्टी के सीनियर लीडर आशुतोष पूरे मसले पर अपना नज़रिया रख रहे हैं:-

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में इस साल अक्टूबर-नवंबर में चुनाव होने हैं. इस वक्त बड़ा सवाल ये है कि क्या कांग्रेस को चुनावों में बीएसपी के साथ गठबंधन करना चाहिए या फिर पार्टी को पहले की तरह अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ना चाहिए? दरअसल, कांग्रेस और बीएसपी ने इसके पहले कई मौकों पर प्री-पोल अलायंस के संकेत दिए हैं. सीटों के बंटवारे को लेकर गठबंधन का पेंच अभी फंसा है, लेकिन बैठकों का दौर जारी है. आने वाले दिनों में स्थिति साफ होगी.

कांग्रेस ने रविशंकर प्रसाद पर साधा निशाना, कहा- ‘डीलर’ बन गए हैं देश के कानून मंत्री

अगर दोनों पार्टियों का गठबंधन होता है, तो यह एक अच्छा राजनीतिक कदम होगा, क्योंकि इससे कांग्रेस और बीएसपी दोनों ‘अपमान’ से बच जाएगी. 2019 की जंग के पहले ये तीन विधानसभा चुनाव इस साल के आखिरी चुनाव होंगे; जब तक प्रधानमंत्री वन ‘नेशन वन इलेक्शन’ के तहत कोई बड़ा ऐलान नहीं कर देते.

बीएसपी और कांग्रेस के प्रस्तावित गठबंधन की राजनीतिक पृष्ठभूमि रही है. राहुल गांधी और मायावती दोनों की पार्टी बीजेपी के सामने संघर्ष कर रही है. चुनाव में दोनों को बहुत कुछ साबित करना है. जब से राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बने हैं, तब से उन्होंने बीजेपी के खिलाफ लड़ाई का सामना तो किया है, लेकिन अब तक इस लड़ाई को जीतने के दावे नहीं किए.

राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने गुजरात में बेहतरीन प्रदर्शन किया. बीजेपी को कांटे की टक्कर दी. बीजेपी के खिलाफ जंग के लिए कांग्रेस ने गुजरात की ‘तिकड़ी’ और युवा नेताओं हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकोर के साथ गठजोड़ किया. फिर बीजेपी के ‘हिंदुत्व’ के तोड़ के रूप में ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ पर काम शुरू किया. इसके तहत राहुल गांधी ने मंदिरों-मस्जिदों का दौरा किया. ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ के जरिये राहुल ने पीएम मोदी और अमित शाह को चुनाव में जीत के लिए कठिन परिश्रम भी करने को मजबूर कर दिया. बीजेपी ने भले ही गुजरात चुनाव जीता हो, लेकिन हार के बाद भी राहुल गांधी ‘बाजीगर’ कहलाएं.

राहुल की कांग्रेस वर्किंग कमिटी का ऐलान, दिग्विजय-कमलनाथ समेत कई बड़े नेताओं का कटा नाम

इसके बाद मौका आया कर्नाटक में सरकार बनाने का. अमित शाह की लाख कोशिशों के बावजूद राहुल गांधी ने यहां बीजेपी की सरकार नहीं बनने दी. गुजरात और कर्नाटक चुनावों में राहुल गांधी ने अपनी मैच्युरिटी और पॉलिटिकल अंडरस्टैंडिंग दिखाई. कर्नाटक में बीजेपी को अपमान का घूंट पीकर रह जाना पड़ा. इससे राजनीतिक रूप से यह मैसेज गया कि अगर विपक्षी दल एक साथ आ जाए, तो मोदी और बीजेपी के विजयी रथ को रोका जा सकता है.

अगर अब बात करें मायावती की, तो यूपी में पिछले दो चुनावों (लोकसभा और विधानसभा) मायावती के लिए बहुत दुखद रहे हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल पाई. वहीं, 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में मायावती दोबारा यूपी की सत्ता में आने के दावें कर रही थीं. लेकिन, बीएसपी को सिर्फ 18 सीटें मिली, जो अब तक के विधानसभा चुनावों में इसका सबसे खराब प्रदर्शन है.

मायावती के नेतृत्व और पार्टी पर सवाल तब खड़े हुए, जब राज्यसभा में वह अपना एकमात्र कैंडिडेट भी नहीं भेज पाईं. इसके बाद कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने मायावती के सियासी करियर पर ‘ऑबिच्युरी’ तक लिख दी थी. उन्हें शाब्दिक रूप से ‘खत्म’ मान लिया गया था. आरएसएस और बीजेपी डींगे मारते थे कि एकमात्र मायावती ही दलितों में जाटव हैं, बाकी सभी बीजेपी में शामिल हो चुके हैं.

जाटव समुदाय यूपी की कुल आबादी का 11 फीसदी है, जबकि 9 फीसदी आबादी दलित है. अपने जमीनी काम और प्रॉपगेंडे के तहत बीजेपी इन दलितों को लुभाने में जुटी है.

(लेखक आम आदमी पार्टी के लीडर हैं, ये उनके निजी विचार हैं.)

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *