हिंदी न्यूज़ – सबरीमाला मांदिर: सुप्रीम कोर्ट का फैसला, हर उम्र की महिलाएं मंदिर में कर सकती हैं प्रवेश-temple is public place EVERYONE SHOULD BE ALLOWED TO GO THERE said supreme court in sabrimala case

केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने कहा है कि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर बैन लगाने का फैसला संविधान के खिलाफ है. कोर्ट ने कहा, ‘संविधान में प्राइवेट मंदिर का कोई कॉन्सेप्ट नहीं है और एक बार यदि आपने मंदिर सार्वजनिक तौर पर खोल दिया तो उसमें कोई भी प्रवेश कर सकता है.’

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि मंदिर निजी स्थान नहीं है. मंदिर एक जन संपत्ति है जहां जाने से किसी भी आयु वर्ग के महिला या पुरुष को,  किसी भी तरह से नहीं रोका जा सकता.

मंदिर प्रबंधन ने 10 से 50 साल की बच्चियों और महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था. इस मामले में कई संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी. इस मामले में मंगलवार को सुनवाई शुरू हुई है. इस पीठ में जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा शामिल हैं.

शीर्ष अदालत ने पिछले साल 13 अक्टूबर को पांच सवाल तैयार करके संविधान पीठ के पास भेजे थे. इनमें यह सवाल भी था कि क्या मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध पक्षपात करने के समान है और इससे संविधान के अनुच्छेद 14, 15 में दिए उनके मौलिक अधिकारों का हनन होता है और उन्हें अनुच्छेद 25 और 26 के अंतर्गत नैतिकता से संरक्षण नहीं मिला है.10 से 50 वर्ष तक की महिलाओं के प्रवेश पर रोक
पत्थनमथिट्टा जिले के पश्चिमी घाट की पहाड़ी पर स्थित सबरीमाला मंदिर के प्रबंधन ने शीर्ष अदालत से पहले कहा था कि मासिक धर्म की वजह से वे शुद्धता नहीं बनाये रख सकती है, इसलिए 10 से 50 साल तक की महिलाओं का मंदिर के अंदर जाना मना है.

इस मामले में सात नवंबर, 2016 को केरल सरकार ने न्यायालय को सूचित किया था कि वह ऐतिहासिक सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश के पक्ष में है.

शुरुआत में राज्य की एलडीएफ सरकार ने 2007 में प्रगतिशील रुख अपनाते हुए मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की हिमायत की थी जिसे कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार ने बदल दिया था.

यूडीएफ सरकार का कहना था कि वह 10 से 50 साल तक की महिलाओं का प्रवेश वर्जित करने के पक्ष में है क्योंकि यह परपंरा अति प्राचीन काल से चली आ रही है.

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