हिंदी न्यूज़ – PM मोदी के ‘दीवाली स्टाइल’ में राष्ट्रपति कोविंद मनाएंगे अपनी पहली सालगिरह!

देश के 14वें राष्ट्रपति के तौर पर रामनाथ कोविंद 25 जुलाई अपना एक साल पूरा कर रहे हैं. राष्ट्रपति अपनी पहली ‘सालगिरह’ बड़े अनोखे तरीके से मनाने वाले हैं. इस मौके पर राष्ट्रपति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दीवाली स्टाइल’ में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में आदिवासियों और किसानों के बीच होंगे.

बता दें कि 2014 में प्रधानमंत्री ने दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धस्थल सियाचिन में जवानों के साथ दीवाली मनाई थी. 2015 में पीएम ने पंजाब में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर दीवाली मनाई. फिर 2016 में दीवाली के मौके पर वह हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में आईटीबीपी के जवानों के बीच पहुंचे थे. जबकि, प्रधानमंत्री ने पिछले साल की दिवाली जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा के गुरेज घाटी में सेना के जवानों के बीच मनाई थी.

15 अगस्त को राष्ट्रपति के ‘At Home’ कार्यक्रम में शामिल होंगे टॉपर्स

अपने दौरे पर राष्ट्रपति स्वयं-सहायता समूह की महिलाओं से मुलाकात करेंगे. राष्ट्रपति भवन के अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रपति का मानना है कि पहली सालगिरह के लिए राष्ट्रपति भवन में किसी खास कार्यक्रम की जरूरत नहीं है. बेहतर होगा कि वो इस मौके पर जमीनी लोगों के बीच में हों. इसलिए उनका छत्तीसगढ़ का कार्यक्रम तय हुआ है.

ये है राष्ट्रपति का कार्यक्रम
छत्तीसगढ़ में राष्ट्रपति का दो दिनों का कार्यक्रम है. वह 25 जुलाई को दंतेवाड़ा के जावंगा गांव में किसानों से मिलेंगे. फिर हिरानार में आदिवासियों से मुलाकात करेंगे. वहीं, उनका बस्तर, संभाग और जगदलपुर जिले में दूसरे कार्यक्रम भी है. 26 जुलाई को राष्ट्रपति जगदलपुर जिले में होंगे.

वैसे तो हर राष्ट्रपति के कार्यकाल में राष्ट्रपति भवन कुछ न कुछ बदलता है. लेकिन, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के इच्छानुसार इसबार ऐसा कुछ नहीं किया जा रहा. हालांकि, राष्ट्रपति कोविंद ने तय किया कि राष्ट्रपति भवन में जनता के पैसे पर किसी तरह का धार्मिक आयोजन नहीं किया जाएगा. वहीं, राष्ट्रपति किसी भी अवॉर्ड फंक्शन में अधिकतम एक घंटे तक ही शामिल होंगे.

दरअसल, कई पूर्व राष्ट्रपति भी ये महसूस करते थे कि अवॉर्ड फंक्शन में लंबा वक्त लगता है. इसलिए सीमित समय में ऐसे कार्यक्रम हो, लेकिन मौजूदा राष्ट्रपति ने एक घंटे का वक्त निर्धारित किया. राष्ट्रपति के इस फैसले की वजह से पिछले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के दौरान विवाद भी खड़ा हुआ था.

राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं होगा राष्ट्रपति भवन का इस्तेमाल
राष्ट्रपति कोविंद ने किसी राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रपति से मिलने के दौरान फोरकोर्ट में मीडिया में संबोधन पर भी रोक लगाई है. राष्ट्रपति भवन के जानकारों के मुताबिक, राष्ट्रपति कोविंद का मानना है कि राष्ट्रपति भवन का परिसर राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल नहीं होना चाहिए.

‘At Home’ कार्यक्रम में भी किए बदलाव
वहीं, राष्ट्रपति ने 26 जनवरी और 15 अगस्त के ‘At Home’ कार्यक्रम में बड़े स्तर पर बदलाव किए हैं. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के वक्त में ‘At Home’ कार्यक्रम में अतिथियों की संख्या को लगभग ढाई हजार से घटाकर 750 के आसपास कर दिया गया है. इसके अलावा अब ग्रासरूट अचीवर्स को कार्यक्रम में प्राथमिकता दी जाती है.

अब से हफ्ते में 4 दिन जनता के लिए खुला रहेगा राष्ट्रपति भवन
रामनाथ कोविंद के कार्यकाल में राष्ट्रपति भवन को जनता के लिए और खोल दिया गया है. अब तक तीन दिन ही लोग राष्ट्रपति भवन की सैर कर सकते थे, लेकिन राष्ट्रपति कोविंद ने चार दिन आम लोगों के लिए निर्धारित किया है. यानी गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार को आम लोग राष्ट्रपति भवन को देखने जा सकते हैं.

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की तरह राष्ट्रपति कोविंद का भी मानना है राष्ट्रपति भवन जनता का है. इसलिए अधिक से अधिक लोगों के लिए राष्ट्रपति भवन को खोला जाना चाहिए. कोविंद का मानना है कि हैदराबाद स्थित राष्ट्रपति निलायम को भी लोगों के लिए अधिक वक्त तक खोला जाना चाहिए. यही नहीं, राष्ट्रपति भवन में अनावश्यक और जरूरत से ज्यादा खर्च पर भी रोक लगाया गया है.

राष्ट्रपति के 52 हफ्ते में 52 दौरे
राष्ट्रपति ने अपने एक साल के 52 हफ्ते में कुल 52 दौरे किए हैं, यानी हर हफ्ते एक दौरा. पहले साल में देश के 29 राज्यों में 27 राज्य का दौरा राष्ट्रपति कर चुके हैं. सिर्फ मेघालय और सिक्किम को छोड़कर. इसके अलावा 4 विदेशी दौरे के दौरान कोविंद अब तक 10 देशों में जा चुके हैं. राष्ट्रपति के दौरे का केंद्र अब तक अफ्रीकी देश रहे हैं.

एक साल में बनाई अलग छवि
राष्ट्रपति बनने से पहले रामनाथ कोविंद कोई हेवीवेट राजनीतिज्ञ नहीं थे. राज्यसभा सांसद रहने के बावजूद और राष्ट्रपति बनने से पहले बिहार के राज्यपाल के तौर पर लोग नाम भले ही जानते हों, लेकिन राजनीति के क्षेत्र में रामनाथ कोविंद लोकप्रिय चेहरा नहीं थे. ऐसे में राष्ट्रपति बनने के बाद कई तरह के सवाल थे कि क्या वो राष्ट्रपति पद से होने वाली अपेक्षाओं को पूरा कर पाएंगे, खासकर ऐसे समय में जब आपसे पहले राष्ट्रपति के रूप में प्रणब मुखर्जी पद पर मौजूद थे.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पद संभालने के करीब 6 महीने बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी पहली मुलाकात के बाद राष्ट्रपति की जमकर तारीफ की. इसके अलावा टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केरल में सीपीएम के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने एक खास तरह का संबंध मौजूदा राष्ट्रपति से विकसित किया है. दोनों मुख्यमंत्री अपनी समस्याओं और मसलों को राष्ट्रपति के सामने खुलेतौर पर रखते हैं.

दया याचिका पर सख्त रखते हैं रुख
गौर करनेवाली बात है कि दोनों पार्टियों ने राष्ट्रपति के चुनाव में विपक्षी उम्मीदवार का समर्थन किया था. इसके अलावा कोविंद भले ही शांत स्वभाव के हों, लेकिन दया याचिका पर राष्ट्रपति का रूख सख्त रहा है. अब तक एक ही दया याचिका पर कोविंद ने निर्णय लेते हुए हत्या के दोषी की याचिका को खारिज किया है.

बहरहाल, राष्ट्रपति कोई हो, हर राष्ट्रपति से एक खास तरह की अपेक्षाएं होती हैं. देखना होगा कि पहले वर्ष के बेहतर कार्यकाल के बाद अगले चार साल राष्ट्रपति कोविंद अपनी किस तरह की छवि पेश करते हैं.

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