हिंदी न्यूज़ – महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा की पड़ताल के लिये अदालत ने बनाई समिति – court established commission for children and women against sexual abuse

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा की पड़ताल के लिये अदालत ने बनाई समिति

प्रतीकात्मक चित्र

भाषा

Updated: July 31, 2018, 6:19 PM IST

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा को रोकने की अविलंब आवश्यकता है. अदालत ने इस मुद्दे की पड़ताल करने और उठाए जाने वाले कदमों का सुझाव देने के लिये एक समिति गठित करने का फैसला किया.

दो एनजीओ की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने कहा कि मुद्दे पर गौर करने और इस तरह के अपराधों पर नियंत्रण के लिये एहतियाती उपाय और उचित सजा सुझाने के लिये एक समिति गठित करने पर संभवत: कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिये.

अदालत की यह भी राय थी कि इस तरह के अपराधों का महत्वपूर्ण पहलू दोषी व्यक्तियों में सुधार किया जाना है. अदालत ने कहा, ‘‘दोषियों का सुधार समाज की असली आवश्यकता है.’’

समिति के संबंध में अदालत ने विद्या रेड्डी (टीयूएलआईआर, भारत में बाल यौन शोषण को रोकने की दिशा में काम करने वाला संगठन), वृंदा भंडारी (अधिवक्ता) और स्वागत राहा (सेंटर फॉर चाइल्ड एंड लॉ, एनएलएसआईयू) के नाम स्वीकार कर लिये. न्याय मित्र अपर्णा चंद्रा ने ये नाम सुझाए थे और वकील को निर्देश दिया कि वे सदस्यों को दिये जाने वाले पारिश्रमिक पर केंद्र से निर्देश लें.ये भी पढ़ें: चिल्ड्रेन होम रेप कांड से सबक: NGO पर नकेल कसने और सामुदायिक पुलिसिंग बढ़ाने की जरू

पीठ ने गौर किया कि न्याय मित्र ने जो नाम सुझाए हैं, वे महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा के मुद्दे पर विशेषज्ञ हैं और जमीनी स्तर पर भी सक्रियता से काम करने में लगे हैं.

समिति में और सदस्यों को भी शामिल किये जाने की संभावना है. अदालत ने कहा कि पारिश्रमिक के पहलू पर केंद्र सरकार को अविलंब विचार करना है और मामले की अगली सुनवाई की तारीख 16 अगस्त को निर्धारित कर दी.

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