हिंदी न्यूज़ – रेन वाटर हार्वेस्टिंग: 2 साल में सूख जाएगा ज़मीन का पानी, Rain water Harvesting, Delhi, Niti Aayog, water crisis, ground water

जल ही जीवन है, इस लाइन को तो हम मान चुके हैं. लेकिन बारिश की छोटी-छोटी बूंदे आगे चलकर हमे वो पानी देंगी जो हमारा जीवन बचाएगा. इस लाइन को मानने के लिए हम अभी तक तैयार नहीं हुए हैं. ये ही वजह है कि बारिश से मिलने वाला करोड़ों क्यूबिक मीटर पानी नदी-नालों में बर्बाद चला जाता है.

बारिश के पानी का एक छोटा सा हिस्सा ही हमे इस्तेमाल के लिए मिल पाता है. रेन वाटर हार्वेस्टिंग से हम बारिश के पानी की एक-एक बूंद को सहेज सकते हैं. लेकिन इसके लिए बहुत सारे लोग अभी भी तैयार नहीं हैं. सरकार इस मामले में कई योजनाएं भी बना चुकी है, लेकिन दूसरी और योजना-परियोजना की तरह से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की योजना भी धूल खा रही है.

हम इस्तेमाल कम, बर्बाद ज्यादा करते हैं पानी

ये ही वजह है कि पंजाब में 5 नदियां बहती हैं. बावजूद इसके पंजाब बड़े जल संकट की ओर बढ़ रहा है. ज़मीन से अधिक पानी निकालने के चक्कर में पंजाब के 147 में से 112 ब्लॉक डीप डार्क जोन में चले गए हैं. ये रिपोर्ट सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड ने जारी की है. ग्राउंड वाटर लेवल 300 फीट नीचे चला गया है. ग्राउंड वाटर का 78 फीसद हिस्सा खेती में खर्च हो रहा है. सूबे में 14 लाख ट्यूबवेल लगातार पानी खींच रहे हैं.2 लाख ट्यूबवेल तो सिर्फ शहर को पानी सप्लाई करते हैं. आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अकेले 2 लाख ट्यूबवेल ज़मीन की कोख को चीरकर कितना पानी खींचते होंगे. पंजाब के रेगिस्तान बनने में अब देर नहीं रह गई है. हर साल 3 फीट ग्राउंड वाटर लेवल नीचे जा रहा है.

हमने आपके सामने पानी की एक भयावह तस्वीर सिर्फ पंजाब की बयां की है, लेकिन राजस्थान, हरियाणा, यूपी और दिल्ली के हालात भी कोई अच्छे नहीं हैं. नीति आयोग भी अपनी एक रिपोर्ट में कह चुका है कि अगर हम जागे नहीं तो देश के 21 शहरों में 2 साल बाद ज़मीन का पानी खत्म हो जाएगा.

ग्राउंड वाटर के बिगड़ते हालात पर एक नज़र

1.  विश्व बैंक ने 2018-19 से 2022-23 तक के लिए 6000 करोड़ रुपये भूमि जल प्रबंधन के लिए दिए हैं. गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के 1034 अति दोहन वाले क्षेत्रों में काम होगा.

2.  नीति आयोग ने एक रिपोर्ट कंपोजिट वाटर मैनेजमेंट इंडेक्स 2018 जारी की है.

रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक पानी की मांग सप्लाई से दोगुनी हो जाएगी.

2020 तक 21 शहरों में भूमि जल समाप्त हो जाने की संभावना है.

3.  2001 में प्रति व्यक्ति वर्षा जल 1820 क्यूबिक मीटर था.

2011 में ये मात्रा 1545 क्यूबिक मीटर हो गई.

2025 में ये मात्रा 1340 क्यूबिक मीटर हो सकती है.

2050 में 1140 क्यूबिक मीटर मांग होगी.

1700 क्यूबिक मीटर प्रति व्यक्ति से कम वार्षिक पानी की मौजूदगी जल दबाव वाले हालात माने जाते हैं.

जबकि 1000 क्यूबिक मीटर वाले हालात को पानी की कमी के रूप में माना जाता है.

4.  600 मिलियन लोग देश में पानी की कमी का सामना कर रहे हैं.

हर साल 2 लाख लोग साफ पानी की कमी के चलते दम तोड़ रहे हैं.

2050 में देश की कुल जल मांग 1180 बीसीएम अनुमानित है.

जबकि 2050 में देश में जल की उपलब्धता 1137 बीसीएम का अनुमान है.

रेन वाटर हार्वेस्टिंग कोई जटिल तकनीक नहीं है. एक आम आदमी भी बहुत ही कम खर्च पर इस सिस्टम को अपनाकर बारिश का लाखों लीटर पानी बचाकर ज़मीन में सुराक्षित कर सकता है. अपने कालेज के एक-एक कोने में रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाने वाले फादर जॉन फरेरा का कहना है कि ̔ एक बरसाती मौसम में छोटी छत से लगभग एक लाख लीटर पानी ज़मीन के अन्दर उतारा जा सकता है.

इसके लिये सबसे पहले ज़मीन में 3 से 5 फुट चौड़ा और 5 से 10 फुट गहरा गड्ढा बनाना होता है. छत से पानी एक पाइप के जरिए इस गड्ढे में उतारा जाता है.  खुदाई के बाद इस गड्ढे में सबसे नीचे मोटे पत्थर (कंकड़), बीच में मध्यम आकार के पत्थर (रोड़ी) और सबसे ऊपर बारीक़ रेत या बजरी डाल दी जाती है. यह विधि पानी को छानने (फिल्टर करने) की सबसे आसान विधि है. यह सिस्टम फिल्टर का काम करता है. ̓

इस तरह से भी कर सकते हैं रेन वाटर हार्वेस्टिंग

  1. सीधे ज़मीन के अन्दर- इस तरीके से बारिश के पानी को एक गड्ढे के माध्यम से सीधे ग्राउंड वाटर में मिला दिया जाता है.
  2. खाई बनाकर रिचार्जिंग- ये तरीका बड़ा पुराना है लेकिन इसके माध्यम से किसी भी बड़े संस्थान के परिसरों में बाउन्ड्री वाल के साथ-साथ बड़ी-बड़ी नालियाँ (रिचार्ज ट्रेंच) बनाकर पानी को ज़मीन के अंदर उतारा जाता है. यह पानी ज़मीन में नीचे चला जाता है और भूजल स्तर में सन्तुलन बनाए रखने में मदद करता है.
  3. कुओं में पानी उतारना- बारिश के पानी को मकानों के ऊपर की छतों से पाइप के जरिए घर के या पास के किसी कुएँ में उतारा जाता है. इस तरीके से न केवल कुआं रिचार्ज होता है, बल्कि कुएँ से पानी ज़मीन के अंदर भी चला जाता है. यह पानी भूजल स्तर को ऊपर उठाता है.
  4. ट्यूबवेल में पानी उतारना- बिल्डिंगों की छत पर बरसाती पानी को इकट्ठा करके एक पाइप के जरिए सीधे ट्यूबवेल में उतारा जाता है. इसमें छत से ट्यूबवेल को जोड़ने वाले पाइप के बीच फिल्टर लगाना आवश्यक हो जाता है. इससे ट्यूबवेल का जल हमेशा एक समान बना रहता है.
  5. टैंक में जमा करना- ग्राउंड वाटर को रिचार्ज करने के अलावा बरसाती पानी को टैंक में जमा करके अपनी रोजमर्रा की ज़रूरतों को पूरा किया जा सकता है. इस तरीके से बरसाती पानी का लम्बे समय तक उपयोग किया जा सकता है.

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