1988 road rage case victim family demand death penalty for navjot singh sidhu – और बढ़ी नवजोत सिंह सिद्धू की मुश्‍किल, पीड़ित परिवार ने कहा- मौत की सजा मिले

1988 के रोडरेज मामले में कांग्रेस नेता और पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। दरअसल पंजाब सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में सिद्धू को निर्दोष साबित किए जाने के विरोध के बाद अब पीड़ित परिवार ने सिद्धू के लिए मौत की सजा की मांग की है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 12 अप्रैल से नवजोत सिंह सिद्धू के 1988 के रोडरेज मामले पर अन्तिम सुनवाई शुरु कर दी है। जिस पर जल्द ही फैसला आने की उम्मीद है। 1988 रोडरेज मामले में मारे गए पीड़ित के पोते ने कहा है कि आरोपियों को मौत की सजा मिले। वहीं नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा इस मामले में संलिप्तता से इंकार पर पीड़ित परिवार ने कहा कि एक टीवी शो के दौरान खुद नवजोत सिंह सिद्धू ने स्वीकार किया था कि जब वह हादसा हुआ तो वह मौके पर मौजूद थे।

बता दें कि इससे पहले नवजोत सिंह सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि वह निर्दोष हैं, और उन्हें 1988 में हुए रोडरेज के मामले में बरी किया जाए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा था। अपने जवाब में पंजाब सरकार ने सिद्धू को निर्दोष ठहराए जाने का विरोध किया और उन्हें सजा दिए जाने की मांग की थी। उल्लेखनीय है कि जब यह मामला पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में चल रहा था, तब भी तत्कालीन कैप्टन अमरिंदर सरकार ने सिद्धू को सजा दिए जाने की मांग की थी। अब जब सिद्धू भाजपा छोड़कर कांग्रेस के पाले में आ चुके हैं और कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार में मंत्री हैं, तब भी अमरिंदर सरकार के फैसले में कोई अंतर नहीं आया है।

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पंजाब सरकार द्वारा सिद्धू को दोषी दिए जाने की मांग पर सिद्धू ने इसे पीठ में छुरा घोंपने जैसा करार दिया था। उल्लेखनीय है कि साल 1988 में नवजोत सिंह सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर पाल सिंह कार से कहीं जा रहे थे, इसी दौरान पटियाला में उनका एक व्यक्ति से झगड़ा हो गया, जिसमें पीड़ित व्यक्ति की मौत हो गई। इस मामले के बाद नवजोत सिंह सिद्धू और उनके दोस्त के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया था।

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