हिंदी न्यूज़ – आपराधिक कानून संशोधन बिल राज्यसभा से पारित, बच्ची से रेप पर होगी फांसी The Criminal Law (Amendment) Bill, 2018 has been passed in Rajya Sabha

क्रिमिनल ला अमेंडमेंट बिल राज्यसभा में पारित हो गया है. इससे कुछ दिनों पहले लोकसभा में ये बिल लोकसभा में पारित हुआ था. महिलाओं के खिलाफ इस बाल में अपराध पर सख्त सजा का प्रावधान है.
क्रिमिनल ला अमेंडमेंट बिल राज्यसभा में पास होने के बाद अब राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए जाएगा, जिसके बाद महिलाओं के खिलाफ अपराध के ये प्रावधान सख्त कानून बन जाएंगे.

इसी कानून की सख्त धाराओं के अंतर्गत ही महिलाओं के खिलाफ करनेवाले आरोपियों पर कार्रवाई होगी. पहले सरकार इस मुद्दे पर अध्यादेश लेकर आई थी अब इसके सख्त कानून बनने का रास्ता संसद से साफ हो गया है.

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने राज्यसभा में कहा कि फॉरेंसिक लैब हर राज्य में बनाने की कोशिश जारी है. साथ ही गृह मंत्रालय में अब महिला सुरक्षा डिवीजन बनाया गया है जो महिला से जुड़े मामलों का निपटान करेगा.उन्होंने कहा कि हमने कानून को पीड़िता के संवेदनशील बनाया है. महिलाओं की सुरक्षा और आजादी से ही देश की आजादी तय होगी. मंत्री ने सेलेक्ट कमेटी में भेजने की बजाय सदन से बिल को पारित कराने की अपील की.

उन्होंने कहा कि जो लड़कों का यौन शोषण का मामला है उसके लिए पॉक्सो जो कानून है, उस पर गंभीरता से सरकार विचार कर रही है और कैबिनेट नोट लाने वाली है. इस बिल को 2 साल 5 साल की बच्चियों के साथ होने वाले घिनौने अपराध पर फोकस किया गया है.

इस कानून में 16 साल की कम उम्र की बच्ची के साथ रेप पर 20 साल की सजा का प्रावधान है. 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ रेप पर आजीवन कारावास या फांसी की सजा का प्रावधान है. गैंगरेप के मामले में आजीवन कारावास या फिर फांसी की सजा का प्रावधान किया जाएगा.

बता दें एफआईआर दर्ज होने के 2 महीने के भीतर ऐसे मामलों की जांच पूरा करने का प्रावधान होगा. 2 महीने के भीतर जांच पूरा करना अनिवार्य होगा. ऐसे मामलों में कोई एंटीसिपेट्री बैल नहीं दिया जाएगा.

साथ ही इस बिल में बलात्कार पीड़िता महिला के कैरेक्टर पर वकील सवाल करने की मनाही होगी.

इस बिल में यह प्रावधान किया गया है कि इसका ट्रायल महिला द्वारा किया जाए और जो शिकायत जो रिकॉर्डिंग होगी वह भी महिलाएं करें.  यह प्रावधान किया गया है स्टेटमेंट रिकॉर्डिंग महिला ही करें जुडिशल मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराना होगा.

रेप के आरोपी सरकारी कर्मचारियों या पुलिसकर्मियों पर मुकदमा चलाने के लिए या गिरफ्तारी के लिए कोई इजाजत लेने की जरूरी नहीं होगी. सरकारी और निजी अस्पताल किसी की यौन शोषण महिलाएं बच्चियों के इलाज के लिए तुरंत इलाज करेगा बगैर किसी पैसे के फ्री इलाज किया जाएगा.

देशभर में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के लिए केंद्र द्वारा फंडिंग कर स्थापना किए जाने का प्रावधान किया गया है. सभी थानों में और अस्पतालों में स्पेशल फॉरेंसिक किट उपलब्ध कराया जाएगा. सभी राज्यों में फॉरेंसिक जांच केंद्र स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है.

बता दें गृह मंत्रालय में एक वुमन सेफ्टी डिविजन का गठन किया गया है जो केवल महिला सुरक्षा का ध्यान रखेगा. इस बिल को चर्चा के लिए सेलेक्ट कमेटी में भेजने की कोई जरूरत नहीं है, लोकसभा ने बहुत चर्चा कर इस बिल को पास किया है.

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