हिंदी न्यूज़ – ‘करीब-करीब वैसा ही’: प्रकाश राज को अपने रोल में देखकर करुणानिधि की क्या प्रतिक्रिया थी?-‘Almost There’: When Karunanidhi Reviewed Prakash Raj’s Performance as Kalaignar

(पूर्णिमा मुरली) 

फिल्म इरुवर के एक सीन में डीएमके के संस्थापक सीएन अन्नादुरई राजनीतिक विरोधियों द्वारा उनपर हमले के बाद वह युवा करुणानिधि से उदय होने और उनसे जुड़ने का आग्रह करते हैं.

रियल लाइफ में इस घटना के घटने के 21 साल बाद फिल्म स्क्रीन पर दिखाई दी, फिल्म का डायलॉग ‘एजुंधु वा’ चेन्नई के कावेरी अस्पताल के बाहर जमा करुणानिधि के हजारों वफादारों के लिए मंत्र बन गया जहां डीएमके प्रमुख मौत के खिलाफ जंग लड़ रहे थे. ‘वा वा थलाइवा, एजुंधु वा थलाइवा’ अर्थात ‘नेताजी वापस आइए और फिर से छा जाइए’ समर्थक दिनरात इस नारे को लगा रहे थे.

‘इरुवर’ के जरिए करुणानिधि, अन्नादुरई और एमजी रामचंद्रन के संबंधों को दर्शाया गया है. रिलीज के बाद इस फिल्म की तमिलनाडु में सभी राजनीतिक दलों ने आलोचना की थी. हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास नहीं चली लेकिन क्रिटिक्स ने फिल्म की तारीफ की थी.इस फिल्म में प्रकाश राज ने करुणानिधि का किरदार निभाया था जिनकी कलैगनार ने खुद तारीफ की.

सीएनएन न्यूज18 से बात करते हुए प्रकाश राज ने कहा, जिस शख्स का रोल मैंने निभाया उनसे मिलना एक खूबसूरत पल था. ”उनकी उम्र 70 से अधिक थी और मेरी केवल 30. काफी साल बाद मैं उनसे मिला और मैंने उन्हें पूछा: क्या मैं आपकी तरह दिखता हूं (फिल्म में) और उन्होंने उत्तर दिया ‘करीब-करीब.’

“जब मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं आपके कैरेक्टर को सही से निभाया तो उन्होंने कहा ‘करीब-करीब. वह एक राजनेता हैं और इसलिए उन्होंने दो शब्द ‘करीब-करीब वैसा ही’ (Almost There) कहा था.

प्रकाश राज ने कहा हालांकि वह करुणानिधि को राजनेता के तौर पर जानते थे लेकिन फिल्म के किरदार ने उन्हें उनकी समझ और साहित्य के लिए उनके प्रेम के बारे में जानने में मदद की. प्रकाश राज ने कहा, “मैंने देखा कि यह एक चरित्र है. मैं उनकी नकल नहीं कर रहा था. एक ऐसे व्यक्ति को देखना बुहत आकर्षक था जिसने सिस्टम को बदल दिया. जिसमें अपने निजी जीवन को जीने की हिम्मत थी और जिसने कभी धर्म की राजनीति नहीं की.”

करुणानिधि को याद करते हुए प्रकाश राज ने कहा कि फिल्म ‘कल्कि’ के लिए राज्य पुरस्कार देते वक्त कलैगनार ने फिल्म ‘इरुवर’ में उनके रोल का इशारों-इशारों में उल्लेख किया था. प्रकाश राज ने बताया कि करुणानिधि ने अवॉर्ड देते हुए कहा, “मैं तुम्हें इस अवॉर्ड को देते हुए बहुत खुश हूं (Anandamaa). तुम भी जानते हो. मैं भी जानता हूं. हम दोनों जानते हैं.”

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“इस तरह (Anandan) उन्होंने फिल्म और अवॉर्ड को एक दूसरे से जोड़ दिया. दिलचस्प रुप से जब मणिरत्नम ने फिल्म की शुरुआत की तो इसका नाम अन्नानदन (खुश व्यक्ति) रखा था.” फिल्म इरुवर में अन्नानदन एमजीआर (मोहनलाल द्वारा निभाया गया) का नाम था.

प्रकाश राज ने डीएमके प्रमुख के साथ अपनी बातचीत के बारे में भी बताया. “कनिमोझी द्वारा आयोजित चेन्नई संगम के दौरान मुझे करुणानिधि द्वारा लिखी गई पुरानानुरु को पढ़ने का मौका मिला. इसके बाद उन्होंने जो भाषण दिया वह मुझे आज भी याद है. उन्होंने कहा, ‘मैंने इसे शिवाजी के लिए लिखा था और मैं उन्हीं की आवाज में इसे सुनना पसंद करता हूं. लेकिन जब प्रकाश राज इस पढ़ते हैं तो मैं उनकी आवाज में भी इसे सुन सकता हूं.’ वह इस बात को जानने के लिए बेहद उत्सुक थे कि मैंने भाषा पर कमांड कैसे बनाई तो मैंने कहा- मैं केवल आवाज जानता हूं पर आप रचनाकार हैं.”

करुणानिधि के निधन के बाद प्रकाश राज सहित कई लोग मानते हैं कि ऐसा नेता फिर नहीं मिलेगा. “इस तरह के आदमी नहीं बने हैं. भविष्य में आप इस तरह के किसी व्यक्ति को नहीं देखेंगे. आपके उनसे मतभेद हो सकते हैं, यह ठीक है. लेकिन कुल मिलाकर वह तमिल गौरव के विजेता था, एक गरीब परिवार से निकलर उन्होंने अपनी यह पहचान बनाई.”

“बाद में पार्टी के साथ जो कुछ भी हुआ और भ्रष्टाचार के आरोप जो भी हो… लेकिन वह ऐसे नेता थे जिन्होंने अपने दम पर पार्टी को चलाया और राष्ट्रीय पार्टियों को दूर रखा और 5 दशक तक अपनी अलग पहचान बनाकर रखी.

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