हिंदी न्यूज़ – ‘मस्जिद में जाना बंद कर दिया है’: कैसे डर में जी रहे हैं कश्मीर में सुरक्षाकर्मियों के परिवार?-‘Have Stopped Going to the Mosque’: How Families of Security Men are Living in Fear in Kashmir

(आकाश हसन) 

27 जुलाई को एक स्पेशल पुलिस अधिकारी (एसपीओ) मुदस्सिर अहमद लोन घर पर अपनी बाइक की रिपेयरिंग कर रहे थे, तभी तीन आतंकवादी वहां पहुंच गए और उनका अपहरण कर लिया. अगली सुबह जब पत्रकार दक्षिण कश्मीर के त्राल क्षेत्र में लोन के घर पहुंचे तो उनकी दुखी मां ने अपहरणकर्ताओं से भावुक अपील करते हुए कहा कि उनका बेटा ‘अपनी नौकरी से इस्तीफा देने के लिए घर आया था और वह शुक्रवार की नमाज के बाद मस्जिद से इस बात की घोषणा करेगा.’

लोन की मां हरीफा बेगम उनकी तीन बेटियों और बाकी रिश्तेदारों से घिरी हुई थी. पूरा परिवार शोक में डूबा हुआ था. अपने बेटे की जिंदगी की भीख मांगते हुए उनकी मां ने कहा कि चार बच्चों में लोन उनका अकेला बेटा है. लोन की मां का यह वीडियो जल्द ही वायरल हो गया. इसी बीच अपहरणकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर लोन की तस्वीर जारी करते हुए इस बात की पुष्टि की कि उन्होंने अभी लोन की हत्या नहीं की है. सेना ने उन्हें ट्रेस करने के लिए एक ऑपरेशन लॉन्च किया.

कश्मीर मे सुरक्षाकर्मियों का अपहरण करने की शुरुआत पिछले साल मार्च से हुई. आतंकवादियों ने उस रेखा को पार कर दिया जिसे इससे पहले कभी पार नहीं किया गया था. सुरक्षाकर्मियों के घर के अंदर पहली बार युद्ध और बदले के लिए हत्या का सिलसिला शुरू हुआ. छुट्टी पर गए सुरक्षा कर्मियों का अपरहण और उनकी हत्या का ट्रेंड बढ़ने लगा.अपहृत जवानों के जिंदा लौटने की संभावना न के बराबर होती है. लगभग हर केस में अपहृत सुरक्षाकर्मी की हत्या कर दी जाती है. सारी संभावनाओं के खिलाफ हरीफा बेगम की अपील ने काम किया और लोन को आतंकवादियों ने एक दिन बाद 28 जुलाई को रिहा कर दिया गया. इस परेशान करने वाले अनुभव को भुलाने की कोशिश में लगे लोन और उनके परिवार ने इस बारे में बात करने से इनकार कर दिया.

लेकिन आतंकवादियों ने जल्द ही सिद्ध कर दिया कि लोन का केस एक अपवाद था.

ये भी पढ़ें: आखिर क्यों मचा है आर्टिकल 35A पर कोहराम? जानें पूरा मामला

एक नई हत्या

लोन को रिहा करने के कुछ घंटे बाद आतंकवादी उसी जिले में 20 मील की दूरी पर सीआरपीएफ जवान के घर में घुसे. पुलवामा के नरैना गांव की मस्जिद से रात की अजान की आवाज आ रही थी. नसीर अहमद और उनकी पत्नी नमाज पढ़ रहे थे.

“हथियार से लैस तीन लोग घर में घुसे. इनमें से दो काफी छोटे थे यहां तक कि उनकी दाढ़ी भी नहीं थी, जबकि एक के चेहरे पर घनी दाढ़ी थी. उन्होंने नसीर को लेन्स के माध्यम से उन्हें गाइड करने के लिए कहा लेकिन मैंने कहा कि वह इस रास्ते से परिचित नहीं है मुझे गाइड करने दीजिए,” नसीर की पत्नी नीलोफर ने याद करते हुए कहा.

नसीर उनके साथ गया और नीलोफर ने उनका पीछा किया. “घर से कुछ ही दूरी पर दो बंदूकधारियों ने बंदूक अपने हाथ पर उठा ली और एक ने नसीर पर तान दी. लेकिन मैं उनपर कूद गई,’ नीलोफर ने आगे कहा.

‘उन्होंने अपने बंदूक के बट से मेरी पिटाई की. मैंने उनका विरोध किया और अपने पति का हाथ पकड़ लिया. उनमें से एक ने मेरे माथे पर बंदूक रखी और एक इंच की दूरी से हवा में फायर कर दिया. उसके बाद उसने जमीन में मेरे पैर के निकट गोली चलाई,’ नीलोफर ने बताया. इसके बाद नीलोफर बेहोश हो गई और कुछ कदम की दूरी पर आतंकवादियों ने नसीर को गोली मार दी.

नसीर कश्मीर के ऐसे सातवे सैनिक हैं आतंकवादियों ने जिनको उनके घर से अपहरण करके मार दिया.

ये भी पढ़ें: OPINION: ‘शांति के प्रयासों के लिए झटका है शुजात बुखारी और औरंगजेब की हत्या’

2017 में हुई थी तीन हत्याएं

नसीर के एक पड़ोसी ने बताया कि घटना के 10 मिनट तक किसी की भी बाहर निकलने की हिम्मत नहीं हुई. नसीर का मृत शरीर खून में भीगा हुआ था. उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उनके शरीर से दस गोलियां निकाली, जिनमें से ज्यादातर गोलियां उनके सीने में मारी गई थी. उनकी पत्नी तीन महीने की गर्भवती हैं और वह अपने परिवार के अकेले कमाने वाले सदस्य थे. नसीर के भाई मुश्ताक ने बताया कि जब उसे नौकरी मिली तब हम खुश थे वह हमारे परिवार का अकेला कमाने वाला सदस्य और हमारी उम्मीद था.

पिछले 6 सालों से नसीर पुलवामा में तैनात था जो कि उसके घर से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इससे पहले वह महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में भी काम कर चुका है.

पुलवामा में सीआरपीएफ की 132वीं बटालियन में नसीर को जिस अधिकारी को रिपोर्ट करनी थी उसने घटना पर दुख जताते हुए कहा, “वह खुफिया शाखा के साथ मिलकर काम कर रहा था. यह एक व्यक्तिगत हानि है.” अधिकारी ने न्यूज18 से बात करते हुए कहा कि अपनी नसीर से अपनी आखिरी मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा था कि ट्रांसफर होने के बाद भी बातचीत करते रहना. उन्होंने कहा मैं जानता था कि वह बहुत अच्छा काम कर रहा है.

इस साल मारे गए सात सुरक्षाकर्मियों में चार पुलिस कर्मी हैं, एक सेना का जवान और नसीर सीआरपीएफ में थे. अपनी पहचान न उजागर करने की शर्त पर सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि मारे गए सभी सुरक्षा कर्मी दक्षिण कश्मीर के थे.

ये भी पढ़ें: रिपोर्ट: जम्मू-कश्मीर में खत्म होने के करीब आतंकवाद

कैसे हुई शुरुआत ?
इसकी शुरुआत 8 मार्च 2017 को आतंकवादियों के एसपी रैंक के पुलिस अधिकारी के घर में घुसने के साथ हुई. अधिकारी घर पर नहीं था इसलिए उसके परिवार को धमकी दी गई. ‘अपने बेटे को कहना या तो नौकरी छोड़ दे या फिर अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे.’

अप्रैल 2017 में पुलिस ने दक्षिण कश्मीर के अपने जवानों को अगले कुछ महीने घर न जाने की एडवाइजरी जारी की थी. आतंकवादियों द्वारा शोपियां में एक पुलिस कर्मी का घर तोड़ने के बाद ऐसा किया गया. पुलिस कर्मी पर स्थानीय मस्जिद से पुलिस से अलग होने की घोषणा करने के लिए दबाव डाला गया. इसी रात शोपियां के एक दूसरे गांव लुडूरा में आतंकवादियों ने ड्यूटी पर तैनात एक दूसरे पुलिसकर्मी के घर लूटपाट की.

2016 में हिजबुल कमाण्डर बुरहान वानी की मौत के एक महीने बाद दक्षिण कश्मीर में कई स्थानों पर लोकल पुलिस कर्मियों से प्रदर्शन में भाग लेने वालों को परेशान न करने वाले पोस्टर लगाए गए थे. दिसंबर 2016 में अलकायदा की कश्मीर विंग अंसार गजवत उल हिंद के चीफ जाकिर मूसा ने पुलिसकर्मियों के परिवारवालों को धमकाते आतंकवादियों के रिश्तेदारों को परेशान करने पर उन्हें परिणाम भुगतने की चेतावनी दी.

एक वीडियो संदेश में मूसा ने कहा, “पुलिस ने हमारे परिवारो को परेशान करके बड़ी गलती की है. यदि आप हमारे परिवारों को छूते हैं, तो हम आपके परिवारों को नहीं छोड़ेंगे. आपको लगता है कि आपके परिवार जम्मू में हैं इसलिए वे सुरक्षित हैं. यदि आपके परिवार कन्याकुमारी में हैं, तो हमारे पास वहां उन्हें मारने की क्षमता है.”

ये भी पढ़ें: बीटेक ग्रैजूएट था ख़ुर्शीद, आतंकी बनने के दो दिन बाद ही सुरक्षाबलों ने किया ढेर

इन सैनिकों की हुई हत्या

मई 2017 में आतंकवादियों द्वारा युवा कमाण्डर लेफ्टिनेंट उमर फयाज के अपहरण और हत्या की रिपोर्ट के बाद देश का ध्यान इस ओर खींचा. कुलगाम के निवासी फयाज अपने कजिन की शादी में शामिल होने के लिए शोपियां गए थे जहां से 9 मई को आतंकवादियों ने उनका अपहरण कर लिया. अगली सुबह गोलियों सो छलनी उनकी डेड बॉडी प्राप्त हुई.

सितंबर 2017 में आतंकावदी उत्तरी कश्मीर के बंदिपुरा जिले के हजिन कस्बे में बीएसफ कॉन्सटेबल मोहम्मद रमजान पैरी के घर में घुसे और पैरी को उनके घर से बाहर लाकर गोली मार दी गई.

नवंबर में क्षेत्रीय सेना के सैनिक इरफान अहमद दार अपने गांव से तीन किलोमीटर की दूरी पर मृत पाए गए. दार छुट्टी लेकर घर गए थे और शाम को अपने घर से बाहर निकले थे. पुलिस ने बताया कि आतंकवादियों ने अपहरण करके उनकी हत्या कर दी.

पिछले महीने कुलगाम जिले के मुथलहमा गांव में पुलिस कॉन्सटेबल मोहम्मद सलीम शाह को आतंकवादियों द्वारा उनके उनके घर से अपहरण कर लिया गया जबकि वह छुट्टी पर थे. अगली सुबह उनकी भी डेड बॉडी प्राप्त हुई. इससे पहले इसी महीने पुलिस कॉन्सटेबल जावेद अहमद दार का उनके घर से अपहरण करके उनकी हत्या कर दी गई थी.

इससे एक महीने पहले जून में सेना के जवान औरंगजेब का एक प्राइवेट गाडी से अपहरण कर लिया गया जबकि वह छुट्टी मनाने अपने घर जा रहे थे. उनकी डेड बॉ़डी पुलवामा से प्राप्त हुई. इसके साथ ही आतंकवादियों ने उन्हें गोली मारने से कुछ देर पहले का वीडियो भी जारी किया. वीडियो में उनसे उन मुठभेड़ों के बारे में पूछताछ की जा रही है जिन्में उन्होंने भाग लिया.

बढ़ती चिंता

न्यूज 18 से बातचीत करते हुए करते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “हम इस संबंध में सभी उपाय कर रहे हैं. इसमें शामिल लोगों को छोड़ा नहीं जाएगा उन्हें कानून का सामना करना होगा.” एक उदाहरण देते हुए सीनियर अधिकारी ने कहा, “पुलिस कॉन्सटेबल सलीम की हत्या में शामिल तीनों आतंकवादियों को सुरक्षाकर्मियों ने एक दिन बाद ही कुडवानी गांव में एनकाउंटर में मार दिया.”

नाम ने छापने की शर्त पर जम्मू कश्मीर के एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि इससे पहले आतंकवादी सुरक्षाकर्मियों के घर में घुसते थे और संपत्ति बर्बाद करते थे लेकिन अब चिंता बढ़ गई है क्योंकि आतंकावादी हमारे लड़कों की हत्या करके डर पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. सुरक्षाकर्मी जब छुट्टी पर होते हैं तो उन्हें स्थानीय पुलिस के संपर्क में रहने के लिए कहा गया है. अगर वे किसी भी खतरनाक स्थिति में हैं तो तुरंत पुलिस से संपर्क करें.

‘हम सभ को सुरक्षा नहीं दे सकते. लेकिन हम अपने स्थानीय सुरक्षा कर्मियों को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न रणनीतियों को तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं,’ अधिकारी ने कहा.

आगे बढ़ सकती है मुश्किल

दक्षिण कश्मीर के अब्दुल हामिद (बदला गया नाम) अपनी भतीजी की शादी में शामिल नहीं हो सके. वे अपने परिवार को दक्षिण कश्मीर से श्रीनगर लेकर गए हैं. उन्होंने अपने बच्चों का एडमिशन भी यहीं करा लिया है. जम्मू कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप में शामिल हामिद ने कहा, “स्थिति खराब है. मैंने अपना घर छोड़ दिया. मैं गांव में अपने माता-पिता से मिलने भी दिन में जाता हूं.”

हामिद ऐसे अकेले सुरक्षा कर्मी नहीं हैं, परेशानी से बचने के लिए कई पुलिस कर्मी अपने परिवारों को लेकर जम्मू चले गए हैं. पुलिस अधिकारियों ने इस बात का खुलासा नहीं किया है कि कितने पुलिस कर्मियों ने पिछले कुछ दिनों में अपना घर बदला है. हालांकि गुमनाम रहने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि पिछले कुछ सालों में यह संख्या सर्वाधिक है.

2016 में जब बुरहान वानी को मारा गया था तब कुछ लोगों ने सुरक्षा कर्मियों के घर में आग लगा दी थी. दक्षिण कश्मीर में स्थिति विशेष रुप से खराब है.

अपनी परेशानी बताते हुए एक अन्य पुलिस कर्मी ने कहा, “हम पूरी तरह डर के साए में रहने के लिए मजबूर हैं. मैं जब घर पर होता हूं तब मैंने मस्जिद जाना भी छोड़ दिया है. क्या पता आतंकवादियों को सूचना देने वाले मुझे देखें और उन्हें सूचना दे दें.”

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *