हिंदी न्यूज़ – लेट होने पर तेज रफ्तार से ट्रेन चला सकेंगे चालक-Trains are allowed to run maximum permissible speed in late situation

लेट होने पर तेज रफ्तार से ट्रेन चला सकेंगे चालक

सांकेतिक तस्वीर

भाषा

Updated: August 12, 2018, 5:41 PM IST

रेल मंत्रालय ने चालकों से देरी की स्थिति में समय की भरपाई के लिए अधिकतम अनुमति वाली गति से ट्रेन चलाने को कहा है. नये दिशा-निर्देश साल 2000 में जारी एक आदेश का स्थान लेंगे, जिसमें कहा गया था कि समय पर होने के बावजूद ट्रेनों को अधिकतम अनुमत गति (एमपीएस) से चलाया जाएगा.

सूत्र के मुताबिक यह पाया गया कि ओवर स्पिडिंग की डर से लोको पायलट एमपीएस पर ट्रेन चलाने से बचते हैं और इसी वजह से रेलगाड़ियां लेट हो जाती हैं. गौरतलब है कि स्वीकृत गति से अधिक पर ट्रेन चलाने पर दंड का प्रावधान है.

इस 15 अगस्त को जारी की जाने वाली नयी समय सारणी में 110 किलोमीटर प्रति घंटे की एमपीएस वाली ट्रेनों की नियत गति या बुक्ड गति 105 किलोमीटर प्रति घंटे और 120 किलोमीटर प्रति घंटे की एमपीएस वाली रेलगाड़ियों की बुक्ड गति 115 किलोमीटर प्रति घंटे होगी.

मेल एवं एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए स्वीकृत गति सीमा 110 किलोमीटर प्रति घंटा है लेकिन वे औसतन 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं. राजधानी और शताब्दी जैसी ट्रेनों के लिए अधिकतम अनुमत गति सीमा 130 किलोमीटर प्रति घंटा है जबकि वे औसतन 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ती हैं.सूत्र ने बतसाया कि इस साल 30 प्रतिशत ट्रेनें देरी से चल रही हैं. रेलवे ने फैसला किया है कि ड्राइवर तय गति तक ट्रेन को चला सकते हैं लेकिन ऐसा देरी होने पर ही कर सकते हैं. एक लोको पायलट ने बताया, ‘हम चाहते हैं कि ट्रेन को अधिकतम तय स्‍पीड पर चला सके लेकिन ड्राइवरों में धीमे चलाने की आदत पड़ गई है ताकि ज्‍यादा तेज चलाने पर जुर्माना नहीं भरना पड़े.’

लोको पायलट ने आगे बताया, ‘अब जब न्‍यूनतम गति तय कर दी गई है तो ड्राइवर 105 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रेन चला सकते हैं. साथ ही उनके पास अब अधिकतम गति तक जाने की सुविधा भी है जिससे कि लेट होने पर समय की भरपाई की जा सके. इस आदेश का मतलब यह भी है कि अब हम पर हर समय अधिकतम गति से चलाने का दबाव नहीं होगा.’

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