हिंदी न्यूज़ – हापुड़: मॉब लिंचिंग से जुड़ी याचिका पर हुई सुनवाई, IG पुलिस और राज्य सरकार से SC ने मांगा जवाब-Hapur lynching case: Supreme Court asks Meerut Inspector General of police to submit a report

हापुड़ लिंचिंग केस: SC ने IG पुलिस मेरठ को दिए गवाहों की सुरक्षा के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट

भाषा

Updated: August 13, 2018, 1:01 PM IST

हापुड़ में मॉब लिंचिंग की घटना में दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार से जवाब मांगा है. कोर्ट ने पुलिस के खिलाफ लगाए गए संगीन आरोपों पर भी आईजी पुलिस, मेरठ से दो हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है. अब इस मामले में अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी. अदालत ने कहा है कि अगर पीड़ित को उसकी सुरक्षा के संबंध में कुछ आशंका लगती है तो वह इस संबंध में पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर सकता है. अदालत ने IG पुलिस को मामले में गवाहों की सुरक्षा के निर्देश भी दिए हैं.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट पिछले महीने उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में मॉब लिंचिंग में जीवित बचे एक व्यक्ति की याचिका पर सोमवार को सुनवाई के लिये सहमत हो गया था. कथित रूप से गौवध के शक में कुछ लोगों के हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी.

इस हमले में जीवित बचे समीउद्दीन ने हापुड़ घटना की अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल से जांच कराने और आरोपियों की जमानत रद्द करने का अनुरोध किया है. इसके अलावा उन्होंने इस मामले की सुनवाई उत्तर प्रदेश से बाहर कराने का अनुरोध भी किया है. उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस घटना को रोड रेज का मामला बताया है जबकि इसमे 45 वर्षीय मांस कारोबारी कासिम कुरैशी मारा गया था.

यह भी पढ़ें: अप्वॉइंटमेंट के 7 साल बाद UP के 14 जजों को मिला कोर्ट रूम और कामआरोप है कि 64 वर्षीय समीउद्दीन और कासिम कुरैशी की 18 जुलाई को उप्र के हापुड़ में कुछ व्यक्तियों के समूह ने उन दोनों के कथित गौ वध में शामिल होने के संदेह में कथित रूप से पिटाई की थी. इस पिटाई में दोनों बुरी तरह जख्मी हो गये थे और कुरैशी की बाद में मृत्यु हो गयी.

इस याचिका में समीउद्दीन ने आरोपी युधिष्ठिर सिंह सिसोदिया की जमानत रद्द करने और इस मामले को सुनवाई के लिये उप्र से बाहर स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने इस घटना के संबंध में हल्की धाराओं के तहत रोड रेज का मामला दर्ज किया है. याचिका में इसे रोडरेज का नहीं बल्कि मॉब लिंचिंग की घटना बताया गया है और इस तर्क के समर्थन में सोशल मीडिया पर सामने आए एक मिनट के वीडियो का भी जिक्र किया गया है. (एजेंसी इनपुट के साथ)

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