हिंदी न्यूज़ – देश हम सबका है केवल सरकार का नहीं, राष्ट्रपति के संबोधन की 5 बड़ी बातें-The country is all about us, not just the government, the 5 big things of the President’s Speech

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश की जनता को संबोधित किया. देश को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए राष्ट्रपति ने भारत को यहां रहने वाले हर नागरिक का देश बताया. उन्होंने कहा कि देश केवल सरकार का नहीं है. राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रनिर्माण में देश के हर नागरिक की भूमिका है. उन्होंने अपने संबोधन में स्वतंत्रता सैनानियों के बलिदान को याद किया तो पिछले वर्षों में देश ने जो प्रगति की है उसको भी देशवासियों के सामने रखा. राष्ट्रपति के संबोधन की पांच बड़ी बातें आपको बताते हैं:

देश हम सबका है, केवल सरकार का नहीं 

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि भारत देश ‘हम सब भारत के लोगों’ का है न कि केवल सरकार का. उन्होंने कहा कि एकजुट होकर हम ‘भारत के लोग’ अपने देश के हर नागरिक की मदद कर सकते हैं. एकजुट होकर हम अपने वनों और प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण कर सकते हैं. हम अपने ग्रामीण और शहरी पर्यावास को नया जीवन दे सकते हैं. हम सब गरीबी, अशिक्षा और असमानता को दूर कर सकते हैं. हम सब मिलकर ये सभी काम कर सकते हैं. यद्यपि इसमें सरकार की प्रमुख भूमिका होती है, परंतु एकमात्र भूमिका नहीं. आइए, हम अपने प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार के कार्यक्रमों और परियोजनाओं का पूरा-पूरा उपयोग करें. आइए देश के काम को अपना काम समझें.

महिलाओं की आजादी से है देश की आजादी राष्ट्रपति ने कहा कि समाज में महिलाओं की विशेष भूमिका है. उन्होंने कहा कि महिलाओं की आजादी को व्यापक बनाने में ही देश की आज़ादी की सार्थकता है. राष्ट्रपति ने कहा, “यह सार्थकता, घरों में माताओं, बहनों और बेटियों के रूप में तथा घर से बाहर अपने निर्णयों के अनुसार जीवन जीने की उनकी स्वतन्त्रता में देखी जा सकती है. उन्हें अपने ढंग से जीने का तथा अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग करने का सुरक्षित वातावरण तथा अवसर मिलना ही चाहिए. महिलाएं अपनी क्षमता का उपयोग चाहे घर की प्रगति में करें, या फिर हमारे वर्क फोर्स या उच्च शिक्षा-संस्थानों में महत्वपूर्ण योगदान देकर करें, उन्हें अपने विकल्प चुनने की पूरी आजादी होनी चाहिए. एक राष्ट्र और समाज के रूप में हमें यह सुनिश्‍चित करना है कि महिलाओं को जीवन में आगे बढ़ने के सभी अधिकार और क्षमताएं सुलभ हों. जब हम महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे उद्यमों या स्टार्ट-अप के लिए आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराते हैं, करोड़ों घरों में एलपीजी कनेक्शन पहुंचाते हैं, और इस प्रकार महिलाओं का सशक्तीकरण करते हैं, तब हम अपने स्वाधीनता सेनानियों के सपनों का भारत बनाते हैं.”

ध्यान भटकाने वाले मुद्दों में न उलझें

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि आज हम अपने इतिहास के एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जो अपने आप में बहुत अलग है. उन्होंने कहा, “आज हम कई ऐसे लक्ष्यों के काफी करीब हैं, जिनके लिए हम वर्षों से प्रयास करते आ रहे हैं. सबके लिए बिजली, खुले में शौच से मुक्ति, सभी बेघरों को घर और अति-निर्धनता को दूर करने के लक्ष्य अब हमारी पहुंच में हैं. आज हम एक निर्णायक दौर से गुजर रहे हैं. ऐसे में हमें इस बात पर जोर देना है कि हम ध्यान भटकाने वाले मुद्दों में न उलझें और ना ही निरर्थक विवादों में पड़कर अपने लक्ष्यों से हटें. आज जो निर्णय हम ले रहे हैं, जो बुनियाद हम डाल रहे हैं, जो परियोजनाएं हम शुरू कर रहे हैं, जो सामाजिक और आर्थिक पहल हम कर रहे हैं, उन्हीं से यह तय होगा कि हमारा देश कहां तक पहुंचा है. हमारे देश में बदलाव और विकास तेजी से हो रहा है और इस की सराहना भी हो रही है.”

हिंसा की अपेक्षा अहिंसा की शक्ति कहीं अधिक

अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने देशवासियों को अहिंसा का संदेश भी दिया. उन्होंने कहा कि गांधीजी का महानतम संदेश यही था कि हिंसा की अपेक्षा अहिंसा की शक्ति कहीं अधिक है. प्रहार करने की अपेक्षा, संयम बरतना, कहीं अधिक सराहनीय है तथा हमारे समाज में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है. राष्ट्रपति ने कहा, “गांधी ने अहिंसा का यह अमोघ अस्त्र हमें प्रदान किया है. इस स्वाधीनता दिवस के अवसर पर हम सब भारतवासी अपने दिन-प्रतिदिन के आचरण में गांधीजी द्वारा सुझाए गए रास्तों पर चलने का संकल्प लें. हमारी स्वाधीनता का उत्सव मनाने का इससे बेहतर कोई और तरीका नहीं हो सकता.”

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने देश की युवाशक्ति की जमकर सराहना कि उन्होंने कहा कि आज के युवाओं में आदर्शवाद और उत्साह देखकर उन्हें संतोष का अनुभव होता है. उन्होंने कहा कि युवाओं में अपने लिए, अपने परिवार के लिए, समाज के लिए और अपने देश के लिए कुछ-न-कुछ हासिल करने की भावना दिखाई देती है. इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा के उद्देश्य पर भी बल दिया. राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री या डिप्लोमा प्राप्त कर लेना ही नहीं है, बल्कि सभी के जीवन को बेहतर बनाने की भावना को जगाना भी है.

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