हिंदी न्यूज़ – आजादी का 72वां साल: शहीद घोषित नहीं हो सके भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु! independence day martyr status of Bhagat Singh sukhdev rajguru

जनता भले ही महान क्रांतिकारी भगत सिंह को शहीद-ए-आजम का दर्जा देती है, लेकिन सरकार उन्‍हें दस्‍तावेजों में शहीद नहीं मानती. आज राष्ट्र 72वां स्वतंत्रता दिवस समारोह मना रहा है लेकिन भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को शहीद का दर्जा नहीं मिल सका है. आजादी से अब तक जितनी भी सरकारें आईं, वो इन क्रांतिकारियों को शहीद घोषित करने से बचती रहीं. इसलिए अब यह मामला पहले प्रधानमंत्री दरबार और फिर अदालत में जाने वाला है. भगत सिंह के प्रपौत्र यादवेंद्र सिंह संधू ने कहा है कि वे शहीदों पर सरकारों के रवैये से हैरान हैं.

संधू ने सवाल किया “सरकारें भगत सिंह को शहीद घोषित करने से आखिर डरती क्‍यों हैं? इसके लिए कई  नेताओं से सिफारिश की गई लेकिन देश के हीरो के लिए कोई आगे नहीं आया. इसलिए अब शहीद भगत सिंह ब्रिगेड की ओर से इसके लिए कोर्ट में याचिका दायर करेंगे. संबंधित दस्‍तावेज जुटा लिए गए हैं.”

अंग्रेजों ने 23 मार्च 1931 को लाहौर सेंट्रल जेल में भगत सिंह को फांसी दे दी थी. उस वक्‍त उनकी उम्र महज 23 साल थी. वह देश की आजादी के लिए ब्रिटिश सरकार से लड़ रहे थे. लेकिन देश की आजादी के सात दशक बाद भी सरकार उन्‍हें दस्‍तावेजों में शहीद नहीं मान रही. इसका खुलासा अप्रैल 2013 में गृह मंत्रालय में डाली गई आरटीआई के जवाब में हुआ है.

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सितंबर 2016 में इसी मांग को लेकर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के वंशज जलियावाला बाग से इंडिया गेट तक शहीद सम्‍मान जागृति यात्रा निकाल चुके हैं. संबंधित दस्‍तावेजों के साथ तीन बार गृह राज्‍य मंत्री हंसराज अहीर से मिल चुके हैं. अहीर खुद संस्‍कृति मंत्रालय से इस बारे में बातचीत कर रहे हैं.  लेकिन अब तक नतीजा नहीं निकला. जब हमने इस बारे में अहीर के निजी सचिव डॉ. राजेश से बात की तो उन्होंने कहा “संस्कृति मंत्रालय को पत्र लिखा गया है.”

संसद में माना, आरटीआई में क्यों नहीं?

जब मामला मीडिया की सुर्खियां बना तो तत्‍कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को सफाई देनी पड़ी. राज्‍यसभा सांसद केसी त्‍यागी ने 19 अगस्‍त 2013 को सदन में यह मुद्दा उठाया. उन्‍होंने कहा कि गृह मंत्रालय के जो लेख और अभिलेख हैं उनमें भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को शहीद का दर्जा देने का काम नहीं हुआ.

इस पर कुसुम राय, जय प्रकाश नारायण सिंह, राम विलास पासवान, राम गोपाल यादव, शिवानंद तिवारी, अजय संचेती, सतीश मिश्र और नरेश गुजराल सहित कई सदस्‍यों ने त्‍यागी का समर्थन किया था. वर्तमान उप राष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू ने तब बीजेपी नेता के रूप में कहा था कि ‘सरकार को इसे बहुत गंभीरता से लेना चाहिए. वह यह देखे कि भगत सिंह का नाम शहीदों की सूची में सम्‍मलित किया जाए. वे जिस सम्‍मान और महत्‍व के हकदार हैं उन्‍हें प्रदान किया जाए. क्‍योंकि वे स्‍वतंत्रता सेनानियों के नायक थे. देश के युवा उनसे प्रेरित होते हैं’.

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तब के संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा था कि ‘सरकार उन्हें बाकायदा शहीद मानती है और अगर सरकारी रिकार्ड में ऐसा नहीं है तो इसे सुधारा जाएगा. सरकार पूरी तरह से उन्‍हें शहीद मानती है और शहीद का दर्जा देती है’. लेकिन ताज्‍जुब यह है अब तक सरकार ने इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है. सरकार ने रिकॉर्ड नहीं सुधारा.

इसके बावजूद आरटीआई में नहीं माना शहीद

सरकार की ओर से रिकॉर्ड सुधारने के आश्वासन के तीन साल बाद पुराने सवालों के साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय में आरटीआई डाली गई. अक्‍टूबर 2016 में फिर वही जवाब आया. पीएमओ ने आरटीआई गृह मंत्रालय को रेफर कर दी. गृह मंत्रालय ने कहा कि इस बारे में उसके पास कोई रिकार्ड नहीं है.

हालांकि इसी साल जून में दिल्ली के कांस्टीट्यूशनल में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भगत सिंह की जेल डायरी के विमोचन अवसर पर 2013 में राज्यसभा में उठे इस मामले का जिक्र करते हुए कहा “जिस दिन आरटीआई की बात आई थी कि भगत सिंह शहीद नहीं हैं, उस दिन संसद में विपक्ष के एक नेता ने सवाल उठाया था. वेंकैया जी ने मेरी तरफ देखा, मैं खड़ा हुआ और कहा कि सरकार से प्रतिकार करता हूं कि आरटीआई की सूचना गलत दी गई है. शहीद भगत सिंह को किसी आरटीआई के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं. वो शहीद थे, हैं और रहेंगे.”

फिर क्या कहा भगत सिंह के वंशज ने?

भगत सिंह को तो जनता शहीद मानती है फिर सरकारी रिकॉर्ड की क्या जरूरत? इस सवाल के जवाब में संधू कहते हैं “भगत सिंह को शहीद घोषित कर दिया जाता तो कोई भी किताबों में उन्‍हें क्रांतिकारी आतंकी लिखने की हिम्‍मत नहीं करता’. पाकिस्‍तान में भी भगत सिंह को न्‍याय दिलाने के लिए वहां के लोगों ने कोर्ट में ही केस डाला हुआ है.

संधू के मुताबिक वह इस मामले को लेकर भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी, बीजेपी के राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष विनय विनय सहस्त्रबुद्धे से मिल चुके हैं. सहस्त्रबुद्धे गृह मंत्री को पत्र भी लिख चुके हैं.

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क्या शहीद घोषित करने में कोई तकनीकी दिक्‍कत है?

इतिहासकार अली अख्‍तर के मुताबिक “देश का बच्‍चा-बच्‍चा जानता है कि भगत सिंह ने देश के लिए अपनी जान दे दी, फिर सरकार को शहीद घोषित करने में क्‍या दिक्‍कत हो सकती है. दरअसल सरकार को भगत सिंह से कोई सियासी फायदा नहीं होता इसलिए वह इस बारे में जज्‍बा भी नहीं दिखाती. सरकार जब चाहे तब भगत सिंह को दस्‍तावेजों में शहीद घोषित कर सकती है, इसमें कोई तकनीकी दिक्‍कत नहीं है. भगत सिंह अंग्रेजों के लिए क्रांतिकारी आतंकी थे, हमारे लिए वह शहीद हैं.

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