हिंदी न्यूज़ – क्या वाजपेयी की पाकिस्तान यात्रा को संघ का समर्थन था?was former prime minister Atal Bihari vajpayee’s pakistan visit supported by Sangh?

क्या वाजपेयी की पाकिस्तान यात्रा को संघ का समर्थन था?

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ के साथ अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल फोटो)

ओम प्रकाश

ओम प्रकाश

| News18Hindi

Updated: August 16, 2018, 2:17 PM IST

साल 1999 की लाहौर बस यात्रा अटल बिहारी वाजपेयी के सियासी जीवन का बड़ा फैसला था. उनकी पाकिस्तान यात्रा की भाजपा के ही कुछ नेताओं ने आलोचना की थी, लेकिन वह बस पर सवार होकर लाहौर पहुंचे. सवाल ये उठता है कि क्या वाजपेयी की इस यात्रा को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का समर्थन था?

वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी अपनी किताब ‘हार नहीं मानूंगा’ में वाजपेयी के सहयोगी रहे सुधींद्र कुलकर्णी के हवाले से लिखा है ‘जो लोग संघ परिवार को पाकिस्तान के खिलाफ मानते हैं उनके लिए यह जानना जरूरी है कि वाजपेयी की इस यात्रा को उस वक्त के संघ प्रमुख राजेंद्र सिंह उर्फ रज्जू भैया का समर्थन प्राप्त था. तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे भी वाजपेयी की इस यात्रा पर बधाई देने के लिए बाघा बॉर्डर पहुंचे थे.’

त्रिवेदी लिखते हैं ‘कुछ बातें हैं जो वाजपेयी को संघ परिवार और बीजेपी-जनसंघ के कट्टरपंथियों से तो अलग खड़ा करती ही हैं, उन्हें दुनिया भर में लोकप्रिय भी बनाती हैं. इसमें सबसे अहम बात है वाजपेयी का पाकिस्तान को लेकर रवैया. अखंड भारत के नारे को लेकर चलने वाली पार्टी में पाकिस्तान के साथ दोस्ती के लिए हाथ बढ़ाना मुश्किल काम है.” त्रिवेदी लिखते हैं ” प्रधानमंत्री बनने के बाद 1999 में जब वाजपेयी पाकिस्तान गए तो बहुत से लोग इस बात की आलोचना कर रहे थे कि वे इतनी जल्दी पाकिस्तान क्यों गए? वाजपेयी अपने प्रिसंपल सेक्रेटरी ब्रजेश मिश्र पर भरोसा करते थे. मिश्र का मानना था कि वाजपेयी को पाकिस्तान जाना चाहिए क्योंकि परमाणु परीक्षण के बाद बने माहौल की कड़वाहट को कम करना दोनों देशों के हित में था.’

खैर, वाजपेयी बस में सवार होकर लाहौर पहुंचे. वाजपेयी की इस राजनयिक सफलता को भारत-पाक संबंधों में एक नए युग की शुरुआत माना गया. लेकिन पाकिस्तानी फौज ने गुपचुप अभियान के जरिए अपने सैनिकों की करगिल में घुसपैठ करा दी. हालांकि इस संघर्ष में पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी. वाजपेयी ने करगिल युद्ध का डटकर मुकाबला किया और पाकिस्तान को धूल चटायी.वाजपेयी पाकिस्तान से भारत के रिश्ते बेहतर रखना चाहते थे. उनकी एक कविता यही कहती है- भारत-पाकिस्तान पड़ोसी, साथ-साथ रहना है/प्यार करें या वार करें, दोनों को ही सहना है…!

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