हिंदी न्यूज़ – know about Atal bihari vajpayee daughter and son in law,

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी शादीशुदा नहीं थे. लेकिन वो खुद कहते थे कि मैं बारात नहीं चढ़ा तो इसका मतलब ये भी नहीं कि मैं जीवनभर कुंवारा रहा. अटलजी ने 70 के दशक में नमिता कौल को अपनी दत्तक पुत्री के रूप में स्वीकार किया था. जब अटल का निधन हुआ तो आधिकारिक तौर पर तमाम लोग अटल की इस बेटी को ही संबोधित करके अपने शोक संदेश भेज रहे हैं,

नमिता उम्र के पांचवें दशक में हैं. वर्ष 1983 में जब नमिता की शादी हुई तो वो उनके दत्तक पिता अटल की रजामंदी के बाद ही. असल में नमिता के माता और पिता राजकुमारी कौल और ब्रिज नारायण कौल हैं. लेकिन 70 के दशक में जब नमिता युवा थीं, तभी अटल ने उन्हें आधिकारिक तौर पर दत्तक पुत्री के रूप में अपनाने का फैसला किया. कौल परिवार एक तरह से अटल का अपना ही परिवार बन चुका था.

राजकुमारी कौल ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज में अटलजी के साथ ही पढ़ती थीं. बाद में उनकी शादी ब्रिज नारायण से हुई, जो दिल्ली के रामजस कॉलेज में प्रोफेसर थे. अटल दिल्ली आने के बाद फिर परिवार के संपर्क में आए. धीरे धीरे ये उनका अपना ही परिवार बन गया. राजकुमारी कौल को लोग अटल की संगिनी और पहले प्यार के तौर पर देखते रहे हैं. हालांकि जो भी राजकुमारी कौल से मिला, वो उनकी सादगी और स्नेहपूर्ण व्यवहार से अभिभूत रह गया.

नमिता और रंजन की दोस्ती जो प्यार में बदलीराजकुमारी कौल की दो बेटियां थीं. बड़ी नमिता और छोटी नम्रता. नम्रता डॉक्टर हैं और लंबे समय से अमेरिका में रह रही हैं. ब्रिज नारायण के निधन के बाद अटल ही कौल परिवार के संरक्षक और अभिभावक बन गए. 70 के दशक में नमिता ने दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कामर्स में एडमिशन लिया. यहीं से वो ग्रेजुएट हुईं. इसी कॉलेज में उनकी दोस्ती रंजन भट्टाचार्य से हुई, जो इकोनॉमिक्स आनर्स में थे. दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई. बताया जाता है कि वर्ष 1976 से ये अफेयर 1983 तक चलता रहा.

अटलजी की बेटी नमिता कौल भट्टाचार्य

दामाद को पसंद करते थे अटल
उन दिनों रंजन का नमिता के परिवार में आना-जाना सामान्य हो गया था. रंजन की मुलाकातें अटलजी से अक्सर होती रहती थीं. अटलजी उन्हें पसंद करते थे. हालांकि लंबे समय तक वो उनका नाम भूल जाते थे. ये बात रंजन ने बाद में खुद एक इंटरव्यू में कही. दोनों की शादी 1983 में दिल्ली से ही अटल की रजामंदी के बाद ही हुई.

लोप्रोफाइनल में रहती हैं नमिता
नमिता ने कॉलेज की पढाई पूरी करने के बाद कुछ समय तक टीचिंग की लेकिन बाद में इसे छोड़ दिया. वो आमतौर पर लोप्रोफाइल रहती हैं. उनकी एक बेटी है, जिसका नाम निहारिका है. निहारिका के साथ अटल काफी समय गुजारते थे. वो अब 23 साल की हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं.

अटलजी के दामाद रंजन भट्टाचार्या

दामाद को अटल ने क्या बनाया था
रंजन का बचपन शिमला और दिल्ली में बीता. उनका होमटाउन पटना है. जहां बताया जाता है कि उनकी काफी बड़ी पैतृक जमीन भी थी. पांच फुट नौ इंच के रंजन वो शख्स भी हैं, जब अटल की सरकार पहली बार 13 दिनों के लिए बनी, तब जिन चुनिंदा लोगों की नियुक्ति प्रधानमंत्री के तौर पर उन्होंने की थी. उसमें रंजन भी थे. रंजन को पीएमओ में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी नियुक्त किया गया था. इस पर सियासी विवाद भी हुआ था. बाद में अटल जब प्रधानमंत्री के रूप में विदेशी दौरों में गए तो उनके साथ कई दौरों में रंजन और नमिता भी शामिल होते थे. कई बार ये चर्चाएं भी उड़ीं कि अटल उन्हें बातचीत के लिए जयललिता और चंद्रबाबु नायडु के पास भेजते थे. हालांकि इसका हमेशा खंडन भी हुआ.

नौकरी छोड़कर अपना बिजनेस शुरू किया 
रंजन सभ्रांत बंगाली ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते हैं. 22 साल की उम्र में उनके पिता गुजर गए और इसके तीन साल बाद मां. उनके भाई विदेश में बस चुके हैं. रंजन श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद ओबराय स्कूल ऑफ होटल मैनेजमेंट से डिप्लोमा लिया. महज 24 साल की उम्र में वो ओबराय होटल श्रीनगर में जनरल मैनेजर बन गए. हालांकि वर्ष 1987 में उन्होंने ये नौकरी छोड़ दी. फिर उन्होंने मनाली में अपना रेसोर्ट्स शुरू किया. कुछ साल बाद इसको बेच भी दिया.

नमिता और रंजन

कार्लसन हास्पिलिटी ग्रुप के साथ भागीदारी
1997 में उन्होंने अमेरिका कार्लसन हास्पिलिटी ग्रुप के साथ मिलकर देश में संयुक्त उपक्रम शुरू किया. कार्लसन ग्रुप के देश के कई बड़े होटलों में शेयर हैं, जिसमें रेडिसन ब्लू, रेडिसन, पार्क प्लाजा, पार्क इनन में बड़ी हिस्सेदारी है. पिछले दिनों ये खबरें भी आईं थीं कार्लसन इस संयुक्त उपक्रम में रंजन भट्टाचार्य के शेयर खरीद सकता है.

क्या आरोप लगते रहे हैं
बहरहाल रंजन आमतौर पर सियासी जगत में इंडस्ट्रियलिस्ट लॉबिंग के लिए जाने जाते रहे हैं. माना जाता है कि वो अब हजारों करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं. ग्रेटर कैलाश में उनका शानदार ऑफिस है. वो अच्छी जिंदगी जीते हैं. जब अटल प्रधानमंत्री थे तब उन पर अक्सर तमाम डील्स में शामिल होने के आरोप भी लगते रहते थे. जब भी ये बातें रंजन से मीडिया ने पूछीं तो उन्होंने हंसते हुए कहा, मेरे खिलाफ तो ये आरोप भी लिये जाते हैं. वैसे उन्होंने हमेशा इन बातों का खंडन किया. वर्ष 2012 में अरविंद केजरीवाल ने सरकारी दामाद कहते हुए उन पर सीधा हमला भी किया था.

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