हिंदी न्यूज़ – हज जाना चाहते हैं तो जान लीजिये यात्रा में किस जगह कितना खर्च आता है? । How much money you have to expend for going for Hajj as per new rules

हज पर जाने की ख्वाहिश हर धार्मिक मुसलमान की होती है. इस्लाम के पांच आधारों में हज भी एक है. तो धार्मिक मुसलमान के लिए जीवन में एक बार हज करना जरूरी भी है. इस साल भारत से हज पर जाने वाले लोगों को कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. इसका कारण बढ़े खर्च भी हैं और बदले नियम भी. दरअसल सऊदी सरकार भारत को मुसलमानों की आबादी के अनुपात में एक निर्धारित कोटा देती हैं जिसे केंद्र सरकार, राज्यों के लिए आगे बढ़ा देती है. आमतौर पर ये काम सेंट्रल हज कमेटी, मुंबई के जरिए संबंधित राज्य की स्टेट हज कमेटी करती है. पिछले साल तक केंद्र सरकार भारतीय मुसलमानों को हज यात्रा पर सब्सिडी देती थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इस साल से इसे खत्म कर दिया है.

वैसे भी ये सब्सिडी हज कमेटी के जरिए हज करने वाले यात्रियों को ही मिलती थी. बाकी जो प्राइवेट टूर सर्विस के जरिए जाते हैं उन्हें किसी तरह की सब्सिडी नहीं दी जाती थी. भारत सरकार का सिविल एविएशन मंत्रालय हज कमेटी ऑफ इंडिया के जरिए ये सब्सिडी मुहैया कराता था. ये पैसा हज यात्रियों के बजाय एयर इंडिया को सीधे दिया जाता था. भारत में हज सब्सिडी लगभग 650 करोड़ रुपये थी. ये आमतौर पर सऊदी अरब जाने के लिए हवाई किराये के रूप में दी जाती थी. मुसलमानों का यही मानना है कि सब्सिडी एयरलाइन्स को दी जा रही हैं न कि उनको.

खत्म हो चुकी है हज के लिए दी जाने वाली सब्सिडी
कई मुस्लिम नेताओं ने हज के लिए दी जाने वाली सब्सिडी का विरोध भी किया था और प्रमुख मुस्लिम नेताओं में से एक असदुद्दीन ओवैसी ने तो यह भी कहा था कि इस प्रक्रिया को बंद करना चाहिए. साथ ही इसके लिए आवंटिंत पैसे को मुस्लिम समुदाय की गरीब बच्चियों की पढ़ाई में खर्च किया जाना चाहिए. उनका यह भी कहना था कि सरकारी सब्सिडी के बाद उनका टिकट खर्च औसतन 18 हजार प्रति व्यक्ति पड़ता है. जो कि सब्सिडी खत्म होने पर 25 से 28 हजार प्रति व्यक्ति हो जायेगा. इतना खर्च भी हज पर जाने वाले वहन कर सकते हैं.बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा हज यात्रा के लिए दी जाने वाली सब्सिडी की आलोचना की थी और इसे खत्म करने को कहा था. कोर्ट ने इसे 10 साल की समय-सीमा में धीरे-धीरे खत्म करने का आदेश दिया था. 2006 से ही विदेश मंत्रालय और परिवहन और पर्यटन पर बनी एक संसदीय समिति ने हज सब्सिडी को एक समय सीमा के भीतर खत्म करने के सुझाव दिए थे. अगले पांच साल के लिए हज नीति तय करने के लिए बनी उच्चस्तरीय कमेटी कमेटी ने भी सब्सिडी को खत्म करने की वकालत की थी, जिसे जनवरी में मंजूरी दे दी गई.

हज कोऑर्डिनेटर, असिस्टेंट हज ऑफिसर, हज असिस्टेंट के प्रशिक्षण शिविर कार्यक्रम में नकवी के बताए आंकड़ों के हिसाब से 2017 में 1 लाख 24 हजार 852 हजयात्रियों के लिए 1030 करोड़ रुपये एयरलाइन्स कंपनियों को हवाई किराये के रूप में दिए गए थे जबकि 2018 में हज कमेटी के माध्यम से जाने वाले 1 लाख 28 हजार 702 हजयात्रियों के लिए 973 करोड रूपए दिए जाएंगे, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 57 करोड़ रूपए कम है.

बिना मेहरम के जा रही हैं महिलाएं
साथ ही इस साल हज के लिए कुल 3 लाख 55 हजार 604 आवेदन प्राप्त हुए. जिनमें 1 लाख 89 हजार 217 पुरुष और 1 लाख 66 हजार 387 महिलाएं शामिल हैं. भारत से पहली बार मुस्लिम महिलाएं बिना ‘मेहरम’ (पुरुष रिश्तेदार) के हज पर जा रही हैं. बिना “मेहरम” के हज पर 1308 महिलाएं जा रही हैं.

आजादी के बाद पहली बार भारत से रिकॉर्ड 1 लाख 75 हजार 25 मुसलमान हज 2018 के लिए जायेंगे. इस वर्ष हज पर जाने वालों में रिकॉर्ड 47 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं.

इस साल के हज के लिए योजनाओं की बात करते हुए  नकवी ने कहा कि हज सब्सिडी खत्म होने और सऊदी अरब में विभिन्न करों में वृद्धि के बावजूद भारत से जाने वाले हज यात्री पर कोई नाजायज बोझ नहीं पड़ने दिया जा रहा है.

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फिर भी इस बार भारत से रिकॉर्ड संख्या में लोग जा रहे हैं हज करने
साथ ही पहली बार भारत सरकार ने हज जाने वालों को अपने मूल इंबार्केशन प्वाइंट (प्रस्थान स्थल) के बजाए किसी भी इंबार्केशन प्वाइंट से हज के लिए रवाना होने की छूट भी दी है.

हालांकि सरकार हज सब्सिडी खत्म कर चुकी है. और सऊदी अरब ने भी कई कर बढ़ा दिए हैं. पर फिर भी अब तक भारत से हज पर जाने वालों की यह सबसे बड़ी संख्या है.

ग्रीन श्रेणी की सीटें कम होने के चलते हुई हाजियों को असुविधा
इस साल ग्रीन श्रेणी में 30 हजार मुसलमान चयनित किए गये हैं. सऊदी सरकार ने मक्का में चल रहे निर्माण के चलते 12 ग्रीन श्रेणी की 12 हज़ार सीटें घटा दी हैं. जून में जब यह खबर लोगों को दी गई तो कहा गया कि वे खुद अपने नाम अजीजिया के लिए भेज दें. अगर वे ऐसा नहीं करते तो लॉटरी निकालकर 18 हज़ार लोगों को इसके लिए रखा जायेगा. बाकी लोगों को अजीजिया कैटेगरी में डाल दिया जायेगा. इसलिए बाकी सारे हाजी अजीजिया श्रेणी में जा रहे हैं.

ग्रीन कैटेगरी: खान-ए-काबा से मात्र 100 मीटर की दूरी पर ठहराया जाता है जिससे वह हर वक्त इबादत में मशगूल रहते हैं. केंद्रीय हज कमेटी ग्रीन श्रेणी के आजमीन से 2 लाख, 65 हजार रुपये लिए हैं.

अजीजिया कैटेगरी: खान-ए-काबा से करीब 8 से 9 किमी की दूरी पर ठहराया जाता है. इनको खान-ए-काबा तक लाने के लिए बसें लगी होती हैं, इन बसों में कोई किराया नहीं पड़ता. हज कमेटी इस श्रेणी के आजमीन से 2 लाख 25 हजार रुपये लिए गए हैं.

अजीजिया में खाना बनाने की सुविधा
ग्रीन कैटेगरी के आजमीन अपने होटल के कमरे में खाना बनाना तो दूर गैस चूल्हा जलाना भी मना है. ताकि वहां कोई भी हादसा नहीं होने पाए. अजीजिया कैटेगरी के आजमीन खान-ए-काबा से 8 या 9 किमी की दूरी पर हैं जिन्हें खाना बनाने की इजाजत है.

बकरीद पर दी जाने वाली कुर्बानी कैसे होती है
बकरीद यानि ईद-उल-अजहा पर किसी पशु की बलि भी हज के दौरान दी जाती है. लेकिन हर व्यक्ति अपनी-अपनी बलि नहीं देता नहीं तो बहुत गड़बड़ी हो सकती है. काउंटर पर अपने जानवर (भेड़, बकरी या ऊंट) के लिए पैसे जमा कर देते हैं और इसके बाद उन्हें एसएमएस के जरिए उनके जानवर की कुर्बानी की खबर दे दी जाती है. जिसके बाद जाकर वे उसका मांस ले सकते हैं.

इस बार हाजियों को बढ़ी राशि का भुगतान ऐसे करना पड़ा है –

ग्रीन केटेगरी में हज यात्री जिन्हें रूबात की सुविधा नहीं मिली है उन्हें 7750 रु. प्रति हज यात्री. अजीजीया कैटेगरी में जिन्हें रूबात की सुविधा नहीं मिली है उन्हें 7150 रु. प्रति हज यात्री.

ग्रीन केटेगरी में जिन्हें मदीना रूबात की सुविधा मिली है उन्हें 8350 रु. प्रति हज यात्री. अजीजीया केटेगरी में जिन्हें मदीना रूबात की सुविधा मिली है उन्हें 7750 रु. प्रति हज यात्री.

वह हज यात्री जिन्हें केवल मक्का रूबात की सुविधा मिली है उन्हें 6350 रु. प्रति हज यात्री. वह हज यात्री जिन्हें मक्का एवं मदीना में रूबातों की सुविधा मिली है उन्हें 6950 रु. प्रति हज यात्री के मान से राशि जमा कराई है.

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