हिंदी न्यूज़ – When Atal Bihari Vajpayee said for leaving 7 rcr ‘What Protocol? Just Pack Up and Leave’

देबायन रॉय
पूरा देश दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन को लेकर शोक में है. उनके निधन के बाद उनके करीबी रहे लोग उनसे जुड़ीं कई यादें साझा कर रहे हैं. एमएम घटगे भी उनमें से एक हैं, जो बीते 4 साल से लगातार वाजयेपी के आवास पर जाते रहे हैं. हालांकि वह स्मृति स्थल पर वाजपेयी के अंतिम संस्कार में नहीं जा सके.

घटगे कहते हैं कि वहां 5 लाख लोग थे. मैं वहां खो जाता. घाटगे ने कहा कि अगर वाजपेयी सीटी स्कैन कराने के लिए तैयार हो जाते तो उनसे मुलाकात होती ही नहीं. घाटगे ने कहा, ‘वाजपेयी ने उस डिब्बे (सीटी स्टैन मशीन) में जाने से मना कर दिया था.’

लंबे समय से वाजपेयी के दोस्त रहे 80 वर्षीय घाटगे उस समय को याद करते हैं जब आगरा समिट के बाद वाजपेयी लाहौर गए थे. घटगे बताते हैं, ‘नवाज शरीफ और भुट्टो, दोनों ने कहा कि जब अटल जी विदेश मंत्री थे तो भारत के साथ पाकिस्तान के संबंध अच्छे थे. नवाज़ शरीफ ने एक बार अटल जी से कहा था कि वह पाकिस्ता के किसी भी सीट से चुनाव जीत सकते हैं.’यह भी पढ़ें: अब 21 अगस्त को लखनऊ आएगा अटलजी का ‘अस्थि कलश’, कार्यक्रम में बदलाव

घटगे बताते हैं कि वह जब भी पाकिस्तान गए उनसे हमेशा अटल जी और उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा जाता रहा. वह अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ी यादें साझा करते हुए कहते हैं, ‘जब जनता पार्टी की सरकार थी तो अटली जी मुझसे कहा करते थे कि मेरे पास 5 साल हैं और इस मैं भारत के चीन और पाकिस्तान के साथ रिश्तों को सामान्य कर दूंगा.’

घटगे की वाजपेयी से साल 1957 में मुलाकात हुई थी. उन्होंने कहा, ‘मैंने वाजपेयी जी का कोई भी भाषण ऐसा नहीं था जिसे मैंने ना सुना हो. भले ही मैं उनसे 13 साल छोटा और जूनियर था लेकिन वह मुझे विश्वस्त और एक अच्छा दोस्त मानते थे.’

दोनों इतने करीबी थे कि मोरारजी देसाई ने एक बार घटगे को वाजपेयी का ‘अनुयायी’ कह दिया था. एक बार साल 1960 में अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों को देखने के लिए वाजपेयी उनके वाशिंगटन स्थित अपार्टमेंट में रहे थे.

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अल्पसंख्यकों और दलितों पर हमलों की घटनाओं में हालिया तेजी पर क्या वाजपेयी मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना में इस मुद्दे को अलग तरह से संभालते? इस सवाल पर घटगे कहते हैं, ‘समय बदल गया है और कुछ भी नहीं कहा जा सकता है’.

कानून आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष रहे घटगे ने कहा कि विवाद या दंगों के दौरान धर्म मुख्य मुद्दा बन गया है. घटगे ने कहा कि पाकिस्तान से युद्ध के बाद अटल जी ने मुशर्रफ की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया. उन्होंने मुशरर्फ से यह भी कहा था कि वह अपने स्वास्थ्य का ख्याल भी रखें. घाटगे बताते हैं कि यह वाकया मुशर्रफ की हत्या करने की कोशिशों के कुछ दिन बाद का है.

वरिष्ठ वकील घाटगे ने बताया कि वाजपेयी को बड़ा राजनीतिक झटका उस वक्त लगा जब वह 1 वोट से अविश्वास प्रस्ताव हार गए थे. उस वाकये को याद करते हुए घटगे बताते हैं कि 7 रेसकोर्स का बंगला खाली करने की तैयारी हो रही थी. घटगे ने कहा कि उनके निजी सचिव ने कहा कि वह जल्द ही आवास छोड़ने का प्रोटोकॉल पता करते हैं. इस पर अटल जी ने कहा- प्रोटोकॉल की क्या जरूरत है? अपना बैग पैक करो और चलो.’

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क्या कभी अटल जी ने सक्रिय राजनीति में वापसी की चाहत रखी पूछे जाने पर घाटगे ने कहा – नहीं.

घाटगे ने बताया ‘कार्यालय छोड़ने के बाद, उन्होंने मुझसे बात की. अटल जी ने मुझे बताया ‘मैंने 50 वर्षों तक देश की सेवा की है और अब मैं रिटायर होना चाहता हूं’. जब 2008 में परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद मनमोहन सिंह वाजपेयी गए, तो उन्होंने कहा, ‘मैंने आपके द्वारा शुरू किया गया काम पूरा कर लिया है’. अटल जी शांत रहे. मनमोहन ने कहा, ‘भीष्म पितामह, अब कुछ कहें’, लेकिन वाजपेयी चुप रहे.’

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