हिंदी न्यूज़ – ऑफिस में दिन भर अपनी कुर्सी से चिपके रहते हैं तो भूल ही जाइये प्रमोशन की बात । sitting for long hours found to reduce blood flow to the brain

आपने जरूर महसूस किया होगा कि ज्यादा देर तक एक ही ढंग से बैठे रहने पर हाथ या पैर सुन्न पड़ जाते हैं या सो जाते हैं. इसके बाद हमें फिर से उठकर हाथ-पैर हिलाने पड़ते हैं. जिससे कुछ मिनटों में वे फिर से ठीक हो जाते हैं. लेकिन ऐसे हाथ-पैर का लगातार सुन्न पड़ना भविष्य के लिए अच्छा नहीं होता. यह ब्लड सर्कुलेशन के धीमे पड़ जाने या रुक जाने से होता है. हाल ही में एक नई स्टडी सामने आई है जिसमें खुलासा हुआ है कि इस तरह केवल हाथ-पैर ही नहीं बल्कि दिमाग भी सो जाता है. यानि दिमाग भी कई बार सुन्न पड़ जाता है, जब उसतक ब्लड का सर्कुलेशन ठीक से नहीं हो पाता है.

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो बहुत वायरल हुआ. जिसमें वक्त से घर जाते एक कर्मचारी को उसका एक कलीग टोकता है और वह कर्मचारी उसे समझाता है कि वक्त से घर जाना क्यों जरूरी है? यह स्टडी उसी क्रम में एक कदम आगे का डेवलपमेंट है जो आपसे कहती है कि 8 घंटे के ऑफिस के वक्त में भी दिन भर कुर्सी से चिपके न रहें. क्योंकि कई लोग सिर्फ एक या दो बार खाने या बाथरुम जाने के लिए काम के घंटों में उठते हैं. अगर ऐसा करके भी खुद को आप कर्मठ मान रहे हैं और सोच रहे हैं आप बहुत मन से काम कर रहे हैं और इससे आपका प्रमोशन होगा. तो आप गलत हैं. दरअसल ऐसा करने से आपके प्रमोशन में परेशानी आने वाली है.

ज्यादा देर बैठे तो रुक जायेगा प्रमोशन
प्रमोशन हमेशा इस आधार पर होता है कि आपका काम कितना अच्छा है. और देर तक कुर्सी पर बैठे रहना इसमें बाधा हो सकता है. दरअसल एक नई स्टडी के हिसाब से ज्यादा देर बिना हिले-डुले बैठे रहने से दिमाग में खून धीरे पहुंचता है. कामकाजी लोगों के लिए यह स्टडी एक चेतावनी के जैसी है. लंबे समय तक ऐसा ही चलता रहे तो इसका लोगों के दिमाग पर बहुत बुरा प्रभाव हो सकता है. लेकिन अगर वही इंसान उठे और हर आधे घंटे पर 2 मिनट टहल ले तो इसके बुरे प्रभाव को खत्म किया जा सकता है. क्योंकि ऐसा करने से आगे दिमाग का ब्लड फ्लो बना रहेगा.दिमाग कंट्रोल करना चाहता है
हमारे शरीर में कितना खून है, और वह कैसे बह रहा है शायद ही हमारा ध्यान कभी इस ओर जाता होगा. हालांकि यह हमारे जिंदा रहने और होश में रहने के लिए बहुत जरूरी है. दिमाग की कोशिकाओं को ऑक्सीजन और दूसरे पोषक तत्वों की जरूरत होती है. ये तत्व हमारे खून में होते हैं और खून ले जाकर उन्हें दिमाग की कोशिकाओं तक पहुंचाता है. और इस खून को हमारे दिमाग तक ले जाती हैं, कई बड़ी कोशिकाएं. चूंकि खून का दिमाग में पहुंचना बहुत जरूरी है इसलिए दिमाग सारी गतिविधियों की निगरानी बहुत अच्छे से करता है. दिमाग की शरीर के ऐसे कई बाहरी सिग्नलों पर भी मजबूत नजर रहती है. वही हमारे खून में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा से लेकर हमारे शरीर की नसों में एक निर्धारित गति से खून के बहने को नियंत्रित करता है.

हो सकते हैं घातक परिणाम
हालांकि कभी-कभी अचानक या धीरे-धीरे भी खून के शरीर में बहने की गति में गिरावट या तेजी आती रहती है. पिछली कुछ स्टडी में यह भी सामने आया है कि इंसानों और जानवरों में थोड़ी सी और थोड़ी देर के लिए आने वाले ब्लड फ्लो की गिरावट भी हमेशा के लिए सोचने और याद रखने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है. हालांकि अगर ज्यादा देर तक यह ब्लड फ्लो की गिरावट बनी रहे तो इसके घातक परिणाम भी हो सकते हैं. जिससे विक्षिप्तता जैसी कई दिमागी बीमारियां भी हो सकती हैं.

15 लोगों को लाइब्रेरी में बैठाकर किया किया गया रिसर्च
लोग अभी तक यह नहीं समझते थे कि नसों में खून की रफ्तार कम होने से हमारे हाथ, पांव जैसा ही प्रभाव हमारे दिमाग पर भी हो सकता है. लेकिन जून में जर्नल ऑफ अप्लाइड साइकोलॉजी में छपी इस स्टडी ने यह बात साफ कर दी है. यह स्टडी लिवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी, इंग्लैण्ड में 15 स्वस्थ, बालिग और कामकाजी लोगों पर की गई. ये लोग ऐसे थे जिन्हें लंबे वक्त तक ऑफिस में कम्प्यूटर के सामने बैठने की आदत थी. ऐसे लोगों को एक लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ने या कुछ काम करने को कहा गया. बाथरुम भी उनके पास ही था. साथ ही उनका कार्बन डाइऑक्साइड लेवल भी रिसर्चर चेक करते रहे.

इस चुनौती का कैसे करना है सामना?
आपके दिमाग में लगातार खून जाता रहे इसके लिए अपने कम्प्यूटर या फोन पर हर आधे घंटे बाद का अलार्म लगा लीजिये ताकि हर आधे घंटे बाद उठकर आप 2 मिनट टहल सकें और अपने दिमाग को स्वस्थ रख सकें. या फिर पास वाले बाथरूम जाने के बजाए थोड़ी दूर वाले बाथरुम निकल जायें. वैसे एक थोड़ा ज्यादा क्रिएटिव तरीका भी है. आप लगातार पानी पीते रहें. हर 10 मिनट पर पानी पीते रहें. ऐसे में हर आधे घंटे पर आपको बाथरुम जाना ही पड़ेगा.

आपका दिमाग जाहिर है भविष्य में इसके लिए आपको शुक्रिया जरूर कहेगा. जब आप अपनी ऑफिस की कुर्सी से बंधे नहीं होंगे, माने रिटायर हो चुके होंगे.

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