हिंदी न्यूज़ – भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी अटल बिहारी वाजपेयी की महत्वाकांक्षी योजना/Atal Bihari Vajpayee’s ambitious plan East West Corridor

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी अटल बिहारी वाजपेयी की महत्वाकांक्षी योजना

देश के उत्तर पूर्वी भाग को पश्चिमी भाग से जोड़ने वाली स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लागू की गई करोड़ो की एक महत्वाकांक्षी योजना ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर भ्रष्टाचार की बलि चढ़ गई है (File photo)

Tulika

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| News18Hindi

Updated: August 22, 2018, 10:12 PM IST

देश के उत्तर पूर्वी भाग को पश्चिमी भाग से जोड़ने वाली स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लागू की गई करोड़ो की एक महत्वाकांक्षी योजना ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर भ्रष्टाचार की बलि चढ़ गई है. भाग्य की विडंबना देखिए यह सच भी तब सामने आया जब अटल जी की अस्थियां विसर्जन के लिए असम पहुंची.

खस्ता हाल की ये सड़क हिस्सा है भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अधूरे सपने ईस्ट वेस्ट कॉरिडॉर का. यह 20 साल पुरानी एक ऐसे सपने की नींव हैं जिससे अटलजी असम और उत्तर पूर्व को पूरे देश के साथ कदम मिलाकर चलने लायक मजबूत बनाना चाहते थे. आपको जानकर हैरानी होगी मात्र 6 महीने पहले निर्माण पूरा करके NHAI को महासड़क का ये हिस्सा सौंपा गया था.

गैर जिम्मेदाराना तरीके से करोड़ो रुपए खर्च करके बनाई गई करीब 100 मीटर की सड़क जमीन में धंसती जा रही है. इस कॉरिडोर के जरिए वाजपेयी ने नॉर्थ ईस्ट के इस हिस्से को गुजरात के सौराष्ट्र से जोड़ने का एलान किया था. इस निर्माण और देख रेख का जिम्मा सौंपा था राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI को. इस सड़क का कुल एस्टीमेट तय किया गया था 7245 करोड़ 10 लाख रुपए. इस भ्रष्टाचार को लेकर जब हमने NHAI से सवाल किए तो उनका जवाब था, हमने दो ठेकेदारों को काम से निकाल दिया है.

जहां अटलजी के सपनों की इस मार्ग को लेकर NHAI का ये रवैया है, वहीं डोनर मंत्रालय के वेबसाइट में भी साल 2012 के बाद इस कॉरिडॉर की कोई भी नई जानकारी नहीं है. असम और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती श्रीरामपुर से शुरू होने वाली यह कॉरिडॉर सम के बराक वेली के सिलचर में खत्म होती है. असम में यह कॉरिडॉर सिलचर, मैबंग, लामडिंग, डोवोका, नगांव, सोनापुर, गुवाहाटी, नलबारी और बिजनी को जोड़ती है और इसकी दूरी है 670 किलोमीटर. आज पूरे राजमार्ग की खराब हालात ने बराक वेली के यातायात को ठप्प कर रखा है.यूपीए के कार्यकाल में इस कॉरिडॉर का निर्माण कुछ ज्यादा ही थम गया था और इसी दौरान कॉरिडॉर का एनसी हिल्स जिला (अब डिमा हासाऊ जिला) वाला अहम हिस्सा सन 2014 तक पूरा करने का समय बांध दिया गया. लेकिन ढेर सारे कारणों को दर्शाते हुए यह लक्ष्य पूरा ना हो सका. कभी उग्रपंथ तो कभी एनीमल कॉरिडोर का झमेला सड़क के बनने में रोड़ा बना.  2014 में केंद्र में नई सरकार आने के बाद काम के रवैये में तेजी तो आई लेकिन ग्राउंड में अभी भी वो ब्यूरोक्रेटिक रेड टेपिजिम की शिकार थी. जिसकी कीमत चुका रही है बराक और ब्रह्मपुत्र वैली की आवाम.

असम में गुरुवार को अटलजी जी की अस्थियां ब्रह्मपुत्र और बराक नदी में विसर्जन के लिए लाई तो जा रही है लेकिन उनके सपनों की सड़क से होकर नहीं. महासड़क ना बन पाने के कारण ब्रह्मपुत्र वैली से बराक वैली जाने के लिए लोगों को दूसरे राज्य मेघालय से होके गुजरना पड़ता है. बीते दिनों एनआरसी फाइनल ड्राफ्ट में जिन लोगों का नाम नहीं आया उन्हें अपने ही स्टेट में ट्रेवल करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा.

मेघालया के स्टूडेंट्स यूनियन ने ड्राफ्ट में नाम ना आने वाले लोगों को बीच रास्ते रोक कर उनके आने-जाने में मुश्किलें बढ़ाई. असम को गुजरात के से रोड कनेक्टिविटी के माध्यम से देश के इस प्रान्त की अर्थनीति सुधारने का एक बेहतरीन प्रोजेक्ट था ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर. आज उनकी अस्थियां विसर्जन के लिए बीजेपी सरकार असम ला तो रही है लेकिन सही मायने में अटलजी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि केवल उनके इस अधूरे सपने को पूरा करके ही दी जी सकती है.

 

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