हिंदी न्यूज़ – इवेंट मैनेजमेंट में आकर्षक कोर्सेज के नाम पर फर्जी डिग्रियों का कोरोबार – Fraud degree courses in event management in Ahmedabad

अभिषेक पांडेय

अहमदाबाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इवेंट मैनेजमेंट (NIEM) नाम की एक संस्था में तकरीबन 800 बच्चे पढ़ रहे हैं, लेकिन पता चला है कि लुभावने नारों वाली इस संस्था के पास डिग्री देने का कोई वैध अधिकार ही नहीं है. अहमदाबाद के अलावा मुंबई और पुणे में चल रही इस संस्था को मानव संसाधन मंत्रालय या यूजीसी की ओर से मान्यता नहीं है.

इस बारे में पूछे जाने पर अहमदाबाद NIEM के सेंटर हेड पीयूष सागर ने बताते हैं –“सिंघानिया यूनिवर्सिटी के साथ हमारा एकेडेमिक कोलब्रेशन है. सिंघानिया यूनिवर्सिटी यूजीसी से मान्यता प्राप्त एक निजी यूनिवर्सिटी है. हम लोग उनके साथ मिलकर डिग्री देते हैं. हमारे छात्र पहले वहां रजिस्टर्ड होते हैं फिर हमारे यहां एडमिशन लेकर पढ़ते हैं.”

यूजीसी के नियमों के जानकर इसे ठीक नहीं मानते. नियमों के मुताबिक डिग्री या सर्टिफिकेट एक कानूनी दस्तावेज है, और उसे सिर्फ नियमों के तहत ही दिया या लिया जा सकता है. डिग्री या सर्टिफिकेट देने का अधिकार यूजीसी अथवा संसद से स्वीकृति प्राप्त संस्थानों के पास ही है. उसके अलावा इसे किसी भी प्रक्रिया से नहीं लिया जा सकता और यदि कोई अन्य तरीके से देता या लेता है तो वह रद्दी के दुकड़े से ज्यादा नहीं है और ऐसा करना कानूनी रूप से अपराध है.

यूजीसी के दिशानिर्देश इंटरनेट पर भी हैं

गुजरात यूनिवर्सिटी के पूर्व -कुलपति और गुजरात सरकार के उच्च शिक्षण सलाहकार ए यू पटेल कहते हैं,-“लगभग हर साल यूजीसी विविध प्रकाशनों के माध्यम से चेतावनी प्रकाशित करती है कि, ‘अभी देश की किसी भी प्राइवेट यूनिवर्सिटी के पास ऑफ़-कैम्पस डिग्री अथवा सर्टिफिकेट देने अधिकार नहीं है. यदि कोई ऐसी डिग्री-सर्टिफिकेट देता है तो वह अमान्य है’. देश की मौजूदा निजी यूनिवर्सिटी को सिर्फ अपने कैम्पस में ही कॉलेज चलाने और डिग्री-सर्टिफिकेट देने का अधिकार हैं.”

सिंघानिया यूनिवर्सिटी के पास अभी उसके झुंझुनू-राजस्थान स्थित मूल कैम्पस में ही डिग्री सर्टिफिकेट देने एवं विविध विषयों के संचालन का अधिकार है. उसके बाहर यदि वह डिग्री दे रही है तो वह भी फर्जी डिग्री देने के मामले में फंस सकती है. “प्रोफ़ेसर यशपाल वर्सेस स्टेट ऑफ़ छत्तीसगढ़ (2003) के जजमेंट में सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को एवं उसके नियमों को सर्वोच्च माना है तथा उस जजमेंट के अनुसार प्राइवेट यूनिवर्सिटी अपने मूल कैम्पस के बाहर कोई डिग्री-सर्टिफिकेट न तो दे सकती है और नहीं कोई कॉलेज खुद चला सकती है और न ही किसी फ्रेंचाइजी अथवा संलग्नता के मॉडल पर चला सकती है.”

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यह भी बताया गया कि यूजीसी के मान्य कोर्सेस में “डिप्लोमा इन इवेंट मैनेजमेंट, पीजी डिप्लोमा इन इवेंट मैनेजमेंट, एडवरटाइजिंग एंड मिडिया मैनेजमेंट, बीबीए इन इवेंट मैनेजमेंट, एमबीए इन इवेंट मैनेजमेंट” जैसे कोर्सेस को मान्यता नहीं है.” ये जितने भी कोर्सेस है NIEM और सिंघानिया यूनिवर्सिटी मिलकर चला रही हैं वह यूजीसी के अनुसार अमान्य है. यूजीसी ने सिंघानिया यूनिवर्सिटी और NIEM को पत्र लिखकर यूजीसी ने जवाब भी माँगा है. जिसका जवाब इन संस्थाओं ने नहीं दिया है.

जानकारों का आरोप है कि NIEM अहमदाबाद, मुंबई, बंगलौर, पुणे, जयपुर, लखनऊ जैसे शहर को चिन्हित कर, वहां एक किराए पर ऑफिस बनाता, उसके बाद छोटे-छोटे अंग्रेजी समाचार पत्रों में, रेडियो एफएम, और कुछ होर्डिंग के माध्यम से ग्लैमरस विज्ञापन कर अपर मिडल क्लास के विद्यार्थीयों को टारगेट करता है. संस्था विद्यार्थीयों को डिप्लोमा इन इवेंट मैनेजमेंट, पीजी डिप्लोमा इन इवेंट मैनेजमेंट, एडवरटाइजिंग एंड मीडिया मैनेजमेंट, बीबीए इन इवेंट मैनेजमेंट, एमबीए इन इवेंट मैनेजमेंट जैसे कोर्सेज ऑफर कराती है. ऐसा लगता है कि इनके पास हर इच्छुक छात्र के लिए कोई न कोई डिप्लोमा या डिग्री प्रोग्राम होता ही है. फीस जमा करने के बाद निर्धारित समय के बाद ये उसे डिग्री या डिप्लोमा बनाकर दे देते है.

ये भी बताया जा रहा है कि शिकायत मिलने पर यूजीसी पत्र लिख कर संस्थाओं से सफाई मांगता है. न मिलने पर यूजीसी राज्य सरकारों को पत्र लिखता है. लेकिन पत्र सत्ता के गलियारों में घूमते रहते हैं और छात्र इस तरह की संस्थाओं से कागज के टुकड़े की शक्ल में डिग्रियां लेकर नौकरी के लिए सड़क पर खाक छानते रहते हैं।

 

 

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