हिंदी न्यूज़ – क्यों एक के बाद एक आम आदमी पार्टी के फाउंडिंग मेंबर इस्तीफा दे रहे हैं? -The Curious Case of AAP Founding Members Exiting the Party; Ashish Khetan too Joins the List

(उदय सिंह राणा)

बुधवार को खबर आई कि आम आदमी पार्टी के फाउंडिंग मेंबर और दिल्ली डायलॉग कमिशन के वाइस चेयरमैन आशीष खेतान ने इस्तीफा दे दिया है. अरविंद केजरीवाल की पार्टी से ऐसे नेताओं का निकलना लगातार जारी है जिसने पार्टी खड़ी की थी.

खेतान ने पार्टी में किसी भी तरह के मतभेद से इनकार किया और कहा कि उनका ध्यान पूरी तरह से अब लॉ प्रैक्टिस पर है. लेकिन आम आदमी पार्टी से एक के बाद एक पुराने नेताओं के इस्तीफे से कई सवाल खड़े होते हैं. आखिर क्यों फाउंडिंग मेंबर एक के बाद एक पार्टी छोड़ रहे हैं?

वैसे खेतान ने पार्टी छोड़ने की घोषणा 22 अगस्त को की लेकिन कहा जा रहा है कि उसने 15 अगस्त को ही केजरीवाल को अपना इस्तीफा भेज दिया था. इसी दिन पूर्व पत्रकार आशुतोष ने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया था. इस्तीफे के बाद खेतान ने अपने फेसबुक पोस्ट पर कहा, ”मेरे इस्तीफे को राजनीति से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए. मुझे पार्टी और कार्यकर्ताओं से ढेर सारा प्यार मिला है.”कहा जा रहा है कि खेतान और आशुतोष दोनों पार्टी से नाराज थे. दोनों नेताओं की बात पार्टी ने बात नहीं मानी थी. खेतान 2019 में लोकसभा चुनाव नई दिल्ली सीट से लड़ना चाहते थे. 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में नई दिल्ली सीट पर अशीष खेतान को 2.9 लाख वोट मिले थे और वो बीजेपी की मीनाक्षी लेखी से 1.6 लाख वोट से हार गए थे. इसके अलावा आशुतोष इस बात से नाराज थे कि पार्टी ने उन्हें राज्यसभा नहीं भेजा.

साल 2014 से ही आप के नेताओं के बीच असंतोष की लहर दिखने लगी थी. उस उक्त इस पार्टी को राजनीतिक मंच पर दो साल भी नहीं हुए थे. उस वक्त फाउंडिंग मेंबर शाजिया इल्मी ने पार्टी के अंदर लोकतंत्र की कमी का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था. इल्मी इसके तुरंत बाद बीजेपी में शामिल हो गईं.

इसके बाद पार्टी को सबसे बड़ा झटका एक साल बाद लगा जब फाउंडिंग मेंबर के अहम नेता योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया. अरविंद केजरीवाल के समर्थकों ने दावा किया कि यादव और भूषण केजरीवाल की छवि को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं. छवि खराब करने के लिए ये दोनों “झूठी खबरें” फैला रहे थे. बाद में इन दोनों नेताओं ने ‘स्वराज अभियान’ नाम से अपनी एक पार्टी बना ली. इन दोनों की बर्खास्तगी के तुरंत बाद, एक और संस्थापक सदस्य मयंक गांधी ने पार्टी को छोड़ दिया. गांधी ने आरोप लगाया कि केजरीवाल “गटर पॉलिटिक्स’ कर रहे हैं.

जब ऐसा लगा कि अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी को संकट से उबार लिया है तभी पार्टी में एक और कांड हो गया. साल 2017 में पार्टी ने केजरीवाल के करीबी कपिल मिश्रा को कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया. बर्खास्त होने के एक दिन बाद, उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल को कैबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन से गैर कानूनी तरीके से 2 करोड़ रुपये कैश में मिले थे. मिश्रा के आरोपों के बाद बीजेपी नेताओं ने केजरीवाल के खिलाफ सोशल मीडिया पर हंगामा खड़ा कर दिया. मिश्रा अब भी एक विधायक हैं, लेकिन सिर्फ नाम मात्र के आप के सदस्य हैं.

अरविंद केजरीवाल ने एक बार कवि से नेता बने कुमार विश्वास को अपना भाई कहा था. लेकिन आज दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं होती है. नवंबर 2012 में अरविंद केजरीवाल ने अपने सबसे भरोसेमंद साथी मनीष सिसोदिया के साथ मिलकर औपचारिक रूप से आम आदमी पार्टी को लॉन्च किया था. सिसोदिया ने उस वक्त 23 नामों की एक लिस्ट की घोषणा की थी. इसमें पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्यों के नाम थे. कुमार विश्वास को भी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में जगह दी गई. लेकिन धीरे-धीरे केजरीवाल और कुमार विश्वास की दोस्ती टूट गई. केजरीवाल ने सलाह के लिए संजय सिंह जैसे दूसरे नेताओं पर भरोसा करना शुरू कर दिया.

पिछले साल पार्टी के लिए पंजाब में विधानसभा चुनाव काफी अहम था. एक अहम नेता होने के बावजूद कुमार विश्वास को पंजाब में चुनाव प्रचार से दूर रखा गया. पार्टी के सूत्रों ने कहा कि विरोधी दल कुमार विश्वास के पुराने बयान निकाल कर पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं. साथ ही उनके पुराने बयानों से सिख भी अपमानित महसूस कर सकते हैं. पंजाब में हार के बाद कुमार विश्वास ने कहा कि पार्टी किस दिशा में जा रही है इसके लिए आत्ममंथन की जरूरत है. कुमार विश्वास ने उस वक्त केजरीवाल को खुली चुनौती दे दी थी.

कुमार विश्वास अब भी आम आदमी पार्टी के सदस्य बने हुए हैं. इस साल अप्रैल में पार्टी ने कुमार विश्वास को राजस्थान के प्रभारी पद से हटा कर दीपक वाजपेयी को ये ज़िम्मेदारी दे दी. इसके अलावा पंजाब में भी पार्टी के अंदर घमासान मचा हुआ है.

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