हिंदी न्यूज़ – Neeraj Chopra won gold medal in Asian Games 2018. नीरज चोपड़ा ने एशियन गेम्‍स में जीता गोल्‍ड मेडलज

नीरज चोपड़ा- आर्थिक तंगी के बाजूवद किसान के बेटे ने जिद से जीता जहां

नीरज चोपड़ा

News18Hindi

Updated: August 27, 2018, 7:16 PM IST

भारतीय जेवलिन खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करते हुए 18वें एशियाई खेलों में पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में गोल्‍ड मेडल अपने नाम किया. उन्‍होंने अपनी सर्वश्रेष्ठ थ्रो 88.06 मीटर की फेंकी और मेडल पर कब्जा जमाया. नीरज ने यह मेडल पांच में से दो प्रयासों में विफलता के बाद भी हासिल किया. यह भारत के लिए एशियाई खेलों में जेवलिन में पहला पहला गोल्‍ड मेडल है. जबकि मौजूदा एि‍शियाई खेलोंं में यह भारत के लिए नौवां गोल्‍ड मेडल है.

बहरहाल,एशियाई खेलो में भारत को गोल्ड मेडल दिलाने वाले नीरज चोपड़ा का यह सफर कतई आसान नहीं रहा है. यह खुद-ब-खुद में संघर्ष और संकल्प की एक अद्भुत कहानी है. हरियाणा के पानीपत के एक किसान के बेटे नीरज एक समय पर उस खेल का नाम तक नहीं जानते थे जिसमें उन्होंने आज इतिहास रच दिया है.

खेल कूद के शौकीन नीरज चोपड़ा दोस्तों के साथ घूमते फिरते एक दिन पानीपत के शिवाजी स्टेडियम जा पहुंचे. वहां अपने कुछ सीनियर्स को जैवलिन थ्रो करते हुए देख, खुद ने भी भाला थाम लिया. पहली बार जेवलिन थ्रो करने वाले नीरज को उस दिन लगा कि यह खेल उनके लिए जिंदगी है. वह इसमें आगे बढ़ने के बारे में सोचने लगे, लेकिन मध्यम वर्गीय परिवार में जन्में ज्यादातर बच्चों के ख्वाब तो उनकी आंखों में ही मर जाते हैं.

यूं किया आर्थिक तंगी का सामनानीरज के लिए भी यह बहुत आसान तो नहीं था. वह जानते थे कि एक ज्वांइट परिवार में किसी एक व्यक्ति पर ज्यादा खर्च नहीं किया जा सकता. घर के आर्थिक हालात भी उनसे छिपे नहीं थे, लेकिन इन सब पहलुओं को दरकिनार करते हुए उन्होंने भाला थाम लिया. और अपनी प्राकृतिक ताकत के बूते पहले राष्ट्रीय स्तर पर कई मुकाबले जीते तो फिर महज 18 साल की उम्र में अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपना और अपने देश का नाम दर्ज करवा दिया.

महज 18 साल की उम्र में अंडर 20 वर्ल्ड चैंपियनशिप में रिकॉर्ड तोड़ते हुए उन्होंने गोल्ड मेडल जीता. इसी के साथ किसी भी प्रतिस्पर्धा में वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले वह पहले भारतीय एथलीट बन गए.

यू ट्यूब को बनाया गुरु
नीरज के जेवलिन थ्रो में रिकॉर्ड रचने के बाद भारतीय जैवलिन थ्रो के कोच गैरी कॉलवर्ट्स ने संघ से विवाद के चलते अप्रैल 2017 में इस्तीफा दे दिया था. गैरी के जाने के बाद भारतीय जैवलिन थ्रो टीम के पास कई महीनों तक कोई कोच नहीं था. गैरी की ही कोचिंग में नीरज ने वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किया था. उनके जाने के बाद नीरज नें यू-ट्यूब का सहारा लेते हुए अपनी ट्रेनिंग जारी रखी. हालांकि इस दौरान वह लंदन विश्व चैंपियनशिप में कोई खास प्रदर्शन नहीं कर सके थे.

खराब प्रदर्शन से जूझ रहे नीरज ने फिर तीन महीने जर्मनी में ट्रेनिंग ली. जिसके बाद भारत वापिस आ कर कोच ओवे होम की निगरानी में कोचिंग की. फिर कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में पहली बार हिस्सा लेने पहुंचे. कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज से लोगों को अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद तो थी लेकिन उस उम्मीद को मेडल में तब्दील खुद उन्होंने किया. नीरज ने गोल्‍ड मेडल जीता था.

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