हिंदी न्यूज़ – Shock Congress and Surprise Voters: Why KCR is Pinning His Hopes on Early Assembly Polls-कांग्रेस को झटका या वोटर्स को सरप्राइज़? आखिर तेलंगाना में जल्द चुनाव क्यों चाहते हैं KCR?

डीपी सतीश
तेलंगाना में तय वक्त से पहले विधानसभा चुनाव कराने की अटकलों के बीच सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) रविवार को हैदराबाद में एक विशाल जनसभा करने जा रही है. ऐसा कहा जा रहा है कि इस दौरान करीब 25 लाख लोगों के बीच मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव विधानसभा भंग करने का ऐलान कर सकते हैं. इस दौरान वे जनता के सामने अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड भी पेश करने वाले हैं.

केसीआर ने बुलाई कैबिनेट मीटिंग, वक्त से पहले चुनाव कराए जाने की अटकलें तेज़

दरअसल, तेलंगाना राज्य के गठन की आज चौथी सालगिरह है. इस मौके पर माना जा रहा है कि केसीआर नाम से लोकप्रिय सीएम के चंद्रशेखर राव आज चुनावी बिगुल फूंकेंगे. वैसे तो तेलंगाना विधानसभा का कार्यकाल मई 2019 में लोकसभा के साथ पूरा होगा. लेकिन, ऐसी अटकलें लगाई जा रही है कि तेलंगाना में समय से पहले चुनाव हो सकते हैं. चर्चा है कि केसीआर नवंबर से दिसंबर के बीच में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम के चुनाव के साथ ही तेलंगाना का भी चुनाव चाहते हैं. तेलंगाना राष्ट्र समिति भी इस फैसले को लेकर अपने नेता का पूरा समर्थन करती दिख रही है.

केसीआर ने विधानसभा भंग करने के मुद्दे पर रविवार को कैबिनेट मीटिंग भी बुलाई है. तेलंगाना में पहली विधानसभा के लिए मई 2014 में चुनाव हुए थे. राव का कार्यकाल मई 2019 में पूरा हो रहा है. सवाल ये है कि केसीआर की इस इच्छा के पीछे मंशा क्या है? क्या वो जल्द चुनाव कराकर कांग्रेस को झटका देना चाहते हैं या वोटर्स को हैरान करना?

अगर बात करें तेलंगाना के राजनीतिक संकट की, तो ये संकट नया नहीं है. राजनीति के मंझे खिलाड़ी केसीआर ने इस राजनीतिक संकट को काफी पहले भांप लिया था. शायद इसलिए वो बीते 50 महीनों से लगातार विधानसभा चुनाव जल्द कराने की कोशिशों में जुटे हैं. क्योंकि, केसीआर जानते हैं कि राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है. वोटर्स कभी भी अपना फैसला बदल सकते हैं. इसलिए वो जल्द चुनाव कराने के मूड में हैं.

केसीआर के इस फैसले की एक वजह बीजेपी की है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने हाल ही में अपने पार्टी नेताओं से तेलंगाना में विधानसभा चुनाव इस साल के अंत तक होने की बात कही थी, उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से तय वक्त से पहले चुनाव के लिए तैयार रहने के लिए भी कहा था.

लेकिन, शायद केसीआर इस बात से अच्छी तरह से वाकिफ हैं कि अगर वो लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बीजेपी के साथ गठजोड़ करते हैं, तो आगे जाकर उनकी दिक्कतें बढ़ सकती हैं. ऐसे में केसीआर को लगता है कि अपने राज्य के हितों की रक्षा के लिए तय समय से पहले चुनाव कराना ही एकमात्र रास्ता है.

अगर बात करें तेलंगाना के वोट शेयर की, तो यहां 13 फीसदी मुस्लिम वोटर्स हैं और ईसाई वोट का शेयर महज़ 2 फीसदी है. मुस्लिम वोटर्स की बदौलत ही 2014 में केसीआर की पार्टी टीआरएस राज्य की सत्ता में आई थी. यहां तक की उपचुनावों में भी मुस्लिम वोटर्स की वजह से ही टीआरएस ने बेहतर प्रदर्शन किया था. अगर टीआरएस बीजेपी के साथ गठजोड़ करती है, तो संभव है कि केसीआर को मुस्लिम वोट बैंक की नाराज़गी का सामना करना पड़े और इसका सीधा फायदा विपक्षी पार्टी कांग्रेस को हो. किसी भी सूरत में केसीआर ऐसा होने देना तो नहीं चाहेंगे.

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